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सूखे के सरकारी आंकड़े ही सिहरन पैदा करने के लिए काफी हैं

निहार गोखले | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

भारत में करीब  33 करोड़ लोग सूखा प्रभावित इलाकों में रह रहे हैं. केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक हलफनामे के अनुसार देश के 10 राज्यों के 256 ज़िले सूखा प्रभावित हैं.

केंद्र सरकार ने स्वराज अभियान द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के संबंध में ये आंकड़ा उपलब्ध कराया. सरकारी आंकड़ों ही देश में सूखे की व्यापकता बताने के लिए काफी है.

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इसमें उन राज्यों के आंकड़े नहीं जिन्होंने केंद्र सरकार को आधिकारिक आंकड़े नहीं उपलब्ध कराए हैं. आइए, देश के सूखा प्रभावित राज्यों पर एक नज़र डालते हैं.

उत्तर प्रदेश

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 75 में से 50 जिले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 72,014

सूखा प्रभावित जनसंख्या- 9,88,54,225 (फिलिपींस की आबादी के लगभग बराबर. अगर ये इलाक़ा स्वतंत्र देश होता तो दुनिया का 12वां सबसे बड़ा देश होता.)

देश में सूखा प्रभावित सबसे बड़ी आबादी यूपी में रहती है. सूखा प्रभावित 50 ज़िलों में से सात ज़िले बुंदेलखंड इलाक़े में आते हैं.

उत्तर प्रदेश में नौ करोड़ से ज्यादा लोग सूखा प्रभावित, राज्य के 50 जिलों में असर

राज्य में नवंबर, 2015 में सूखा घोषित किया गया. जानकारों ने इसकी आलोचना की क्योंकि सितंबर तक मॉनसून नहीं आया था. 2014 में भी मॉनसून नहीं आया था.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) के तहत 150 दिनों का रोजगार दिया जाता है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी प्रभावी है. केंद्र सरकार ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय का गठन किया है जो सूखा राहत की समीक्षा करेगी.

मध्य प्रदेश

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 51 में से 46 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 42,829

सूखा प्रभावित जनसंख्या- 4,00,00,000 (नार्वे की जनसंख्या से आठ गुना अधिक)

मध्य प्रदेश ने अक्टूबर, 2015 में 35 ज़िलों में सूखा घोषित किया. उसके बाद बाक़ी ज़िलों में. बुंदेलखंड के छह ज़िले मध्य प्रदेश में आते हैं. मनरेगा लागू करने में राज्य ने काफी सुस्ती दिखायी. हालांकि खाद्य गारंटी को लागू करने में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा.

महाराष्ट्र

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 36 में से 21 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 15,747

सूखा प्रभावित जनसंख्या- 3,68,77,505 (कनाडा की आबादी के बराबर)
देश के सबसे ज्यादा सूखा प्रभावित इलाकों में महाराष्ट्र का मराठवाड़ा शामिल है. पिछले साल अक्टूबर में सूखे की घोषणा की गई थी. पिछले साल सरकार ने इलाक़े में तालाब बनवाने की योजना की घोषणा की. जिसकी काफी तारीफ हुई.

सरकारी योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाबों में करीब दस प्रतिशत ही हो सके हैं तैयार

तालाब निर्माण का कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है. प्रस्तावित तालाबों में से दस फीसदी ही उपयोग के लिए तैयार हो सके हैं. इलाक़े में किसानों की आत्महत्या की दर बहुत अधिक है. केवल इस साल के आंकड़ों की बात करें तो औसतन प्रति दिन तीन किसान आत्महत्या कर रहे हैं.

झारखण्ड

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 24 में से 22 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 29,639
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 3,17,28,726 (मलेशिया की आबादी के बराबर)

राज्य में पिछले साल दिसंबर में सूखा घोषित किया गया था. राज्य की राजधानी रांची तक में पानी की किल्लत की ख़बरें आई हैं.

कर्नाटक

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 30  में से 27 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 22,759
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 3,11,91,173 (पुर्तगाल की जनसंख्या का तीन गुना)

राज्य में पिछले साल अगस्त से लेकर इस साल अप्रैल तक कई चरणों में सूखा प्रभावित इलाक़ों की घोषणा की गई. कर्नाटक भी सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में माना जा रहा है.

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राज्य में किसान आत्महत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं. केंद्र सरकार ने हाल ही में  753 करोड़ रुपये के राहत कोष की घोषणा की है. जबकि राज्य ने इससे दोगुनी राशि की मांग की थी.

आंध्र प्रदेश

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 13 में से 10 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 6,974
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 2,35,37,861

पिछले साल अक्टूबर और नवंबर में राज्य में सूखे की घोषणा की गई थी. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को पानी देने वाले ज्यादातर जलस्रोत सूख चुके हैं.

पानी की कमी के कारण राज्य से पलायन शुरू हो चुका है. पशु चारे की भी राज्य में भारी दिक्कत हो रही है.

छत्तीसगढ़

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 27 में से 25 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 16878
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 1,99,45,901

राज्य सरकार ने पिछले साल सितंबर और नवंबर में सूखा घोषित किया था केंद्र सरकार ने सूखा राहत के तहत राज्य को 4000 करोड़ रुपये की राशि दी.

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हाल ही में राज्य सरकार ने घोषणा की है कि गर्मी में स्कूल का समय थोड़ा पहले कर दिया है. सरकार ने घोषणा की है कि गर्मी की छुट्टी के दौरान भी बच्चों को मिड डे मील(दोपहर का भोजन) दिया जाएगा.

राजस्थान

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 33 में से 9 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 14487
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 1,94,69,000

राज्य सरकार ने पिछले  साल दिसंबर में सूखा घोषित किया था. राज्य के एक चौथाई गांवों में पानी की किल्लत है. राज्य सरकार ने ट्रेन और टैंकर से जल संकट से जूझ रहे गांवों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी है.

तेलंगाना

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 10 में से 7 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गांव- 5519
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 1,78,33,289

राज्य में लगातार दूसरे साल सूखा पड़ा है. इस बार पिछले साल नवंबर में सूखा घोषित किया गया. पिछले साल राज्य में मॉनसून नहीं आया था. राज्य के 1.78 करोड़ लोग  सूखा प्रभावित हैं.

ओडिशा

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 30 में से 27 ज़िले प्रभावित

सूखा प्रभावित गाँव- 29077
सूखा प्रभावित जनसंख्या- 1,67,51,862

राज्य सरकार ने इस साल मार्च में ज्यादातर जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया. केंद्र ने राज्य सरकार को 276 करोड़ रुपये सूखा राहत के तहत दिए. हालांकि राज्य ने इससे चार गुना ज्यादा राशि की मांग की थी.

दूसरे राज्य

अदालत के कार्यवाही के दौरान ये बात सामने आई कि कम से कम तीन राज्यों में सूखे की आशंका जतायी जा रही है लेकिन उन्होंने न तो इसकी घोषणा की है, न ही इस बारे में हलफनामा दिया है. इसलिए इन राज्यों के बहुत कम आंकड़े उपलब्ध हैं.

गुजरात

सूखा प्रभावित ज़िले- कुल 33 में से 3 ज़िलों में सूखा घोषित(संख्या बढ़ सकती है)

सूखा प्रभावित गाँव- 526 (संख्या बढ़ सकती है)
सूखा प्रभावित जनसंख्या- अनिश्चित

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात को इस बात के लिए कड़ी फटकार लगायी कि उसने हलफनामा दायर करने के बजाय आधिकारिक नोट जमा कराया. जब तक राज्य सरकार अपना हलफनामा दायर नहीं करती तब तक सूखे से जुड़े सही आंकड़े नहीं मिलेंगे.

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राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने राज्य के तीन जिलों के 526 गांवों में सूखा घोषित किया है. राज्य सरकार ने इस साल एक अप्रैल  को खाद्य गारंटी लागू की. जबकि पिछले साल सितंबर में स्पष्ट हो गया था कि राज्य सूखा प्रभावित है.

राज्य सरकार के अनुसार वो 14 ज़िलों के 317 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचवा रही है जिससे 468 गांवों को लाभ मिलेगा. राज्य सरकार ने नर्मदा बांध से छोटे बांधों को पानी देना शुरू कर दिया है. नर्मदा नहर की सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है ताकि पानी की चोरी न हो सके.

खराब बारिश के बावजूद बिहार ने अभी किसी भी ज़िले में सूखा घोषित नहीं किया है. पंजाब और हरियाणा में भी सामान्य से 30 फीसदी तक कम बारिश हुई है लेकिन किसी भी राज्य ने अभी तक किसी भी इलाक़े में सूखा नहीं घोषित किया है.

First published: 27 April 2016, 12:34 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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