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DU के प्रोफेसर साईबाबा को उम्रक़ैद, माओवादियों से संबंध के आरोप में दोषी करार

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 March 2017, 9:20 IST
(एएनआई)

माओवादियों सं संबंधों के आरोप में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीएन साईबाबा समेत पांच अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की अदालत ने डीयू प्रोफेसर समेत पांच अभियुक्तों के खिलाफ आरोपों को सही पाया है.  

गढ़चिरौली की अदालत ने प्रोफेसर साईबाबा के अलावा दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र हेम मिश्रा और पत्रकार प्रशांत राही समेत पांच लोगों को UAPA एक्ट (अवैध गतिविधि रोकथाम कानून) के तहत दोषी पाया था. 

महाराष्ट्र की गढ़चिरौली अदालत का फैसला

इस मामले में आरोपी विजय टिरके को दस साल जेल की सजा सुनाई गई है. प्रोफेसर साईबाबा और बाकी अभियुक्तों पर माओवादियों के साथ संबंध होने के साथ ही देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का अपराध सही साबित हुआ है. 

कौन हैं प्रोफेसर साईबाबा

प्रोफेसर जीएन साईबाबा डीयू के राम लाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक थे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था. साईबाबा चलने-फिरने में असमर्थ हैं. 90 फीसदी विकलांग साईबाबा व्हीलचेयर के सहारे चल पाते हैं.

मुंबई हाईकोर्ट ने पिछले साल जून में स्वास्थ्य आधार पर उन्हें जमानत दे दी थी. साईबाबा रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम के वामपंथी संगठन से भी जुड़े रहे हैं.

प्रोफेसर साईबाबा को मई 2014 में उनके दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा हेम मिश्रा और प्रशांत राही को 2013 में गिरफ्तार किया गया था. उनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए थे.

First published: 7 March 2017, 16:28 IST
 
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