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जानवरों की हत्या पर मेनका और जावड़ेकर की जंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2016, 13:36 IST
(एजेंसी)

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने जानवरों को आधिकारिक रूप से मारने के आदेश जारी करने के लिए केंद्र की अपनी ही सरकार पर हमला बोला है.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बिहार सरकार के उस पत्र को मंजूरी दी, जिसमें नील गायों को मारने की इजाजत मांगी गई थी.  

बिहार सरकार ने नीलगायों की वजह से प्रदेश में फसलों को हो रही भारी क्षति का हवाला देते हुए पर्यावरण मंत्रालय से उन्हें मारने की छूट मांगी थी. जिसे मंत्री जावड़ेकर द्वारा मंजूरी देने के बाद बिहार सरकार ने तकरीबन 250 नील गायों को मार दिया था.

नाराज मेनका गांधी ने इस फैसले के लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर आलोचना की है. 

मेनका गांधी ने कहा कि बिहार में फसलों की बर्बादी के नाम पर जिस तरह से नील गायों की हत्या की गई है, उसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी जिम्मेदार हैं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेजुबान नील गायों की हत्या कराना, बेहद दुखद और शर्मनाक है.

मेनका गांधी ने अपने बयान में कहा, "हमारी सरकार में पर्यावरण मंत्रालय पहली बार इतना सक्रिय हुआ है. मंत्रालय के द्वारा इस संबंध में सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी जा रही है कि वह मंत्रालय को सूचित करें कि अपने प्रदेशों में वह कौन-कौन से जानवरों को मारना चाहते हैं."

जानवरों को मारने की चिट्ठी

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मेनका गांधी ने कहा कि मंत्रालय के लिए सुझावी पत्र में पर्यावरण मंत्री ने कहा है कि बंगाल में हाथियों को, गोवा में मोर को, हिमाचल प्रदेश में बंदरों को और राजस्थान में नील गायों को मारा जाए. लेकिन मंत्री महोदय के इस प्रस्ताव पर वहां की हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है.

मेनका गांधी ने कहा, "हमें सूचना के अधिकार के जरिए यह पता चला है कि किसी भी राज्य ने केंद्र सरकार से खुद जानवरों को मारने की मंजूरी नहीं मांगी है, बल्कि ज्यादातर राज्यों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है. वहीं हमारे पर्यावरण मंत्री इस मामले मे खुद सक्रिय होकर जानवरों को मारना चाहते हैं."

पुराने कानून का हवाला

वहीं मेनका गांधी के आरोपों पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मंत्रालय की ओर से जो भी आदेश जारी किया गया है, वो कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया है. इसमें कुछ भी अवैधानिक नहीं है.

जावड़ेकर ने कहा, "जब राज्य सरकारें जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के बारे में लिखती हैं, तो ऐसी इजाजत दी जाती है. राज्य सरकारों की सिफारिश पर ऐसा आदेश दिया जाता है. ये एक पुराना कानून है."

First published: 9 June 2016, 13:36 IST
 
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