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भारत दलित न होता, तो भी ऐसे ही मारा जाता क्या?

पाणिनि आनंद | Updated on: 30 July 2016, 7:47 IST

भारत पांच रुपए का बिस्कुट खरीदकर घर लौट रहा था. बिस्कुट का पैकेट खुलने से पहले उसका और उसकी पत्नी का मुंह सदा के लिए बंद कर दिया गया. कुल्हाड़ी के तेज़ वारों ने दोनों की गर्दन काट दी और अच्छे भले उजाले वाले दिन की एक खुली सड़क पर दो ज़िंदगियां अपना रास्ता सदा के लिए खो गईं.

भारत का गुनाह था 15 रूपए का कर्ज. लेकिन शायद उससे भी बड़ा गुनाह था उसका दलित होना. तभी तो 15 रुपए के उधार की बहस जातीय द्वेष में तब्दील हो गई. मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले के गांव लखनीपुर का है. यह गांव कुर्रा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है. जहां से उत्तर प्रदेश की सत्ता का आंगन कुल 15 किलोमीटर है.

सैफई मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव का गांव है. सैफई से 15 किलोमीटर दूर केवल 15 रूपए के लिए एक दलित दंपति की नृशंस हत्या राज्य में दलितों की स्थिति और उनकी सुरक्षा के कई वलय खोलती है. अभी तक भाजपा को दलितों के अपमान और हिंसा के लिए घेर रहे विपक्ष को अब राज्य सरकार पर हमला करने की भी वजह मिल गई है.

लेकिन उससे भी ज्यादा बड़ी बात यह है कि इस घटना से जातियों के बीच घिसटते और लड़ते समाज की सच्चाई उजागर होती है.

आर्थिक नहीं, जातिगत कारण

मामला दरअसल यहां से शुरू होता है कि पिछले दिनों भारत ने अपने गांव के एक परचून के दुकानदार अशोक मिश्र से 15 रूपए की तम्बाकू उधार ली थी. भारत इसी दुकान से सामान लेता था लेकिन अभी उधार के 15 रूपए चुकाने की स्थिति न होने के चलते वो गुरुवार को एक दूसरी दुकान पर चला गया.

भारत ने दूसरी दुकान से पांच रूपए का बिस्कुट खरीदा. यह अशोक को बर्दाश्त नहीं हुआ. बिल्कुट खरीदकर जा रहे भारत को अशोक ने गाली देकर पूछा कि वो उसके यहां उधार करता है और फिर दूसरों की दुकान पर भी जाता है.

गालीगलौज और अशोक की आपत्ति पर दोनों के बीच बहस हो गई. यह बात बढ़ने लगी और ताव में आकर अशोक मिश्र ने अपनी दुकान में रखी धारदार कुल्हाड़ी से भारत की गर्दन उड़ा दी. दूसरा हमला उसकी पत्नी की गर्दन पर हुआ और दोनों ने मौके पर ही प्राण त्याग दिए.

हत्या की तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं. भारत की पत्नी की गर्दन से बह रहे खून में उसकी टूटी हुई चूड़ियां और बिस्कुट के फटे पैकेट से निकलकर बिखरे हुए बिस्कुट सने पड़े थे. खून में नहाए शव अमानवीयता और जातिवादी सोच की कहानी कह रहे थे.

तो क्या हत्या का कारण आर्थिक है. एक स्थानीय पत्रकार बताते हैं, "दोनों की हत्या इसलिए नहीं हुई कि 15 रूपए का उधार था. इन दोनों को इसलिए मारा गया क्योंकि दूसरी दुकान पर जाना अशोक को नागवार गुज़रा. अशोक के लिए यह अपमान जैसा था. उसे लगा कि हमसे उधार भी लिया और दूसरी दुकान पर जाने की हिम्मत भी की."

एक अन्य स्थानीय पत्रकार इसे और सुलझाते हुए कहते हैं, "अगर मसला जाति का नहीं होता तो इन दोनों की हत्या न होती. फर्ज़ कीजिए कि इन दोनों दलितों की जगह यह उधार किसी यादव का होता. क्या तब अशोक मिश्र सपने में भी ऐसा सोचते और कुल्हाड़ी उठाने की हिम्मत करते. अशोक का गुस्सा एक युगल पर नहीं, एक दलित युगल पर निकला है".

First published: 30 July 2016, 7:47 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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