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मथुरा हिंसा: पहले से थी खुफिया रिपोर्ट फिर भी दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जान क्यों गई?

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 June 2016, 16:12 IST
(पत्रिका)

मथुरा में हुई व्यापक हिंसा के बाद अब प्रशासन के ऊपर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. सवाल ये कि क्या प्रशासन ने हालात का सही तरीके से आकलन नहीं किया. इस बीच यूपी के डीजीपी ने कहा है कि मामले में कुल 320 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जो मथुरा में तैनात रह चुके हैं, से कैच न्यूज़ की बातचीत में कुछ बेहद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं. खबर है कि स्थानीय पुलिस को पहले से ही इस बात की खबर थी कि प्रदर्शनकारी वहां पर हथियार आदि रखे हुए हैं. इसके बावजूद जिस तरीके से पुलिस ने अपना अभियान चलाया वह नितांत गैर पेशेवर कहा जाएगा.

खुफिया जानकारी के बावजूद प्रशासन ने एहतियाती उपायों की अनदेखी करते हुए जवाहर बाग में कार्रवाई की. जिसमें स्थानीय एसओ संतोष यादव और एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की मौत हो गई. करीब दो दर्जन पुलिस के जवान भी इस हिंसा में घायल हुए हैं.

इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. इस मामले में प्रशासन ने जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए कार्रवाई से पहले हालात के बारे में खुफिया रिपोर्ट की अनदेखी की.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक खुफिया फीडबैक पहले से था कि वहां काफी लोग इकट्ठा हैं और हिंसा भड़क सकती है. फिर भी पुलिस और अधिकारियों ने पुलिस मैनुअल के बेसिक नियमों की अनदेखी की. बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के कार्रवाई की गई. नतीजा इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई.

इंटेलिजेंस रिपोर्ट की अनदेखी!

दो साल से ज्यादा अरसे से पूरे कांड के सरगना माने जा रहे रामवृक्ष यादव के साथ वहां काफी लोग रह रहे थे. स्थानीय इंटेलिजेंस को उनके क्रिया-कलाप के बारे में जानकारी रही होगी. ऐसे में क्या खुफिया रिपोर्ट के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई, ये फिलहाल जांच का विषय है.

इस बीच उत्तर प्रदेश के डीजीपी जावीद अहमद का कहना है कि कुल 22 उपद्रवियों की मौत हुई है. डीजीपी का कहना है कि उपद्रवियों ने झोपड़ियों में खुद आग लगाई. इस दौरान 11 की आग में झुलसकर, जबकि 11 उपद्रवियों की लाठियों की चोट से मौत हुई.

320 गिरफ्तार, रासुका लगेगा

डीजीपी जावीद अहमद का कहना है कि झोपड़ियों में गैस सिलेंडर और विस्फोटक थे. उपद्रवियों ने जब झोपड़ियों में आग लगाई, इस दौरान विस्फोट से कई उपद्रवी घायल हो गए.

डीजीपी के मुताबिक इस मामले में 124 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) तामील किया जाएगा. वहीं मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव अभी फरार है. उसके खिलाफ भी रासुका लगाया जाएगा. 

हथियारों का जखीरा बरामद

डीजीपी जावीद अहमद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कार्रवाई के दौरान जवाहर बाग इलाके से हथियारों का जखीरा जब्त हुआ है. इसमें 47 देसी तमंचे, छह राइफल और 178 जिंदा कारतूस जब्त किए गए हैं. वहीं धारा 153 के तहत 196 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है.

23 पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती

डीजीपी जावीद अहमद ने बताया कि उपद्रवियों ने हथियार, लाठी और बम से पुलिस पर हमला किया. बिना किसी उकसावे के पुलिस को उपद्रवियों ने निशाना बनाया. डीजीपी ने कहा कि जवाहर बाग इलाके को पूरी तरह से खाली करा लिया है.

डीजीपी ने बताया, "पुलिस के दो बहादुर अफसर एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष यादव कार्रवाई के दौरान शहीद हो गए. पुलिस वालों को उपद्रवियों ने बहुत ही बेरहमी से मारा. कुछ पुलिसकर्मियों को मृत समझकर छोड़ दिया था. घायल 23 पुलिस वालों का अस्पताल में इलाज चल रहा है."

First published: 3 June 2016, 16:12 IST
 
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