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मनोहर पर्रिकर: अलगाववादियों से पहले ही वापस ले लेनी चाहिए थी सारी सुविधाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 September 2016, 12:58 IST
(एजेंसी)

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने गुजरात के वड़ोदरा में कहा कि कश्मीरी अलगाववादियों को दी जा रही सभी सुविधाओं को काफी पहले ही खत्म कर दिया जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा, ‘‘अलगाववादियों को इस तरह की सुविधाएं देने को लेकर चिंता है. मैं इस तरह की सुविधाएं वापस लेने का पक्षधर हूं.’’

रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मोदी सरकार ने अलगाववादियों के प्रति अपना रुख कड़ा कर लिया है. हाल में जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का अलगाववादियों के द्वारा नजरअंदाज किये जाने की घटना के बाद केंद्र ने यह रुख अपनाया है.

अलगाववादियों द्वारा सांसदों के प्रति उदासीनता से क्षुब्ध सरकार उनके पासपोर्ट वापस लेकर विदेशों की यात्रा खत्म करने और कुछ मामलों में यात्रा दस्तावेज जारी नहीं करने पर विचार कर रही है. इसके अलावा उनकी सुरक्षा भी कम करने पर विचार हो रहा है.

पर्रिकर ने कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती को भी उचित ठहराते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सीमा पार से आतंकवादियों के भारत में प्रवेश को नाकाम करना है और इसका घाटी में जारी अशांति से कोई लेना- देना नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘सेना अंदरूनी मामलों में तब तक कार्रवाई नहीं करती जब तक स्थानीय प्रशासन आग्रह नहीं करता. हमारा मकसद सीमा को सील करना है और आतंकवादियों के प्रयास को नाकाम करना है. आज तीन आतंकवादियों को भारत में घुसने का प्रयास करते समय मार गिराया गया.’’

सेना ने कश्मीर के नौगाम, तंगधार और गुरेज सेक्टर में सीमा रेखा के पास घुसपैठ के तीन अलग-अलग प्रयासों को नाकाम कर दिया है.

पर्रिकर ने कहा कि लोगों का प्रदर्शन सेना के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और ‘‘सेना की अतिरिक्त तैनाती का कश्मीर में नागरिक अशांति से कोई लेना-देना नहीं है.’’

अलगाववादियों सहित सभी संबंधित पक्षों से वार्ता करना और कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति बनाने के मुद्दे पर मंत्री ने कहा, ‘‘इन मुद्दों पर गृह मंत्रालय निर्णय करता है.’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार घाटी में हिंसा से ठीक तरीके से निपट रही है. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘यह सब सीमा पार से संचालित हो रहा है. राज्य में थोड़े लोग अधिकतर लोगों को बंधक बनाए हुए हैं.’’

First published: 12 September 2016, 12:58 IST
 
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