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मालेगांव ब्लास्ट : आरोपियों का एनकाउंटर होने पर रिश्तेदार मांग रहे इंसाफ़

अश्विन अघोर | Updated on: 6 January 2017, 7:49 IST

साल 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट से जुड़े विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे. अब एक मृतक आरोपी के रिश्तेदार ने उन पुलिस वालों के लिए फांसी की सजा की मांग की है जिन्होंने कथित रूप से कुछ आरोपियों को मार दिया. महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व सीनियर इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने हाल में कहा है कि मालेगांव बम ब्लॉस्ट केस के दो आरोपी रामचंद्र कसलांगरा और संदीप डांगे को दरअसल पुलिस ने मार दिया है, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में ये अभी भी जिंदा हैं.

मुजावर महाराष्ट्र पुलिस की उस एंटी टेरेरिज्म स्क्वॉड का हिस्सा थे जिसने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट की जांच की थी. मुजावर ने सोलापुर कोर्ट में 27 दिसंबर को दाखिल एक शपथ पत्र में कहा है कि इस मामले में दो आरोपियों की पुलिस कस्टडी में मौत हो चुकी है. मालूम हो कि मालेगांव में 29 दिसंबर 2008 को एक मोटरसाइकिल में लगाए गए बम में विस्फोट से 7 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.

लापता या मौत

मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी बनाये जाने और उसके तुरंत बाद से लापता चल रहे रामचंद्र कालसांगरा के परिजन तब से आज तक सदमे से उबर नहीं सके हैं. अब इस शपथपत्र में जो सच सामने आया है उसके बाद उनकी वेदना और बढ़ गई है. रामचंद्र कालसांगरा के पुत्र देवव्रत कालसांगरा का कहना है कि जब से वह जानलेवा हादसा हुआ है तब से आज तक हम शांति से नहीं जी सके हैं. 

पिता के लिए मेरा आठ साल इंतजार अब व्यर्थ साबित हो रहा है, क्योंकि मेरे पिता अब कभी नहीं लौटैंगे. शपथपत्र में जो दावा किया गया है अगर वह सच है तो मेरे पिता के हत्यारों को मृत्युदंड मिलना ही चाहिए.

अब 22 साल के हो चुके देवव्रत मंगलवार को मुंबई में थे और वहां उन्होंने मीडिया से बात भी की. देवव्रत की मां लक्ष्मीबाई कालसांगरा तथा भाई शिव कालसांगरा ने भी इस दौरान अपने मन की बात मीडिया के सामने रखी.

शपथपत्र में मुजावर ने दावा किया है कि कालसांगरा तथा डांगे को एटीएस ने कस्टडी में मारने के बाद उनके शवों को अज्ञात बताकर 26/11 के मुंबई बम विस्फोट में मारे गए लोगों के शवों के साथ निपटा दिया था. जबकि तभी से कागज पर इन दोनों को जिंदा और भगोड़ा बताया हुआ है.

परिवार का संघर्ष

देवव्रत ने बताया कि वह उस समय सिर्फ 14 साल के थे जब एटीएस उनके पिता को ले गई थी. उस समय यह भी नहीं जानते थे कि एटीएस क्या होती है. उसके बाद हमने उनकी फोटो सिर्फ समाचारों में ही देखी है. यह जानकर हम अंदर से हिल गए हैं कि उनको एटीएस ने मार दिया था. देवव्रत ने बताया कि इन सारी कठिनाइयों के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और इसके लिए कड़ी मेहनत की. देवव्रत ने हाल ही में चार्टर्ड इंजीनियर की परीक्षा पास की है.

रामचंद्र कालसांगरा की पत्नी लक्ष्मीबाई तो मीडिया से चर्चा के दौरान कई बार रो पड़ीं. इस बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले आठ साल के दौरान वे और उनके बच्चे बेहद कठिन परीक्षा के दौर से गुजरे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह तक मैं सोच रही थी मेरे पति जिंदा हैं और आज नहीं तो कल वह घर लौट ही आएंगे. लेकिन मुजावर के दावे ने हमें तोड़कर रख दिया है. महाराष्ट्र सरकार को इन दावों की सत्यता की जांच कर इसके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए.

और परिवार सामने आए

कालसांगरा और डांगे के बारे में इस नए पर्दाफाश के बाद अब वे लोग भी कालसांगरा परिवार के समर्थन में आ गए हैं जिनके परिजन लापता हो चुके हैं. इनमें से एक हैं दिलीप पाटीदार के भाई रामस्वरूप पाटीदार, जो कि मुंबई एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मिसिंग चल रहे हैं. रामस्वरूप का आरोप है कि उनके भाई को इंदौर से मुंबई ले जाया गया था.

रामस्वरूप का आरोप है उसे एटीएस ने इंदौर में उठाया था और वहां से मुंबई ले जाकर मुझे एक पहले से लिखे स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर करने के लिए टॉर्चर किया. मुंबई में कस्टडी के दौरान मुझे थर्ड डिग्री दी गई. पूरे समय वे मुझसे यही पूछते रहे कि मेरा भाई दिलीप कहां है.

रामस्वरूप तो इस बम विस्फोट के सिलसिले में तीन साल की जेल भी काट चुके हैं. 2014 में जेल से रिहा होने के बाद रामस्वरूप ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी जिसके आधार पर कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे. अभी तक कि जांच में एटीएस के दो अधिकारी पूर्व एसीपी राजन घुले और पुलिस निरीक्षक रमेश मोरे को अपहरण, केस में जालसाजी तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी पाया गया है.

कालसांगरा परिवार का केस लड़ने वाले वकील प्रशांत मग्गू ने बताया कि चूंकि पिछले आठ साल से कालसांगरा और डांगे से कोई संपर्क नहीं हो सका है इसलिए मुजावर के दावों में सत्यता नजर आती है. मुजावर की बात में विश्वास करने की वजह तो हैं. महाराष्ट्र सरकार को इन दावों की जांच अवश्य करनी चाहिए.

कौन हैं मेहबूब मुजावर

पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर को मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच करने के लिए एटीएस में नियुक्त किया गया था. वह 2009 तक इस ब्लास्ट जांच टीम के सदस्य थे. उनका मुख्य कार्य इस मामले में इंटेलीजेंस एकत्र करने का था. 

मुजावर को पिछले महीने आय से अधिक संपत्ति मिलने और आर्म्स एक्ट मामले में सोलापुर के मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा दर्ज होने के बाद निलंबित कर दिया गया था. मुजावर का कहना है कि उनको उन पुलिस अधिकारियों की शिकायत करने के लिए पीड़ित किया जा रहा है, जिन्होंने कलसांगरा तथा डांगे को मार दिया.

दरअसल मुजावर ने 2009 में महारष्ट्र के तत्कालीन डीजीपी एसएस विर्क से इन हत्याओं की लिखित शिकायत की थी.

First published: 6 January 2017, 7:49 IST
 
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