Home » इंडिया » Manohar Parrikar: played a key role in making Modi PM candidate
 

पर्रिकर ही थे जिन्होंने उस बैठक में मोदी को PM उम्मीदवार बनाने में निभाई थी अहम भूमिका

सुनील रावत | Updated on: 17 March 2019, 22:08 IST

साल 2014 में IIT बॉम्बे के एनुअल-डे कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो क्लिप में गोवा के चार बार के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को एक असली आम आदमी के रूप में दिखाया गया था. अक्सर हाफ बाजू वाले कुर्ते और चप्पलों पहले दिखाई देने वाले पर्रिकर ने सीएम बनने के बाद भी अपनी पहचान एक आम आदमी से बदलने नहीं दी. स्कूटर चलाते या तीन-पहिया वाहन से एयरपोर्ट जाने के दौरान की उनकी कई तस्वीरें आपने देखी होगी.

शायद कम ही लोग जानते होंगे कि पर्रिकर ने भाजपा की 2013 की गोवा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पर्दे के पीछे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 के चुनावों में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषणा हुई. इस दौरान अनुभवी नेता एल के आडवाणी अपेक्षित घोषणा को लेकर बैठक से दूर रहे. खुद पीएम मोदी मोदी ने अपनी सफलता के लिए कई बार गोवा की भूमिका को स्वीकार किया और गोवा में रहते हुए पर्रिकर की प्रशंसा की.

गोवा में भाजपा के उदय के साथ ही पर्रिकर का राजनीतिक गतिरोध समानांतर चलता रहा. उनका जन्म 1955 में गोवा के मापुसा में हुआ था. 1970 के दशक में पर्रिकर आरएसएस में शामिल हो गए. IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने आरएसएस के साथ काम करना फिर से शुरू किया. सिर्फ 26 साल की उम्र में वे मापुसा के संघचालक थे. यह आरएसएस था जिसने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी का मुकाबला करने के लिए पर्रिकर को भाजपा में शामिल किया था.

 

गोवा में आरएसएस और भाजपा को जमीनी स्तर पर किया खड़ा 

 1994 में पहली बार भाजपा ने चार विधायकों को गोवा विधानसभा भेजा. पर्रिकर वर्तमान केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाइक के साथ उनमें से एक थे. लेकिन इस दौड़ में पर्रिकर ने जल्द ही श्री नाइक को बाहर कर दिया, जो 1990 से 1999 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और 2000 में गोवा के पहले भाजपा सीएम बने. श्री नाइक ने राज्य के पहले भाजपा सांसद बनने के लिए राज्य की राजनीति छोड़ दी. एक इंटरव्यू में नाइक ने बताया कि पर्रिकर के साथ हमने आरएसएस और भाजपा को जमीनी स्तर पर खड़ा किया. हमने बूथ स्तर से इसका कैडर बनाया.

 

पर्रिकर को जब केंद्र में रक्षा मंत्री गया तब भी उन्होंने राज्य से दूरी नहीं बनाई. 2014 में रक्षा मंत्री के रूप में भी, वह अक्सर राज्य में समय गुजारते थे, हर सप्ताह में गोवा आते थे. उनकी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक बीजेपी के गोवा मॉडल को विकसित करना था. पर्रिकर ने दक्षिणपंथी पार्टी को संकीर्ण हिंदुत्व की पहचान से गोवा में बाहर निकाला. यहां तक कि उन्होंने कैथोलिक चर्च को राज्य में भाजपा का सहयोगी बना दिया. नाईक ने श्री पर्रिकर को एक मेहनती और आक्रामक मुख्यमंत्री के रूप में वर्णित किया.

पर्रिकर ने फिर से गोवा का सीएम बनने के लिए रक्षा मंत्री के पद छोड़ दिया. पर्रिकर के बिना गोआ में बीजेपी मुश्किल में आ गई. पार्टी 21 सीटों से वे 12 सीटों पर आ गई. पार्रिकर को 2016 की सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक को करने का भी गौरव प्राप्त है. लेफ्टिनेंट जनरल डी. एस. हुड्डा, जो स्ट्राइक के समय उत्तरी सेना के कमांडर थे, कहते हैं “मैंने उन्हें समस्याओं को समझने में बहुत कुशल पाया. अक्सर वह हमसे अनुरोध करते थे कि उन्हें सैनिकों से सीधे बात करने दें, उनकी जरूरतों और आवश्यकताओं पर चर्चा करने के लिए उनके साथ एक कप चाय है.

First published: 17 March 2019, 22:03 IST
 
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