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बंगाल: दूसरी पारी में बदले-बदले से हैं 'दीदी' के तेवर

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
(कैच)

बंगाल में 23 साल पहले 21 जुलाई को युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की पुलिस की गोली से मौत हो गई थी. ये सभी कार्यकर्ता ममता बनर्जी के नेतृत्व में राइटर्स बिल्डिंग के घेराव में शामिल थे. वो ऐसा दौर था जब बंगाल में लेफ्ट फ्रंट अविजित प्रतीत होता था.

उसके बाद ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के रूप में नई पार्टी का गठन किया. नई पार्टी के झंडे तले उन्होंने 2011 में सीपीएम गठबंधन को बंगाल की सत्ता से उखाड़ फेंका.

पार्टी बदलने के बाद भी ममता 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाना नहीं भूलतीं थीं. उनके सत्ता में आने के बाद इसे पहले से भी ज्यादा जोरशोर से मनाया जाने लगा. इस दिन टॉलीवुड (बंगाली फिल्म जगत) के स्टार, संगीतकार सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर गीत-संगीत के कार्यक्रम में शामिल होते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इस दिन विपक्षी दलों के नेता भी टीएमसी के साथ कदमताल करते नजर आते हैं.

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इस गुरुवार को हुआ कार्यक्रम भी पहले के कार्यक्रमों से अलग नहीं था. ममता दूसरी बार सत्ता में हैं. ममता के कार्यक्रम में लाखों की भीड़ इकट्ठी हुई थी. इस मौके पर मालदा के गजोल से सीपीएम के विधायक और बांकुरा के बिशनपुर के कांग्रेस विधायक टीएमसी में शामिल हुए. उनके अलावा 14 नगरनिगम पार्षद भी पार्टी में शामिल हुए. 

पार्षदों के इस दल-बदल से कांग्रेस के प्रभाव वाला उत्तरी दिनाजपुर टीएमसी के हाथ में चला गया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी का इस इलाके में काफी प्रभाव रहा है. उनकी पत्नी दीपा दासमुंशी ने यहां की विधानसभा सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार को इस बात का विशेष उल्लेख किया. 

हर साल इस दिन से पहले विपक्षी दलों के कुछ नेता उत्सव को 'अपसंस्कृति' बताते हैं लेकिन इस बार ऐसा कोई बायन नहीं आया. तो क्या इसकी पीछे कुछ महीने पहले टीएमसी को मिली भारी जीत है? नहीं, इसके पीछे है बंगाल की नई सरकार का प्रबंधन कौशल. ममता जिस तरह की राजनीति करती हैं, उसमें आलोचना को कोई जगह नहीं मिलती.

विधानसभा चुनाव के ममता की दो प्रमुख राजनीतिक चिंताएं थीं. एक, कांग्रेस और सीपीएम के बीच गठबंधन और दूसरा, राज्य में बीजेपी की बढ़ती हैसियत.

टीएमसी का दांव

ममता ने पहली चिंता को दूर करने के लिए कांग्रेस और सीपीएम गठबंधन की कमजोर नस दबा दी. उन्होंने पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमिटी के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ विधायक मानस भूमिया को पब्लिक एकाउंट कमिटी का चेयरमैन बना दिया.

कांग्रेस चाहती थी कि सीपीएम के विधायक सुजान चक्रवर्ती इस पद पर चुने जाएं. पार्टी को उम्मीद थी कि इससे कांग्रेस और सीपीएम गठबंधन मजबूत होगा. लेकिन भूमिया टीएमसी के बिछाए जाल में फंस गए.

राज्य के अखबारों में अधीर चौधरी और भूमिया के आपसी मोबाइल संदेश प्रमुखता से प्रकाशित हुए लेकिन इससे ये सच्चाई नहीं बदलती कि भूमिया ने ये पद स्वीकार कर लिया है. इंतजार बस इसका है कि भूमिया पहले पार्टी छोड़ेंगे या खुद कांग्रेस उन्हें निकालेगी?

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करीब तीन हफ्ते पहले ममता ने बांग्लादेश की सीमा से लगे 24 परगना जिला में एक बैठक की. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 'गायों की तस्करी बंद होनी चाहिए.' उन्होंने अधिकारियों को गायों की तस्करी से जुड़े मामलों को पूरी सावधानी बरतने के लिए कहा क्योंकि ये कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.

ध्यान देने की बात ये है कि ममता ने पहली बार गायों की तस्करी पर कोई सार्वजनिक बयान दिया है.

नई सरकार, नया तेवर

बंगाल में गायों की तस्करी के प्रमुख सूत्रधार माने जाने वाले समीर मजूमदार को कुछ दिनों पहले ही गिरफ्तार किया गया. मजूमदार पिछले 10 सालों से इस धंधे में हैं. माना जाता है कि मजूमदार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), पुलिस और कस्टम तीनों को साध रखा था. उनकी बहन टीएमसी से पंचायत प्रधान हैं, जिनकी शादी बीएसएफ के एक अधिकारी से हुई है.

ममता बनर्जी अपने दूसरे कार्यकाल में टीएमसी नेताओं के खिलाफ भी सख्ती अपना रही हैं

पिछले हफ्ते राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने आरोप लगाया कि उनकी हत्या की कोशिश की जा रही है. मलिक 24 परगना जिले के टीएमसी प्रभारी हैं. मलिक और पुलिस का आरोप है कि उनपर हमला करने वाले पशु तस्कर हैं. माना जा रहा है कि पशु तस्कर सरकार की कार्रवाई से बौखलाए हुए हैं.

ममता बनर्जी की पिछली सरकार में रियल एस्टेट सिंडिकेट, कानून-व्यवस्था की समस्याएं और राजनीतिज्ञों की कई विवादित मामलों में मिलीभगत के आरोपों से काफी किरकिरी हुई थी.

नई सरकार बनने के बाद टीएमसी के साल्टलेक के पार्षद को फिरौती वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा सिंडिकेट के गढ़ न्यूटाउन और राजरहाट से 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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पिछले इतवार को कानून-व्यवस्था से जुड़े एक राज्यव्यापी ऑपरेशन में 1023 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 7972 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया. पुलिस ने 150 ऐसे लोगों को भी निगरानी में लिया जिनके खिलाफ वारंट नहीं था. एडीजी कानून-व्यवस्था अनुज शर्मा के अनुसार पुलिस को छापेमारी में 85 असलहे, 781 बम और 201 गोलियां भी मिलीं.

बुधवार को टीएमसी के अन्य पार्षद को गिरफ्तार किया गया. उनपर 24 परगना जिले के कारोबारी बिश्वजीत रॉय को आत्महत्या के लिए बाध्य करने का आरोप है. रॉय को पार्षद ने कथित तौर पर हावड़ा के एक व्यक्ति, जिसका उनपर 60 हजार रुपया बाकी था को हर महीने पांच हजार रुपये देने के लिए कहा था, 

कथित तौर पर रॉय अपना अपमान नहीं सह सके और उन्होंने आत्महत्या कर ली. उनके शव के पास एक सुसाइड नोट भी बरामद हुुआ है. पुलिस ने संदिग्ध पार्षद को अगले दिन ही गिरफ्तार कर लिया.

ममता की पिछली सरकार में पुलिस इतनी मुस्तैद नहीं नजर आती थी. इससे जाहिर है कि पहले से मजबूत समर्थन से ममता को आत्मविश्वास बढा है और वो ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं.

अगर ममता ने अपना ये तेवर बरकरार रखा तो लम्बे समय तक बंगाल में उनकी सत्ता को चुनौती देना मुश्किल होगा.

First published: 23 July 2016, 2:13 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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