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रेल राज्‍यमंत्री: ट्रेन में दिया जाने वाला कंबल दो महीने में एक बार धुलता है

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 February 2016, 8:39 IST

रेल राज्‍यमंत्री मनोज सिन्‍हा ने शुक्रवार को राज्‍यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गये एक सवाल के जवाब में बताया कि भारतीय ट्रेनों में सफर करने वाले एसी-प्रथम और द्वितीय श्रेणी के यात्रियों को दिया जाने वाला कंबल दो महीने में एक बार धुला जाता है.

सिन्हा ने कहा कि बेडशीट, बेडरोल और तकिये का कवर तो रोज धुलता है, लेकिन यात्रियों को सफर के दौरान ओढ़ने के लिए दिये जाने वाले कंबल की सफाई दो महीने में एक बार होती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राज्‍यसभा के कई सदस्‍यों ने रेल बजट पेश होने के दौरान ट्रेनों में दिए जाने वाले कंबल और बेड रोल की गंदगी का सवाल प्रमुखता से उठाया था. सिन्‍हा ने उनके सवालों के जवाब में भारतीय रेल की इस मामले में स्थिति साफ की.

सिन्हा के जवाब पर राज्‍यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि 'ऐसे में तो यात्रियों के सफर के दौरान खुद तकिया-चादर लेकर चलने की पुरानी व्‍यवस्‍था ही बेहतर थी.'

सभापति के रेल राज्यमंत्री पर कटाक्ष का कांग्रेस के एक सांसद ने भी समर्थन किया और पूछा कि क्‍या रेलवे में इस तरह की व्‍यवस्‍था की जा सकती है.

इस बात पर मनोज सिन्हा ने कहा कि विपक्षी मित्र द्वारा दिया गया यह अच्‍छा सुझाव है. अगर यात्री सफर के दौरान अपना तकिया-चादर लेकर चलते हैं तो रेलवे को इसमें कोई दिक्‍क्‍त नहीं है.

रेल राज्‍यमंत्री ने जवाब को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारतीय रेलवे के पास वर्तमान में 41 लाउंड्रीज हैं. अगले दो सालों में 25 नई लाउंड्रीज बनाने की योजना है. इसके बाद ही भारतीय रेलवे तकिये-चादर इस्‍तेमाल करने वाले 85 प्रतिशत यात्रियों को लाउंड्री सर्विस दे सकेगी.

First published: 27 February 2016, 8:39 IST
 
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