Home » इंडिया » mamata banerjee political career story
 

ममता बनर्जी ने दोबारा ली मुख्यमंत्री की शपथ, 46 साल का सियासी सफर

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 May 2016, 15:04 IST

ममता बनर्जी को जमीनी, स्वभाव से आक्रामक, सादगी से रहने वाली और विरोधियों के खिलाफ लगातार संघर्ष करने वाली नेता के तौर पर देखा जाता है. शुक्रवार को ममता लगातार दूसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनी हैं.

विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अकेले चुनाव लड़ा और 211 सीटों पर विजयी रही. ममता के अलावा उनकी पार्टी के 42 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है.

2011 में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल से वामपंथी मोर्चे के 34 साल पुराने शासन काल का खात्मा किया था. टीएमसी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और इस गठबंधन को 226 सीटें मिली थी. अकेले टीएमसी को 184 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

ममता का सियासी सफरनामा:

कांग्रेस (आई) के साथ छात्र राजनीति की शुरुआत

कलकत्ता में जन्मीं ममता ने महज 15 साल की उम्र में 1970 में कांग्रेस (आई) के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. 1976 से 1980 तक ममता राज्य महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं.

कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की नजर में ममता उस समय आईं, जब वह कलकत्ता विश्वविद्यालय से सन् 1977 में एमए कर रही थीं. आपातकाल के बाद जब इंदिरा गांधी को गिरफ्तार किया गया, तब ममता बनर्जी ने भी गिरफ्तारी दी थी. उसी दौरान तत्कालीन प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई का कलकत्ता (कोलकाता) आना हुआ.

कहा जाता है कि कड़ी सुरक्षा के बीच ममता ने पीएम के काफिले वाली कार पर काले झंडा लगा दिए. इसके अलावा समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के कार के आगे हंगामा करने के चलते वह सुर्खियों में आ गईं.

29 साल की उम्र में सांसद

कलकत्ता में सन् 1983 के एआईसीसी के अधिवेशन में उनका राजीव गांधी से परिचय हुआ. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के आम चुनावों में, ममता बनर्जी सबसे युवा लोकसभा सांसद चुनी गईं. चुनाव में उन्होंने दक्षिणी कोलकाता के जाधवपुर सीट से दिग्गज माकपा नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया था.

1984 के बाद ममता ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस की महासचिव बनीं. अगले चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 के संसदीय चुनावों में उन्हें जीत मिली.

नरसिम्हा राव की सरकार में केंद्रीय मंत्री बनीं

साल 1991 में दक्षिणी कोलकाता से लोकसभा के लिए चुनी गईं ममता को राव कैबिनेट में शामिल किया गया. वह नरसिम्हा राव सरकार में मानव संसाधन विकास, युवा मामलों और महिला एवं बाल विकास विभाग में राज्यमंत्री बनीं.

कांग्रेस से मतभेद, नई पार्टी का गठन

राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई के अनुसार प्रणब मुखर्जी से राजनीतिक मतभेद के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़कर 1997 में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. उस समय सीताराम केसरी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे. सोनिया गांधी उस समय सक्रिय राजनीति में नहीं थी और उनकी मध्यस्थता के बावजूद ममता ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया.

चार साल बाद राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी ने 226 सीटों पर चुनाव लड़ा था और टीएमसी 60 सीटों पर विजयी रही. इस चुनाव में कांग्रेस को केवल 26 सीटें मिली.

वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री

टीएमसी के गठन के एक साल बाद हुए 1998 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को सात सीटें मिली. ममता की पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी. 13 महीने की सरकार गिरने के बाद 1999 में दोबारा हुए लोकसभा चुनाव में टीएमसी को आठ सीटें मिली. वाजपेयी कैबिनेट में उन्हें रेल मंत्री बनाया गया.

सिंगूर और नंदीग्राम की लड़ाई में सबसे आगे

2006 के विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पडा़. उनकी पार्टी को केवल 30 सीटें मिली. इसके बाद ममता ने सिंगूर और नंदीग्राम में हुए आंदोलन का नेतृत्व किया. इस आंदोलन से उनकी पार्टी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ.

2009 के लोकसभा चुनाव में ममता की पार्टी ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत हासिल की. यूपीए दो में उन्होंने रेल मंत्री की कमान दोबारा संभालीं.

बंगाल में लेफ्ट शासन का अंत किया

2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लेफ्ट को हराकर सरकार बनाई.  ममता राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. इस बार टीएमसी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. हालांकि, कांग्रेस के साथ मतभेद के चलते 2012 में उन्होंने यूपीए से रिश्ता तोड़ लिया.

लोकसभा चुनाव 2014 में उनकी पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली थी. मोदी लहर के चलते जहां कई क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा था, वहीं टीएमसी बंगाल की 42 संसदीयों सीटों में 34 सीटें जीतने में कामयाब रही.

सियासी दिग्गजों का जमावड़ा

ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण समारोह में सियासी दिग्गजों का जमावड़ा जुटा. इस दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी समारोह में शामिल हुए.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा केंद्र सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली कोलकाता में आयोजित समारोह में पहुंचे. इसके अलावा आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने भी शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की.

वहीं केंद्रीय मंत्री पश्चिम बंगाल के आसनसोल से बीजेपी सांसद बाबुल सु्प्रियो भी ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए.

First published: 27 May 2016, 15:04 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी