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मध्यप्रदेश में साजिशों का बीफ

शैलेंद्र तिवारी | Updated on: 30 July 2016, 13:19 IST

मंदसौर और रतलाम में पहली दफा मांस नही मिला है. यहां अवैध मांस की आवाजाही एक सामान्य घटना है. यहां सैलाना से हर रोज करीब चार से पांच क्विंटल मांस रोजाना अवैध तरीके से भेजा जाता है. आए दिन अवैध मांस के साथ लोग पकड़े जाते हैं. इनके ऊपर मामले दर्ज कर जेल भेजकर और जुर्माना लगाकर छोड़ा जाता रहा है. लेकिन पहली दफा ऐसा हुआ है कि इस मांस में बीफ का रंग तलाशने की कोशिश की गई है.

रतलाम और मंदसौर का मांस मध्यप्रदेश की विधानसभा से लेकर देश की राज्यसभा तक गूंज गया. वजह कुछ भी हो, लेकिन इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह प्रदेश में माहौल खराब करने की जानबूझ कर की गई कोशिश है.

दरअसल, मध्यप्रदेश का रतलाम-मंदसौर इलाका सांप्रदायिक नजरिए से बेहद संवेदनशील इलाकों में आता है. पिछले दिनों प्रदेश सरकार की ओर से कलेक्टर और एसपी को जारी अलर्ट में इन जिलों को भी शामिल किया गया था. इन जिलों को साफ कहा गया था कि यहां पर सांप्रदायिक घटनाएं या तनाव पैदा हो सकता है. ऐसे में प्रशासनिक मशीनरी सतर्क रहे. इसी दौरान अचानक से मांस को बीफ का रंग देना किसी साजिश के तौर पर देखा जा रहा है.

हालांकि मध्यप्रदेश के कई और भी इलाके सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में जनवरी से दिसंबर के बीच करीब 41 सांप्रदायिक दंगे और तनाव की घटनाएं हुई हैं. इनमें 167 लोग घायल हुए. सरकार ने छह महीने पहले ही करीब 12 जिलों को अलर्ट जारी कर माहौल ठीक करने के निर्देश दिए थे. इस अलर्ट में मंदसौर और रतलाम को भी शामिल किया गया था. अलर्ट में साफ था कि इन जिलों में जानबूझकर सा्ंप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश की जा सकती है.

दरअसल, 26 जुलाई को रतलाम से चित्तौड़ जाने वाली ट्रेन रात करीब साढ़े दस बजे मंदसौर रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी. ट्रेन में सलमा मेवाती निवासी खानपुरा और शमीम हुसैन निवासी खानपुरा मांस के साथ उतरी. हिंदू संगठन से जुड़े लोग पहले से सूचना के आधार पर वहां मौजूद थे. इन कार्यकर्ताओं ने महिलाओं को घेरकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया.

नारेबाजी के साथ ही महिलाओं के साथ मारपीट शुरू हो गई. दोनों महिलाएं मांस के बीफ होने की बात से इंकार किया. हंगामे के चलते पुलिस पहुंची. दोनों से तीस किलो मांस जब्त किया गया. थाना प्रभारी एमपी सिंह परिहार ने बताया पशु मांस ले जाने के मामले में गिरफ्तारी के बाद महिलाओं को न्यायालय ने जेल भेजा है.

सलमा पर पहले से पशु मांस के अवैध तस्करी के चार प्रकरण और शमीम हुसैन पर तीन प्रकरण दर्ज हैं वहीं रतलाम में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को बीफ होने की जानकारी मिली तो उन्होंने ढोढर पुलिस को इसकी जानकारी दी. जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं के पास से 20-20 किलो मांस बरामद किया.

शुरुआती जांच में मंदसौर से मिले मांस को भैंस का मांस बताया गया. जबकि रतलाम से बरामद मांस पर भी संदेह है. इसे जांच के लिए मथुरा भेज दिया गया है.

मंदसौर से भाजपा विधायक यशपाल सिसोदिया कहते हैं, 'यहां पर मांस की बड़े पैमाने पर तस्करी होती है. पहले भी कई बार मांस ले जाते हुए इन लोगों को पकड़ा गया है. जो महिला उस दिन पकड़ी गई, उस पर पहले भी तीन मामले दर्ज है ́. अवैध परिवहन पर कार्रवाई होनी चाहिए, उसमें क्या गलत है?

हालांकि यशपाल महिलाओं से मारपीट को गलत करार देते हैं. वह कहते हैं, 'महिलाओं से मारपीट गलत है. एक बात पूरी तरह से साफ है कि यह जानबूझकर की गई एक साजिश है. दुपट्टा डाल लेने से कोई विहिप या बजरंग दल का नही ́ हो जाता है. न ही जय श्री राम के नारे लगा देने से किसी को इन संगठनों का सदस्य माना जा सकता है. पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा है. इनमें एक भी आदमी इन संगठनों का सदस्य नही ́ है. ऐसे में इससे कैसे इनकार किया जा सकता है कि यह गहरी साजिश नहीं है?'

कांग्रेस विधायक आरिफ अकील का कहना है कि यह सबकुछ जानबूझकर किया जा रहा है. मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने की साजिश के तहत. ऐसे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि यशपाल सिंह दोहराते हैं कि मुस्लिम महिलाएं जावरा से अवैध मांस लेकर आती है और मंदसौर में बेचती है. इसे सांप्रदायिकता से नहीं जोड़ना चाहिए. वह कहते है ́ कि यह इलाका सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील है. 2007-08 में यहां पर गायों को सामूहिक तौर पर काटने की घटना सामने आ चुकी है. यह माहौल बिगाड़ने की कोशिश है. इसे राजनीतिक रंग देने से कोई फायदा नहीं है.

First published: 30 July 2016, 13:19 IST
 
शैलेंद्र तिवारी @catchhindi

लेखक पत्रिका मध्यप्रदेश के स्टेट ब्यूरो चीफ हैं.

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