Home » इंडिया » Marrige does not mean that wife is always ready and curious for physical relations: HC verdict on marital rape
 

'शादी का ये मतलब नहीं की पत्नी शारीरिक संबंध के लिए हमेशा इच्छुक और राजी हो'

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 July 2018, 9:17 IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेरिटल रेप पर जरुरी टिप्पणी करते हुए कहा कि जरुरी नहीं है कि वैवाहिक बलात्कार के दौरान बल का प्रयोग किया जाए. पत्नी को ब्लैकमेल करके या आर्थिक दबाव के चलते भी ऐसा हो सकता है. आगे कोर्ट ने कहा, '' शादी का ये मतलब नहीं है कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध बनाने के लिए इच्छुक और समर्पित रहे. वैवाहिक रेप के मामले में बल प्रयोक को मिथक बताते हुए कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ बल प्रयोग से ही रेप नहीं होता.

इस मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा है कि शादी एक पारस्परिक रिश्ता है और इस रिश्ते में महिला हो या पुरुष दोनों को ही शारीरिक संबंध के लिए मना करने का अधिकार है.

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अदालत ने ये टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दी जहां पर जहां पर मेरिटल रेप यानी वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग की गई है. इस मामले में सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, 'शादी का यह मतलब नहीं है कि शारीरिक संबंध बनाने के लिए महिला हर समय तैयार, इच्छुक और राजी हो. पुरुष को यह साबित करना होगा कि महिला ने सहमति दी है.'

कोर्ट में वैवाहिक बलात्कार मुद्दे पर एनजीओ 'मेन वेलफेयर ट्रस्ट' ने ये दलील दी थी अपराध में बल प्रयोग या बल की धमकी को एक महत्वपूर्ण करक बनाया जाए. ये एनजीओ वैवाहिक रेप को अपराध की श्रेणी में लाने वाली याचिका का विरोध कर रहा है. कोर्ट ने कहा, 'यह कहना गलत है कि बलात्कार के लिए शारीरिक बल का इस्तेमाल जरूरी है. यह जरुरी नहीं है कि बलात्कार में चोटें आई हो. आज बलात्कार की परिभाषा पूरी तरह अलग है.'

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इस याचिका का विरोध करते हुए एनजीओ की पैरवी कर रहे अमित लखानी और रित्विक बिसारिया ने दलील पेश करी की माजूदा कानून में पहले ही पत्नी को शादी में यौन हिंसा से संरक्षण मिला हुआ है. इस दलील पर कोर्ट ने जवाब दिया कि अगर ये बाकी के कानून में जुडी हुई है या शामिल है तो आईपीसी की धारा 375 में अपवाद क्यों होना चाहिए. गौरतलब है कि इस धारा के मुताबिक किसी व्यक्ति का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं हैं.

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कोर्ट ने पहले ही साफ़ किया कि आज रेप की केवल एक ही परिभाषा नहीं है. विवाह संबंध में भी बिना मर्जी के शारीरिक संबंध बनाने न्यायोचित नहीं है. कोर्ट ने कहा कि शादी में भी केवल पत्नी को ही नहीं बल्कि महिला व पुरुष दोनों को ये अधिकार है कि वो अपनी मर्जी के खिलाफ सम्बन्ध बनाने को 'ना' कह सकते हैं. ये उनका अधिकार है.

First published: 18 July 2018, 9:17 IST
 
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