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मथुरा कांड पर कठघरे में डीएम और एसएसपी

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2016, 13:33 IST

मथुरा के जवाहरबाग इलाके में हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव की मौत के बाद प्रशासन कठघरे में है. इस दौरान मथुरा जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई है.

दरअसल जिला प्रशासन पिछले एक महीने से ‘ऑपरेशन जवाहर बाग’ की तैयारी कर रहा था, लेकिन प्रशासन का यह ऑपरेशन पूरी तरह से फेल रहा और इसमें उसके दो अधिकारियों की जान चली गई, जबकि 25 उपद्रवियों की मौत हो गई.

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है वहां के डीएम और एसएसपी की कथित लापरवाही. जवाहरबाग में डीएम और एसएसपी ने केवल 50-60 पुलिसकर्मियों को हथियारों और देसी बम से लैस तीन हजार से ज्यादा बलवाइयों के सामने भेज दिया.

डीएम राजेश कुमार और एसएसपी राकेश सिंह ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई और अपने घर पर ही आराम करते रहे, जबकि एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव के नेतृत्व में एक छोटी सी पुलिस टुकड़ी जवाहरबाग को खाली कराने के लिए भेज दिया गया.

ख़बरों के मुताबिक उन्हें जब फायरिंग में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव के घायल होने की सूचना मिली, तब उन्होंने अतिरिक्त फोर्स को घटनास्थल के लिए रवाना किया और उसके बाद डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे.

गोली चलाने की नहीं थी इजाजत!

इसे पहले डीएम ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को उपद्रवियों पर गोली चलाने की इज़ाज़त नहीं दी थी, जिसकी वजह से शुरुआती दौर में ही कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.

हादसे के पहले डीएम राजेश कुमार ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पुलिस टीम के ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी. हालांकि घटना के बाद डीएम राजेश कुमार ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, "हम लोग जवाहरबाग में ट्रायल कर रहे थे. यह फाइनल ऑपरेशन नहीं था.

लेकिन हमें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि वो पुलिस बल पर इस तरह से हमला कर देंगे. इस हमले से पहले भी वहां ट्रायल हुए थे, लेकिन उन्होंने हमला नहीं किया था."

कथित सत्याग्रही पिछले दो साल से उस जमीन पर कब्ज़ा करके रह रहे थे और स्थानीय खुफिया यूनिट उस इलाके में जाने की हिम्मत नहीं करती थी, ऐसे में उन्हें बलवाइयों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

जिला प्रशासन और पुलिस के पास केवल मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव और चंदन बॉस सहित सिर्फ चार लोगों के बारे में जानकारी थी. ऐसे में डीएम और एसएसपी का छोटी पुलिस टुकड़ी को वहां भेजना पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना बताया जा रहा है.

इस बीच माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस मामले में मथुरा के डीएम और एसएसपी के अलावा आगरा मंडल के कमिश्नर और आईजी पर भी कार्रवाई कर सकती है.

First published: 4 June 2016, 13:33 IST
 
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