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मणिपुर मुठभेड़: दो 'फ्राइडे' जिन्होंने बदल दी रेनू की ज़िंदगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 July 2017, 17:09 IST
फाइल फोटो

रेनू को अच्छी तरह याद है, उस दिन गुड फ्राइडे था और घर के पास उनके पति की लाश मिली थी. एक कथित फर्जी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने उन्हें गोली मार दी थी. मुठभेड़ मणिपुर की राजधानी इंफाल के एयरपोर्ट सड़क पर कोकईथान इलाके में हुई थी. तारीख थी 6 अप्रैल 2007. इस वारदात के 10 साल बाद रेनू सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुईं. रेनू उन सैकड़ों औरतों में से हैं, जिनके पति या परिवार के अन्य सदस्य कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए.

तारीख़ 14 जुलाई 2017. दिन फ्राइडे यानी शुक्रवार. एक ऐसा दिन जब रेनू के पति की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत के 10 साल तीन महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने अपने फैसले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मणिपुर में सुरक्षा बलों द्वारा 62 कथित फर्जी मुठभेड़ के मामलों की जांच का आदेश दिया है. सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस पर इन मुठभेड़ों को फर्जी तरीके से अंजाम देने का आरोप है. 

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जनवरी 2018 तक CBI सौंपेगी रिपोर्ट

सीबीआई इस मामले में जनवरी 2018 में रिपोर्ट दाखिल करेगी. न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सीबीआई के निदेशक से मामले की जांच के लिए दो हफ्ते के भीतर टीम गठित करने को कहा है. एक्स्ट्राजूडिशियल एक्जीक्यूशन विक्टिम्स फैमिलीज एसोसिएशन मणिपुर के मुताबिक मई 1971 से मई 2015 के दौरान मणिपुर में फर्जी मुठभेड़ में 1528 लोग मारे गए.

रेनू पर लौटते हैं, जो एक्स्ट्राजूडिशियल एक्जीक्यूशन विक्टिम्स फेमिलीज एसोसिएशन मणिपुर की अध्यक्ष हैं. उनके संगठन की रिपोर्ट के आधार पर 2012 के आखिर में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई. 

'तो प्रजातंत्र खतरे में'

पिछले साल जुलाई में अदालत ने कहा, "यदि हमारी सेना के लोगों की तैनाती या नियुक्ति हमारे देश के नागरिकों को केवल इस आरोप या शक पर कि वे ‘शत्रु’ हैं, मारने के लिए की गई है, तब तो ना केवल कानून का शासन, बल्कि हमारा प्रजातंत्र भी गहरे खतरे में है."

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ऐसी ही एक पीड़ित नीना का कहना है, "बूढ़ी माएं न्याय का इंतज़ार कर रही हैं. मुझे विश्वास है कि कोर्ट हमसे बिछड़े लोगों के लिए ज़रूर कुछ करेगी."

इरोम शर्मिला ने मणिपुर से अफ्सपा हटाने के लिए 16 साल तक सबसे लंबा अनशन किया.

सुरक्षाबलों को झटका

सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला सेना के लिए झटका माना जा रहा है. सेना की तरफ से अदालत में दलील दी गई थी कि इस मामले में और जांच की जरूरत नहीं है. सेना के मुताबिक 62 में से 30 मामलों में जांच हो चुकी है.

मणिपुर में अफ्सपा यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम 1958 लागू है. इस कानून के जरिए सुरक्षा बल बिना वारंट किसी के घर की तलाशी ले सकते हैं. आरोप है कि इसी कानून की आड़ लेकर फर्जी मुठभेड़ में नागरिकों की हत्याएं की गई हैं. 

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अफ्सपा को हटाने के लिए इरोम शर्मिला 16 साल लंबा अनशन कर चुकी हैं, जो पिछले साल 9 अगस्त को टूटा था. हालांकि मणिपुर के आम चुनाव में नई पार्टी बनाकर लड़ने वाली इरोम को जनता ने नकार दिया और मुख्यमंत्री ओ इबोबी सिंह के खिलाफ उनकी जमानत जब्त हो गई. पूर्वोत्तर के राज्यों के अलावा जम्मू-कश्मीर में भी अफ्सपा कानून लागू है.

First published: 14 July 2017, 15:39 IST
 
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