Home » इंडिया » Maruti Suzuki Manesar Plant Violence Case: life imprisonment for 13 convicted
 

मारुति सुजुकी फैक्ट्री हिंसा मामले में 13 को आजीवन कारावास और 4 को पांच साल जेल

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2017, 18:11 IST

हरियाणा के मानेसर स्थित मारुति सुजुकी फैक्ट्री में हुई हिंसा के मामले में अदालत ने शनिवार को सभी दोषियों को सजा सुना दी. 2012 में हुई इस घटना में अदालत ने 13 दोषियों को उम्रकैद, 4 को पांच साल और 14 अन्य को जेल की सजा सुनाई है.

इससे पहले 10 मार्च को गुरग्राम की जिला अदालत ने 31 आरोपियों दोषी करार करने के साथ ही 117 आरोपियों को बरी कर दिया था. इस घटना के करीब साढ़े चार साल बाद गुरग्राम के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल ने शनिवार को यह आदेश सुनाया.

कर्मचारियों पर आरोप थे कि उन्होंने देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मानेसर प्लांट में हिंसक झड़प की. इन अभियुक्तों में ज्यादातर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर शामिल थे.

बता दें कि 18 जुलाई 2012 को मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में श्रमिकों द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान कंपनी के महाप्रबंधक (एचआर) अवनीश देव की जान चली गई थी.

उस वक्त आरोप लगाए गए थे कि अवनीश को जिंदा जला दिया गया. इस दौरान हुई हिंसा में तमाम लोग घायल भी हुए थे. 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

इस घटना के परिणामस्वरूप इस प्लांट को एक माह के लिए ताला लगा दिया गया. इस प्रदर्शन के पीछे की वजह यह थी कि कंपनी ने कम तनख्वाह पाने वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों को भर्ती कर लिया था.

इस मामले में 148 कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और इनमें से 11 फिलहाल जेल में हैं जबकि बाकियों को जमानत पर छोड़ दिया गया.

वहीं, इस मामले में मारुति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 525 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया था.

बता दें कि 18 जुलाई 2012 को मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में श्रमिकों द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान कंपनी के महाप्रबंधक (एचआर) अवनीश देव की जान चली गई थी.

उस वक्त आरोप लगाए गए थे कि अवनीश को जिंदा जला दिया गया. इस दौरान हुई हिंसा में तमाम लोग घायल भी हुए थे. 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

 

इस घटना के परिणामस्वरूप इस प्लांट को एक माह के लिए ताला लगा दिया गया. इस प्रदर्शन के पीछे की वजह यह थी कि कंपनी ने कम तनख्वाह पाने वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों को भर्ती कर लिया था.

इस मामले में 148 कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और इनमें से 11 फिलहाल जेल में हैं जबकि बाकियों को जमानत पर छोड़ दिया गया.

वहीं, इस मामले में मारुति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 525 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया था.

First published: 18 March 2017, 18:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी