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सर्जिकल स्ट्राइक पर ममता की चुप्पी मुस्लिम तुष्टीकरण तो नहीं?

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 5 October 2016, 7:49 IST
QUICK PILL
  •  उरी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई का कमोबेश सभी दलों ने स्वागत किया है लेकिन पश्चीम बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी ने इसपर चुप्पी साध रखी है.   राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि अगर ममता सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी करती हैं तो इससे उनकी मुस्लिमों के तुष्टिकरण को धक्का पहुंचेगा.

पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में अभी तक कोई बयान न देना बंगाल में सीपीएम और भाजपा में चर्चा का विषय बन गया है. भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ममता की चुप्पी से विपक्षी दलों की आंखें गड़ गईं हैं कि तृणमूल सुप्रीमो को इस स्ट्राइक को बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. सीपीएम नेताओं का दावा है कि ममता की भाजपा से साठगांठ स्पष्ट होती जी रही है कि उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में अभी तक कुछ नहीं कहा है.

भाजपा का कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर ममता की चुप्पी से यह साबित होता है कि वह भारत द्वारा की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक से खुश नहीं हैं, जबकि अन्य सभी दलों ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दे दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अन्य दलों ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी है लेकि भारत द्वारा कई गई इस स्ट्राइक पर तृणमूल की चुप्पी बरकरार है. देश यह जानना चाहता है कि वे किसका समर्थन कर रहीं हैं, भारत का या पाकिस्तान का.

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अमोल मुखर्जी कहते हैं कि ममता ने इस मामले में चुप रहकर राज्य में भाजपा के लिए बेचैनी भरा माहौल उत्पन्न कर दिया है. ऐसे में भाजपा चाहती है कि तृणमूल जल्द ही ऐसे समय एक बयान जारी करे, जबकि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अन्य सभी दलों ने अब तक प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दे डाली है.

मुआवज़े में भी कंजूसी

भाजपा के अनुसार उरी हमले के बाद सभी राज्यों ने सैनिकों के लिए क्षतिपूर्ति की राशि 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है. पर बंगाल सरकार ने सिर्फ दो लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की है, वह भी सिर्फ अपने राज्य के शहीदों के लिए। बंगाल के दो सैनिक शहीद हुए हैं. भाजपा के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जब अन्य राज्यों ने सैनिकों के लिए क्षतिपूर्ति राशि में इजाफा किया है, तब बंगाल ने क्षतिपूर्ति राशि देने में क्यों अंतर रखा है?

उधर, तृणमूल कांग्रेस के मंत्री कहते हैं कि अभी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में निष्कर्ष और परिणाम का देखा जाना बाकी है. बिना इसके निष्कर्ष आए किसी चीज पर कोई भी टिप्पणी करना सम्भव नहीं. टीएमसी के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी. हालात का आंकलन करने के बाद ही हमारी मुख्यमंत्री कोई टिप्पणी करेंगी.

मुस्लिम तुष्टीकरण तो नहीं?

राज्य सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार यदि ममता सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी करती हैं तो इससे उनकी मुस्लिमों के तुष्टिकरण को धक्का पहुंचेगा. ऐसे में वह सर्जिकल स्ट्राइक पर अपना बयान देने के लिए सही समय का इंतजार कर रही हैं. ज्यादा अधिक तो यह कि ममता बनर्जी पहले से ही राज्य के लिए फंड में कटौती करने से केन्द्र सरकार से खफा हैं. अभी यह देखा जाना बाकी है कि राज्य के लिए फंड देने मामले में केन्द्र कितना मोल तोल करता है और राज्य कहां तक सफल हो पाता है.

सीपीएम नेता सुजान चक्रवर्ती कहते हैं कि ममता की चुप्पी से एक बार तो यह सामने आ ही गया है कि तृणमूल का भाजपा के साथ गोपनीय गठजोड़ है. भाजपा चाहती है कि टीएमसी भारत द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में अपना बयान जारी करे.

राजनीतिक विश्लेषक क्या महसूस करते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार ममता किसी भी तरह के साम्प्रदायिक तनाव की आग को सुलगाना नहीं चाहतीं. वह भाजपा पर हमेशा आरोप लगाती रही हैं,साम्प्रदायिक तनाव में दखलंदाजी करने मामले में भी. इसलिए वह स्ट्राइक के बारे में कमेन्ट करने के लिए सही समय का इंतज़ार कर रही हैं

First published: 5 October 2016, 7:49 IST
 
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