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फिर जमी मंडली, असहज हुई भाजपा

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 December 2015, 17:43 IST

बिहार विधानसभा चुनाव में हार पर सवाल उठाने वाला भाजपा का मार्गदर्शक मंडल एक बार फिर से सक्रिय हो उठा है. गुरूवार को वरिष्ठ नेताओं की चौकड़ी एक बार फिर से मिली. इस बार चर्चा का विषय कीर्ति आजाद और अरुण जेटली थे.

सुबह-सुबह मर्गदर्शक मंडल के नेता मुरली मनोहर जोशी के घर पर लालकृष्ण आडवाणी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा पहुंचे. गौरतलब है कि पिछले महीने इन्हीं नेताओं ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बिहार चुनावों के लिए जिम्मेदार ठहराया था.

बैठक का महत्व इसकी टाइमिंग से बढ़ जाता है क्योंकि एक दिन पहले ही कीर्ति आजाद को पार्टी से निकाला गया है

इस मीटिंग का महत्व इसकी टाइमिंग के लिहाज से बढ़ जाता है. कल ही भाजपा ने सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित किया है. कीर्ति आजाद ने डीडीसीए में भ्रष्टाचार को लेकर अरुण जेटली पर बिना नाम लिए निशाना साधा था. बाद में उन्होंने जेटली को अपने खिलाफ मानहानि का दाावा करने की चुनौती भी ट्वीट के जरिए दी.

सूत्रों के मुताबिक बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने डीडीसीए मुद्दे पर जेटली की भूमिका की जांच की मांग करने का निर्णय लिया है. इस बैठक से पार्टी के भीतर एक बार फिर बेचैनी बढ़ गई है.


बागी मूड में शत्रुघ्न सिन्हा भी

कीर्ति को पार्टी से बाहर करने पर सबसे पहले शत्रुघ्न सिन्हा ने मुंह खोला. उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट करके कीर्ति के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का समर्थन किया. इससे पहले भी सिन्हा बिहार चुनावों के दौरान बागी तेवर अपना हुए थे. उन्हें पार्टी ने विधानसभा चुनाव के प्रचार से पूरी तरह दूर रखा था.

सुगबुगाहट है कि भाजपा सिन्हा को भी कीर्ति की तर्ज पर बाहर का रास्ता दिखा सकती है. खुद सिन्हा का एक बयान आया था जिसमें उन्होंने कहा माना था कि उनके साथ आडवाणी का करीबी होने के कारण भेदभाव किया गया. बिहार चुनावों के दौरान उन्होंने नीतीश कुमार की सार्वजनिक तौर पर तारीफ की थी.

कीर्ति ने फिर बोला हमला

पार्टी से बाहर किए जाने के बाद कीर्ति आजाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पार्टी को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने सवाल किया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना गलत है? क्या डीडीसीए का मामला भाजपा से जुड़ा था? मेरी लड़ाई तो पार्टी के बाहर एक भ्रष्टाचार से थी. यह पार्टी के अनुशासन के दायरे में कैसे आ गया. उन्होंने इस मुद्दे पर पीएम के हस्ताक्षेप की मांग भी की है.

उधर मार्गदर्शक मंडल की बैठक से जो खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं ने कीर्ति को पार्टी से बाहर किए जाने पर चिंता जतायी है. सूत्रों के मुताबिक इससे गलत संदेश जाएगा.

भाजपा की एक और चिंता यह है कि उसके यहां असंतुष्टों का दायरा बढ़ता जा रहा है. शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, कीर्ति आज़ाद, आरके सिंह, शांता कुमार समेत कई ऐसे नेता हैं जो मौजूदा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कभी न कभी मुंह खोल चुके हैं.

First published: 24 December 2015, 17:43 IST
 
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