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किसी वामपंथी से बड़ी वामपंथी थीं महाश्वेता देवी

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 29 July 2016, 8:08 IST
QUICK PILL
  • आदिवासियों के हक और उनके अधिकार के लिए लगातार आवाज उठाने वाली मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी का कोलकाता में 90 साल की उम्र में निधन हो गया.
  • महाश्वेता देवी साहित्य अकादमी, पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानि हो चुकी हैं. उन्हें हजार चौरासी की मां, रुदाली और चोली के पीछे जैसी महान रचनाओं के लिए जाना जाता है.

भारत में जब आदिवासियों के खिलाफ अपराध के मामले बढ़े, जब उन्हें विकास की वजह से विस्थापित होना पड़ा, कुपोषण की वजह से मरना पड़ा तब उनके लिए एक इंसान हमेशा खड़ा दिखा. 

राहुल गांधी तब राजनीति में आए भी नहीं थे, जो बार-बार आदिवासियों के हक की आवाज उठाते रहे हैं. आदिवासियों के हितों के लिए लगातार संघर्ष करने वाली महान लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का गुरुवार को निधन हो गया.

देवी 90 साल की थीं और उन्हें 23 जुलाई को हार्ट अटैक हुआ था. उनका इलाज कोलकाता के बेल व्यू क्लिीनिक में पिछले दो महीने से चल रहा था. 

महाश्वेता देवी साहित्य अकादमी, पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं. उन्हें  हजार चौरासी की मां, रुदाली और चोली के पीछे जैसी महान रचनाओं के लिए जाना जाता है.

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'भारत ने एक महान लेखिका को खो दिया है. बंगाल की मां अब नहीं रहीं.' ममता यह कहना नहीं भूली कि अब उन्हें निजी तौर पर दिशा दिखाने वाली इस दुनिया में नहीं रहीं.

महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में एक समृद्ध परिवार में हुआ था. उनके पिता मनीष घटक मशहूर कवि थे.

महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में एक समृद्ध परिवार में हुआ था. उनके पिता मनीष घटक मशहूर कवि थे और उनके भाई ऋत्विक घटक फिल्म निर्देशक थे.

सचिन चौधरी उनके मामा थे जो इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के संस्थापक संपादक थे. 

उनकी शादी बिजन भट्टाचार्य से हुई जो इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य थे और उनके बेटे नबारुण भट्टाचार्य एक क्रांतिकारी फिक्शन लेखक थे. उनके काम में जादुई यथार्थवाद और तीखे व्यंग्य का मिश्रण देखने को मिलता है.

करीब 2009 में मुझे उनसे मिलने का मौका मिला. गोल्फ ग्रीन क्वार्टर में वह रहती थीं. जब मैं उनसे मिलने पहुंचा तो एक युवा उनसे बातचीत कर रहा था. जिसकी उम्र करीब 16-17 साल रही होगी. बाद में पता चला कि वह बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाके से था और उसने महाश्वेता देवी को पढ़ रखा था. लड़का आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ना चाहता था और वह लंबी दूरी तय कर उनसे मिलने आया था ताकि वह उनसेे दिशानिर्देशन ले सके.

मैंने राजनीतिक विज्ञान में हाल ही में अपना पीजी पूरा किया था और फिर हमारी बातचीत तत्काल शुरू हो गई. लेकिन उस बातचीत में कोई अनुभव नहीं था. लेकिन उन्होंने उस वक्त जो कहा कि वह ताउम्र मेरे साथ रहेगा.

उन्होंने कहा, 'अगर आप आदिवासियों के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं तो आपको उनके बीच जाना होगा और वहां महीनों रहना होगा. उनकी संस्कृति सीखनी होगी और उनकी जीवनशैली अपनानी होगी. इसके  बाद ही आप उनसे भावनात्मक स्तर पर जुड़ सकेंगे. मेरे शुरुआती दिनों में मैं एक आदिवासी गांव में खाना खाने के लिए जाया करती थी. वह मुझे चावल और मिर्च का मसाला देते थे. शहर से आने की वजह से मेरे लिए यह नया था. इसलिए मैंने पूछ डाला कि इसका चावल के साथ क्या करना है?' उन्होंने कहा, 'मां, यह चावल ही आपकी भूख मिटाएगा.'

यह पहली बार था जब उन्हें आदिवासियों की दयनीय स्थिति के बारे में पता चला. साथ ही उन्हें यह पता चला कि किस तरह आदिवासियों को भूखे मरना पड़ता है. पहली बार मैं प्रेरित महसूस कर रहा था.

इसी दौरान महाश्वेता देवी ने सिंगूर और नंदीग्राम को लेकर वामपंथ के खिलाफ लिखना शुरू किया. ममता बनर्जी ने निश्चित तौर पर इस मौके को लपका और फिर तो कई बुद्धिजीवियों ने वामपंथ के खिलाफ लिखते हुए ममता का समर्थन किया.

वामपंथी कार्यकर्ताओं ने उस वक्त बड़ी गलती कर दी जब उन्होंने महाश्वेता देवी को बदनाम करना शुरू कर दिया. मुझे याद है कि मैं एक स्थानीय वामपंथी नेता को यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि महाश्वेता देवी कभी बिक नहीं सकतीं. वह तृणमूल की प्रवक्ता नहीं हैं और संभवत: वह किसी वामपंथी से बड़ी वामपंथी हैं.

हालांकि लोग उनके बारे में यह भूल जाते हैं कि महाश्वेता देवी वह पहली महिला थीं जिन्होंने अलोकतांत्रिक और असहिष्णु बर्ताव के लिए ममता बनर्जी की सबसे पहली आलोचना की. वह ममता बनर्जी के खिलाफ खड़ी हुईं और हाशिए पर पड़े लोेगों के खिलाफ जिंदगी भर आवाज उठाती रहीं. वह कभी किसी से डरी नहीं. यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि उन्हें राजनीति में घसीटा गया और बाद के कुछ सालाें में उन्हें बदनाम भी करने की कोशिश की गई.

First published: 29 July 2016, 8:08 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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