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16 साल तक सत्ता को हिलाने वाली मणिपुर की 'आयरन लेडी' सीएम बनना चाहती हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 August 2016, 16:45 IST
(एएनआई)

मणिपुर में आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने अपना अनशन तोड़ दिया है. सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्स्पा) हटाने की मांग लेकर वे पिछले 16 साल से अनशन कर रही थीं.

इरोम ने इस दौरान जमानत बॉन्ड भी भर दिया. उनके वकील का कहना है इम्फाल के कोर्ट ने इरोम शर्मिला को 10 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा कर दिया है.

शहद के साथ तोड़ा अनशन

इरोम ने शहद के साथ अपने 16 साल पुराने अनशन को तोड़ दिया. वहीं इस दौरान इरोम काफी भावुक हो गईं. मीडिया से बातचीत करने से पहले उनकी आंखों में आंसू आ गए.

इराेम इससे पहले ही एलान कर चुकी हैं कि वे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगी. नवंबर 2000 में सुरक्षा बलों के हाथों 10 नागरिकों की मौत के बाद आफ्स्पा हटाने की मांग करते हुए इरोम ने भूख हड़ताल शुरू की थी.

'शक्ति चाहिए, राजनीति बहुत गंदी'

भूख हड़ताल पर बैठने के तीन दिन बाद ही उन्हें मणिपुर सरकार ने खुदकुशी की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. अनशन तोड़ने के बाद इरोम ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री बनना चाहती हूं. 2017 के विधानसभा चुनाव में मैं लड़ूंगी. दमनकारी कानून को बदलने के लिए ताकत की जरूरत है."

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इरोम शर्मिला ने कहा, "यह देश बेहद खूबसूरत है. यहां पर समानता का जिक्र होता है.  मैंने अपना संघर्ष खत्म नहीं किया है. मैं अहिंसा का रास्ता अपनाऊंगी. मुझे शक्ति चाहिए. यहां की राजनीति बहुत गंदी है."

इरोम शर्मिला ने इस दौरान कहा, "मैं अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हूं. मेरी ताकत लोगों की समस्या दूर करेगी."

23 अगस्त को इंफाल वेस्ट सीजेएम कोर्ट में इरोम शर्मिला एक बार फिर पेश होंगी. (ट्विटर)
इंफाल वेस्ट सीजेएम कोर्ट से जारी 9 अगस्त 2016 के आदेश की कॉपी (ट्विटर)

इरोम शर्मिला के वकील का कहना है कि आज दो चश्मदीदों की अदालत में गवाही हुई. 23 अगस्त को एक बार फिर उनकी कोर्ट में पेशी होगी.

पढ़ें: 16 साल के तप का अंत, जानिए इरोम शर्मिला से जुड़ी कुछ खास बातें

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर सुबह से ही इरोम शर्मिला ट्रेंड कर रहा है. उनके संघर्ष पर लोग अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं. सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर लगाई है. रेत की बनी शर्मिला की कलाकृति के साथ लिखा है हम आपके फैसले को सलाम करते हैं.

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने अपने अंदाज में इरोम शर्मिला को सलाम किया. (ट्विटर)

ट्विटर पर दीपक कुमार ने लिखा, "करीब 16 साल के बाद दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल का अंत हो गया है."

ट्विटर पर लगातार लोगों की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. जॉन वीजेएस ने ट्वीट किया, "अगर एक राजनेता अनशन करता है, तो उसे राजनीतिक फायदा मिलता है. अगर एक आम महिला किसी ध्येय के साथ अनशन करती है, तो उसे जेल में डाल दिया जाता है."

चित्रा आहंथेम ने ट्वीट किया, "सीएम बनना चाहती हूं यह टिप्पणी संदर्भ से अलग है. उन्होंने कहा है कि मैंने बदलाव लाने के लिए राजनीति में शामिल होने का फैसला लिया है. जब मैं मुख्यमंत्री बनूंगी, तो आफ्स्पा को रद्द कर दूंगी."

नीलिमा ने ट्वीट किया, "केंद्र और मणिपुर की सरकारों ने सोचा था कि वे लगातार इरोम को अनदेखा करके आगे बढ़ते रहेंगे. अब वह कुर्सी के लिए आ रही हैं. सावधान."

इरोम शर्मिला का संघर्ष

इरोम शर्मिला का जन्म मणिपुर की राजधानी इंफाल में 14 मार्च, 1972 के दिन हुआ था. उनके घर का नाम 'चानू' है.

नवंबर 2010 में इंफाल एयरपोर्ट के पास मलोम इलाके में असम राइफल्स के जवानों ने कथित मुठभेड़ में 10 नागरिकों की हत्या कर दी थी. इसके बाद विवादित आफ्सपा कानून को हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला अनशन पर बैठ गईं.

अनशन के तीन दिन बाद उन्हें आईपीसी की धारा 309 के तहत खुदकुशी की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद उन्हें नाक के रास्ते एक ट्यूब की मदद से भोजन दिया जाता रहा है. 

पढ़ें: आयरन लेडी: 16 साल बाद ऐतिहासिक अनशन का अंत

जब इरोम ने अनशन शुरू किया था, उस वक्त उनकी उम्र 28 साल थी. शर्मिला ने अपनी उम्र के आधे से ज्यादा साल आफ्सपा के खिलाफ संघर्ष में गुजारे हैं. 

'मैं खाना चाहती हूं'

शर्मिला ने एक बार कहा था, "मैं खाना चाहती हूं. मेरी मदद कीजिए. मेरे संघर्ष में साथ दीजिए. आइए हम आफ्सपा की समस्या का एक हल निकालें, जिससे हम साथ-साथ रह सकें, खा सकें, सो सकें और पानी पी सकें."

इंफाल के जवाहर लाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के स्पेशल वार्ड का कमरा नंबर एक ही शर्मिला का अस्थाई घर रहा है. 2014 में शर्मिला ने कहा था, "मैं एक शहीद नहीं हूं. मैं एक आम इंसान हूं. मैं भी खाना चाहती हूं."  

पढ़ें: इरोम शर्मिला: 15 साल के बाद रिहा हुईं और फिर गिरफ्तार हुईं

इरोम पर आरोप है कि 2006 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन्होंने खुदकुशी करने की कोशिश की थी, जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 309 के अनुसार एक अपराध है. इस आरोप के चलते वह पिछले दस सालों से न्यायिक हिरासत में रही हैं.

इरोम की देखभाल करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि लगातार 16 साल तक खाना न खाने की वजह से उनकी हड्डियां बहुत कमजोर हो गई हैं और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही हैं.

First published: 9 August 2016, 16:45 IST
 
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