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रक्षा मंत्री ने लापता एएन-32 विमान के साथ अनहोनी के दिए संकेत

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 July 2016, 16:12 IST
(पीटीआई)

बंगाल की खाड़ी में लापता हुए भारतीय वायुसेना के विमान एएन-32 का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. इस बीच रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अनहोनी के संकेत दिए हैं.

लापता विमान की तलाश में सर्च ऑपरेशन पांचवें दिन भी जारी है. इसके दायरे को 300 नॉटिकल मील से बढ़ाकर 360 नॉटिकल मील कर दिया है. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को कहा कि अभी तक मिले सभी सबूत किसी अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं.

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा, "कई संसाधन लगाए गए हैं. अभी तक मिले सभी सबूत अनहोनी की ओर इशारा कर रहे हैं. हम किसी क्षेत्र से आई आवाज या कुछ कड़ियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हम वह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिसका पता लगाया जाना आवश्यक है, लेकिन कुछ सबूत गुमराह करने वाले हैं."

पढ़ें: भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान लापता, 29 लोग थे सवार

नहीं मिला ट्रांसमीटर का सिग्नल

रक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान के हिम श्रेणी के अत्याधुनिक पोत सागर निधि को मॉरिशस से बुलाया गया है. वायुसेना के विमान एएन-32 में जो बीकन लगा था, उसकी बैटरी क्षमता कम से कम 48 घंटे की है.

बताया जाता है कि सर्च ऑपरेशन में जुटी टीम को ट्रांसमीटर से कोई सिग्नल नहीं मिला है. इमरजेंसी लोकेशन बीकन एक ऐसा उपकरण है, जो विमान के क्रैश होने या इमरजेंसी लैंडिंग की स्थि‍ति में एक खास फ्रीक्वेंसी पर तत्काल सिग्नल भेजता है.

पढ़ें: एयर फोर्स के लापता विमान एएन-32 की खोज जारी, रक्षा मंत्री भी तांबरम पहुंचे

रक्षा मंत्री का कहना है, "मॉरिशस से पोत पहुंच जाएगा, लेकिन गहरे पानी में काम करने वाले पोत को भी काम करने के लिए एक निश्चित क्षेत्र की आवश्यकता होती है. क्योंकि पानी के भीतर गहराई में जा सकने वाले पोत दरअसल तब तक तलाश नहीं कर सकते, जब तक आपके पास कोई निश्चित छोटा क्षेत्र नहीं हो."

रक्षा मंत्री का कहना है, "पिछली बार (डोर्नियर दुर्घटना) पनडुब्बी ने स्थल की पहचान की थी और इसके बाद हमने इसे भेजा था. यह पहले पहचान होने के बाद द्वितीय चरण का अभियान है."

17 जहाज, 23 विमान, एक पनडुब्बी

शुक्रवार को चेन्नई के तांबरम से पोर्ट ब्लेयर के लिए उड़ान भरने वाले इस विमान में 29 लोग सवार थे. बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे खोज और बचाव अभियान के बाद भी मलबे या जीवित बचे लोगों का कुछ पता नहीं चल सका है.

विमान की खोज में 17 जहाज, एक पनडुब्‍बी और 23 विमान समुद्र की सतह पर लापता विमान के मलबे का पता लगाने में नाकाम रहे हैं. इसलिए अब यह पूरा अभियान विमान में लगे इमरजेंसी लोकेटेर ट्रांसमीटर (ईएलटी) से मिलने वाले किसी सिग्‍नल पर निर्भर है.

ईएलटी के क्षतिग्रस्त होने की आशंका

चेन्‍नई के तांबरम से पोर्ट ब्‍लेयर जाते वक्त उड़ान के शुरुआती घंटों में ही इमरजेंसी सिग्‍नल दिए बिना विमान अचानक लापता हो गया था.

रूस के बने एएन-32 विमान में लगे इमरजेंसी लोकेटेर ट्रांसमीटर (ईएलटी) कुछ इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि जैसे ही एक निश्चित बल के साथ यह पानी से टकराए, उसी क्षण से सिग्‍नल भेजना शुरू कर देते हैं. ईएलटी की बैटरी लाइफ करीब एक महीने की होती है.

सर्च ऑपरेशन में जुटे अफसरों के मुताबिक इलाके में समुद्र की गहराई करीब 3.5 किलोमीटर तक है, जहां जबरदस्‍त समुद्री दबाव होगा.

इसका मतलब है एक छोटे बक्‍से के आकार के ईएलटी के टूट जाने का खतरा है. मुख्‍य रूप से अगर यह विमान के क्रैश होने के समय ही क्षतिग्रस्‍त हो गया हो, तो ईएलटी से मिलने वाले सिग्‍नल पर असर पड़ता है. ऐसे में एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि ईएलटी विमान के मलबे के नीचे दब गया हो.

First published: 26 July 2016, 16:12 IST
 
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