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मारग्रेट अल्वा: सोनिया गांधी ने मुझे मंत्री नहीं बनने दिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 July 2016, 11:05 IST
(पीटीआई)

पूर्व कांग्रेसी नेता मारग्रेट अल्वा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो सारे फैसले खुद ही लेती हैं. किसी की सलाह को तवज्जो नहीं देती हैं.

अल्वा ने कहा कि राजीव गांधी से जुडे बोफोर्स मामले को खारिज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तत्कालीन नरसिंह राव सरकार के अपील करने के फैसले ने राव और सोनिया गांधी के बीच शक की खाई को गहरा कर दिया था.

किताब 'करेज एंड कमिटमेंट' में आरोप

अल्वा ने यह बात अपनी किताब ‘करेज एंड कमिटमेंट' में लिखा है. इस किताब के विमोचन के पहले अल्वा ने कहा कि राव सरकार के फैसले के बाद बेहद नाराज सोनिया गांधी ने उनसे पूछा कि क्या राव उन्हें जेल भेजना चाहते हैं.

कांग्रेस में कई वरिष्ठ पदों पर रह चुकीं मारग्रेट अल्वा को साल 2008 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों में पार्टी के टिकट कथित तौर पर ‘बेचे' जाने को लेकर इस्तीफा देने के लिए कहा गया था. उनके आरोपों को पार्टी में ‘केंद्रीकृत फैसला लेने' के कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना समझा गया.

उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार में मंत्री रहे सीपीएन सिंह और अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे के बाद चर्चा में आए मध्यस्थ क्रिस्टियन माइकल के पिता वोल्फगेंग मिशेल के साथ संबंधों पर भी कहा.

अल्वा ने साल 1980 में दक्षिण अफ्रीका को टैंकों की आपूर्ति के बारे में कहा है तथा उस समय लंदन में रहने वाले वोल्फगेंग मिशेल किस तरह प्रभावशाली थे और उनका संजय गांधी के साथ जुडाव था.

सोनिया-राव कटु संबंधों का जिक्र

सोनिया गांधी और नरसिम्हा राव के बीच कटु संबंधों को याद करते हुए मारग्रेट अल्वा ने कहा कि बोफोर्स मामले पर बिना उनकी जानकारी के सीबीआई से सीधे निपटने के पीएमओ के फैसले ने राव के प्रति सोनिया का संदेह गहरा कर दिया.

अल्वा ने इंडिया टुडे टीवी के कार्यक्रम में करण थापर से कहा, "मैं सीबीआई की प्रभारी मंत्री थी और उन्होंने मुझसे वह कहा, फैसला मेरी जानकारी के बिना लिया गया. फाइल पर पीएमओ ने सीधे कार्रवाई की."

अल्वा ने राव के निधन पर सम्मान नहीं जताने के लिए पार्टी नेतृत्व से असहमति जताई. उन्होंने कहा, "उनका पार्थिव शरीर एआईसीसी परिसर भी नहीं लाया गया. तोप ढोने की गाड़ी गेट के बाहर फुटपाथ पर पार्क की गयी."

उन्होंने कहा, "चाहे जो भी मतभेद रहा हो, वह प्रधानमंत्री थे, वह कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे, वह मुख्यमंत्री थे, वह पार्टी के महासचिव थे. जब एक व्यक्ति की मौत होती है आप उस तरह का व्यवहार नहीं करते."

74 वर्षीय अल्वा ने कहा कि राव के निधन पर जिस तरह उनके साथ व्यवहार हुआ उससे उनको चोट पहुंची. साथ ही कहा, "किसी दिवंगत नेता के साथ इस तरह व्यवहार नहीं किया जाना चाहिये.''

2008 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की अपनी आलोचना के बाद पार्टी महासचिव के पद से इस्तीफे के बारे में बात करते हुए अल्वा ने कहा, "टिकट बेचने के बारे में कहकर मुझे नतीजा भुगतना पड़ा."

अल्वा ने कहा कि चुनावों के पहले पार्टी के खिलाफ बोलने के लिए सोनिया ने उन्हें फटकार लगाई. चुनावों में भाजपा की जीत हुई.

'निलंबित करवाना चाहते थे एंटनी'

इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि वरिष्ठ नेता ए के एंटनी उन्हें पार्टी से निलंबित करवाना चाहते थे, लेकिन सोनिया ने उन सुझावों को खारिज कर दिया.

अल्वा ने कहा कि उनके और दो अन्य नेताओं वाली कांग्रेस के तीन सदस्यीय पैनल ने 2004 में एंटनी को केरल के मुख्यमंत्री पद से हटाने और उनकी जगह ओमन चांडी को लाने का फैसला किया और यही कारण था कि एंटनी मेरे खिलाफ थे.

अल्वा ने कहा, "एंटनी को लगा कि मैंने उन्हें केरल के मुख्यमंत्री पद से हटवाया है, लेकिन मैंने उनसे अच्छा बर्ताव किया. लोगों ने मुझसे कहा कि दरअसल, उन्होंने मेरी बर्खास्तगी की सिफारिश की, लेकिन सोनिया गांधी ने कहा कि नहीं."

उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अक्सर कहते थे कि वह अपने मंत्रिमंडल में उन्हें लेना चाहते हैं.

First published: 16 July 2016, 11:05 IST
 
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