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महाराष्ट्र: कुपोषित बच्चों को अब बिना आधार नहीं मिलेगा आहार

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 April 2018, 12:17 IST

महाराष्ट्र सरकार की निशुल्क पोषण योजनाएं जो कि कुपोषित बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सरकार द्वारा संचालित है. अब उसका लाभ तभी मिल सकेगा जब आपके पास 'आधार' होगा. 6 अप्रैल को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी किये एक नोटिफिकेशन में आधार को 'आवश्यक' कर दिया गया है. नोटिफिकेशन में लाभार्थियों के आधार कार्ड नंबर दर्ज करना शुरू करने के आदेश दिए गए हैं.

मराठी भाषा में आई ये अधिसूचना इस साल 6 फरवरी को केंद्र की दिशा पर चलती दिख रही है. राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा, '' अगर किसी लाभार्थी के पास आधार कार्ड नहीं है या आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शुरू नहीं करि है और स्कीम का लाभ उठाता पाया जाएगा तो बाल विकास परियोजना अधिकारी इसका जिम्मेदार होगा.

इस अधिसूचना से पांच लाख से ज्यादा गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करने वाली महिलों पर असर पड़ेगा. साथ ही 61 लाख बच्चों पर असर पड़ेगा जिनकी उम्र 6 साल से कम है और जिन्होंने 97,287 आंगनबाड़ी केंद्रों में नाम लिखवाया है.

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कुपोषण से लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के कदम का विरोध किया है. उनका मन्ना है कि इस फैसले से महाराष्ट्र में ककुपोषण का स्टार और ज्यादा बढ़ जायेगा. 2016 में 6.49 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार थे, जिसमे से 83,288 गंभीर रूप से कुपोषित थे. 2017 नवंबर तक 6 साल से काम उम्र के कुपोषित बच्चों की संख्या 6.29 लाख थी और 10 प्रतिशत बच्चे कुपोषित थे जो की आंगनवाड़ी में रजिस्टर्ड हुए.

एक्टिविस्ट पूर्णिमा उपाध्याय ने कहा, '' ये अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के खिलाफ है. हम हाई कोर्ट में अपील करेंगे अगर राज्य सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो.'' पूर्णिमा मेलघाट के 'खोज' नाम के एक एनजीओ से जुडी है, जो की कुपोषण से सबसे बुरी तरह प्रभावित माना जाता है.

 

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जब महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्रेटरी से इस पर बात करनी चाही तो उन्होंने कहा की वो इस विषय पर कुछ बात नहीं करना चाहती है.

एक्टिविस्ट ब्रायन लोबो के मुताबिक, आधार लिंकेज से जुड़े मुद्दों ने जनजातीय पालघर जिले में पहले से ही शुरूआत कर दी है जहां महिला लाभार्थियों को बैंक खाते बनाने के लिए आधार विवरण देने के लिए कहा जा रहा है.

लोबो ने कहा, ''आधार लिंक कराने को निशुल्क पोषण स्कीम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. जनजातीय महिलाओं में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिनका आधार उनके मायके में बना होता है और शादी के बाद उनका नाम और सरनेम बदल जाता है. उन्हें इस स्कीम का लाभ लेने के लिए कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि उनका बदला हुआ नाम उनके आधार से मेल नहीं खाता.''

इसकी अधिसूचना में, डब्ल्यूसीडी विभाग ने इस प्रक्रिया का भी विस्तृत विवरण दिया है कि लाभार्थियों को दर्ज करते समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और बाल विकास परियोजना अधिकारी को इस प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. 
आँगनवाड़ी में पोषण संबंधी पूरक पाने के लिए बच्चों के लिए, उनके आधार संख्या और उनके माता-पिता का आधार संख्या पंजीकृत होना चाहिए. ऐसी स्थिति में जहां बच्चे का कोई आधार नहीं है, जिला अधिकारियों को उसका आधार बनाने में मदद करनी चाहिए. आधार कार्ड बनाने के लिये अन्य डाक्यूमेंट्स जैसे कि राशन कार्ड, वोटर आईडी बैंक पासबुक आदि होना जरुरी है.

विनोद शिंदे जो कि एनजीओ साथी से जुड़े हैं उन्होंने इस बारे में कहा, ''इस सामाजिक योजना का उद्देश्य था कि 6 साल से काम के बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सके. लेकिन अगर किसिस कुपोषित बच्चे के पास आधार नहीं हैं खाना मिलने का अधिकार नहीं है.''

First published: 13 April 2018, 12:17 IST
 
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