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मेनका गांधी: भारत में मुश्किल है वैवाहिक दुष्कर्म के विचार को लागू करना

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि भारत जैसे देश में वैवाहिक दुष्कर्म के कॉन्सेप्ट लागू कर पाना संभव नहीं है. मेनका गांधी ने गरीबी, अशिक्षा और धार्मिक अंधविश्वास को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक मेनका गांधी से राज्यसभा में पूछा गया था कि सरकार की वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में रखने के लिए क्या योजना है?

इस पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने लिखित जवाब देते हुए कहा कि जिस तरह दूसरे देशों में वैवाहिक दुष्कर्म का कॉन्सेप्ट है, वैसे हम उसे भारत में लागू नहीं कर सकते हैं.

मेनका गांधी ने इसके पीछे दलील दी की भारत में गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक मूल्य, धार्मिक आस्था और विवाह के प्रति समाज का नजरिया जिम्मेदार है. सरकार की मंशा है, लेकिन इसे लागू कर पाना मुश्किल है. 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की अध्यक्षता में बने पैनल ने वैवाहिक दुष्कर्म पर रिपोर्ट पेश करते हुए इसे अपराध की श्रेणी में शामिल करने की सलाह दी थी. लेकिन इसके बावजूद सरकार की सोच में कोई बदलाव नहीं आया.

भारत में अभी भी वैवाहिक दुष्कर्म के मामले आईपीसी की धारा-377 के तहत दर्ज किए जाते हैं. इस धारा में अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले दर्ज किये जाने का प्रावधान है.

रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी वैवाहिक दुष्कर्म के मामले धारा-376 यानी रेप की श्रेणी में दर्ज किए जाने चाहिए. इसके साथ ही जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने भी नए एंटी-रेप कानून में वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में रखने की सिफारिश की थी.

First published: 12 March 2016, 6:31 IST
 
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