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लेखिका, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2016, 16:45 IST

वरिष्ठ लेखिका महाश्वेता देवी का 90 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद कोलकाता में निधन हो गया है. वो काफी दिनों से कोल्ड इंफेक्शन की समस्या से जूझ रही थीं. कोलकाता के एक निजी अस्पताल में करीब दो महीने से उनका इलाज चल रहा था.

बीते गुरुवार की रात को उनका डायलिसिस किया गया था, लेकिन उससे भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. डॉक्टरों के मुताबिक उनके गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया था. साल 1996 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखिका और समाजसेवी महाश्वेता देवी के निधन पर साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.

आदिवासियों और वंचितों की आवाज रही हैं महाश्वेता देवी

  • उनका जन्‍म 14 जनवरी, 1926 को ढाका (अविभाजित भारत) में हुआ था. उनके पिता मनीष घटक कवि और उपन्यासकार थे और मां धारित्री देवी लेखिका होने के साथ-साथ समाजसेवा से जुड़ी हुई थीं.
  • 1947 में विभाजन के समय महाश्‍वेता देवी का परिवार पश्चिम बंगाल में बस गया. उन्होंने विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में बीए अंग्रेज़ी विषय में किया. इसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर्स की डिग्री ली.
  • बाद में कलकत्ता यूनिवर्सिटी से शिक्षा-दीक्षा पाई और यहां अंग्रेजी की लेक्‍चरर नियुक्‍त हुईं. इसके बाद लेखन कार्य को ज्‍यादा वक्‍त देने के लिए उन्‍होंने 1984 में रिटायरमेंट ले ली.
  • झांसी की यात्रा करने के बाद उन्होंने 1956 में अपनी पहली किताब ‘झांसीर रानी’ (झांसी की रानी) लिखी. दूसरी किताब ‘नटी’ 1957 में प्रकाशित हुई. अगली पुस्‍तक थी ‘जली थी अग्निशिखा’. इन तीनों किताबों में 1857 के प्रथम स्‍वाधीनता संग्राम की पृष्‍ठभूमि का विस्‍तार से जिक्र है.
  • बिहार, बंगाल, उड़ीसा, गुजरात व महाराष्ट्र की जनजातियों के बीच वर्षों तक काम कर चुकीं महाश्वेता देवी ने आदिवासियों और वंचितों के हक को लेकर कई उपन्यास और कहानियां लिखी हैं.
  • उनकी कुछ महत्त्वपूर्ण कृतियों में 'अग्निगर्भ', 'जंगल के दावेदार', '1084 की मां', 'माहेश्वर' और 'ग्राम बांग्ला' आदि हैं. उनकी छोटी-छोटी कहानियों के बीस संग्रह प्रकाशित किये जा चुके हैं और सौ उपन्यासों के करीब प्रकाशित हो चुके हैं.
  • 1980 में उन्होंने पत्रिका 'वर्तिका' का संपादन शुरू किया था. उन्होंने बंधुआ मजदूर, किसान, फैक्टरी मजदूर, ईंट भट्ठा मजदूर, आदिवासियों को जमीन से बेदखल किए जाने और बंगाल के हरेक आदिवासी समुदाय पर वर्तिका के विशेष अंक निकाले.
  • झारखंड में पलामू के बंधुआ मजदूरों के बीच काम करने के अनुभव को लेकर उन्होंने  निर्मल घोष के साथ मिलकर 'भारत के बंधुआ मजदूर' नामक पुस्तक लिखी थी. 
  • महाश्वेता देवी की रचनाओं पर कई फिल्में भी बनीं है. इसमें 1968 में संघर्ष, 1993 में रूदाली, 1998 में हजार चौरासी की मां और 2006 में माटी माई प्रमुख हैं.
  • 1977 में महाश्वेता देवी को रमन मेग्सेसे पुरस्कार प्रदान किया गया. 1979 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला. 1986 में उन्हें पद्म श्री और 2006 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

First published: 28 July 2016, 16:45 IST
 
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