Home » इंडिया » Mathura Violence: Ground report from alleged mastermind Ramvriksha Yadav's village
 

मथुरा कांड के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव की 10 कहानियां

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 4 June 2016, 15:55 IST
(पत्रिका)

मथुरा के जवाहर बाग इलाके में हुई व्यापक हिंसा का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव गाजीपुर के मरदह थाना इलाके का रहने वाला है. हिंसा के बाद से उसका सुराग नहीं मिल रहा है. आशंका ये भी जताई जा रही है कि उसकी मौत हो चुकी है.

रामवृक्ष यादव ने मथुरा में अपनी जड़ें जमा ली थीं, लेकिन उसका ताल्लुक ब्रज की धरती से करीब साढ़े सात सौ किलोमीटर दूर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से है. पत्रिका की टीम तफ्तीश करते हुए कथित सत्याग्रहियों के सरगना रामवृक्ष यादव के गांव पहुंच गई.   

मथुरा कांड के खलनायक माने जा रहे रामवृक्ष यादव का मुरीद है उसका रायपुर बाघपुर गांव. गांव वालों से बातचीत के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं.

लोकतांत्रिक सेनानी की पेंशन

रामवृक्ष यादव मरदह इलाके की ग्राम सभा रायपुर बाघपुर का रहने वाला है. वो लोकतांत्रिक सेनानी की पेंशन भी उत्तर प्रदेश सरकार से पाता है. लेकिन रामवृक्ष का पूरा परिवार गांव से बाहर ही रहता है.

बाबा जयगुरुदेव के शिष्य रह चुके रामवृक्ष के दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं. दोनों पुत्रियों की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों पुत्र और पत्नी रामवृक्ष के साथ मथुरा में रह रहे थे.

इमरजेंसी के दिनों में रामवृक्ष के सहयोगी रहे लोकतांत्रिक सेनानी सुदामा यादव जो गांव में रहते हैं, उन्होंने राम वृक्ष यादव के स्वभाव की तारीफ करते हुए बताया कि इमरजेंसी का हम लोग विरोध किए थे और जेल में भी बन्द हुए थे.

गांव में कम आना-जाना

अपनी मांगों, सुभाष चंद्र बोस और जय गुरुदेव के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए कोर्ट से मुकदमा भी खारिज हुआ है. जिसकी पुन: मांग जवाहर बाग मथुरा में कथित सत्याग्रह के रूप में हो रही थी. दो साल से ये लोग फिलहाल यहां नहीं रहते.

उनके गांव के ही गुरु भाई रामाकान्त यादव बताते हैं कि वह 1972-73 में जयगुरुदेव से जुड़ा था. ग्रामीणों के अनुसार रामवृक्ष यादव गांव बहुत कम आता है. पिछली बार जब आया था, तब अपनी जमीन- जायदाद पट्टीदारों को सौंपकर परिवार के साथ मथुरा चला गया था. गांव के लोगों का ये भी कहना है कि रामवृक्ष यादव कभी गांव की राजनीति में नहीं पड़े.

जय गुरुदेव का अनन्य भक्त

मथुरा में अवैध कब्जा हटाने गई पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग और आगजनी की घटना का तगड़ा कनेक्शन पूर्वांचल से है. गाजीपुर का रहने वाला रामवृक्ष यादव जय गुरुदेव का अनन्य भक्त है. हालांकि बाबा जयगुरुदेव अहिंसा और शाकाहार की बात करते थे, पर उनका यह अनन्य भक्त हिंसा का पुजारी निकला.

इतना ही नहीं वह इमरजेंसी में जेपी आंदोलन के साथ भी जुड़ा था. रामवृक्ष के गांव के लोग और साथी हालांकि ये तो कहते हैं कि वह स्वभाव का रूखा और मुंहफट था, पर इतनी बड़ी घटना का मुख्य आरोपी होने से वह भी दंग हैं.

मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग

रामवृक्ष यादव शुरू से ही आंदोलनकारी प्रवृत्ति का था. बड़ा होने के साथ ही वह जय गुरुदेव महाराज के साथ जुड़ा, तो ऐसा जुड़ता चला गया कि उनका अनन्य भक्त हो गया. बाद में जब जयगुरुदेव की मौत हुई और उनकी डेड बाॅडी को जला दिया गया, तो रामवृक्ष ने इस पर यकीन नहीं किया.

उसने इसे गलत बताया और दावा किया कि जलाई गई डेडबाॅडी जय गुरुदेव की नहीं थी. उसने प्रशासन से उनकी मौत का मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा. जिसके न मिलने पर इसके लिये उसने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए मजबूती से पैरवी की. वहां याचिका खारिज होने के बाद वह इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले गया.

गाजीपुर के बाघपुर गांव में रामवृक्ष यादव का दो साल से बंद पड़ा घर (पत्रिका)

बचपन से रूखा स्वभाव

पत्रिका की टीम ने जब रामवृक्ष यादव के गांव रायपुर बाघपुर जाकर वहां के लोगों से बात की, तो पता चला कि वह पिछले दो साल से पत्नी और बच्चों के साथ मथुरा में ही रह रहा था.

गांव में उसके मिट्टी के मकान में ताला लटका हुआ था. खेती-बारी भी दूसरे के जिम्मे थी. गांव में रामवृक्ष के गुरु भाई व दोस्तों ने बताया कि वह बचपन से ही स्वभाव का रूखा था. किसी की बात को उसके सामने बोल देने की आदत थी, इसके चलते लोग उससे दूर ही रहना पसंद करते थे. गांव के लोगों ने जब यह खबर सुनी तो उनको भी इसका यकीन नहीं हो रहा था.

इमरजेंसी में जेल

रामवृक्ष यादव इमरजेंसी के दौरान जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से भी जुड़ा था. उसने इमरजेंसी के वक्त  गाजीपुर में जुलूस निकालकर जिला मुख्यालय पर धरना दिया था. इसके लिए उसे जेल में डाल दिया गया था.

बाद में उसे लोकतांत्रिक सेनानी घोषित कर दिया गया. इस वजह से उत्तर प्रदेश सरकार रामवृक्ष को बाकायदा पेंशन भी देती है. रामवृक्ष यादव का नाम लोकतांत्रिक पेंशनधारियों में दर्ज है. यही नहीं उसने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मौत पर भी सवाल उठाते हुए उस सम्बन्ध में आवाज उठाई और कथित तौर पर सत्याग्रह किया.

गाजीपुर में रामवृक्ष यादव के बाघपुर गांव के निवासी (पत्रिका)

एक गुरु के चेले शिवपाल-रामवृक्ष

बाबा जय गुरुदेव की विरासत पर दावेदारी के लिए मथुरा कांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा रामवृक्ष यादव वर्चस्व की लड़ाई में पंकज बाबा के साथ खड़ा था.

यूपी के कैबिनेट मंत्री और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव और रामवृक्ष यादव एक ही गुरु के शिष्य हैं. इन दोनों ही का बाबा जय गुरुदेव से गहरा नाता था.

खुद को बाबा जय गुरुदेव का शिष्य कहने वाला रामवृक्ष लम्बे समय से बाबा जय गुरुदेव की जय-जयकार लगाकर और उनका मृत्यु प्रमाण पत्र मांगकर प्रशासन की नींद हराम किये हुए था. शिवपाल यादव का बाबा जयगुरुदेव और उनकी संस्‍था से नाता पहले से ही चर्चा में रहा है.

'मिलकर काम करें गुरुभाई'

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव अक्सर बाबा जय गुरुदेव के मथुरा आश्रम आते रहे हैं. अहम बात ये है कि मथुरामें बाबा जयगुरुदेव की संपत्ति का विवाद दो गुटों के बीच बड़े संघर्ष की वजह बना हुआ है.

जब पिछले साल दिसंबर में शिवपाल यादव मथुरा स्थित बाबा जयगुरुदेव के आश्रम में गए, तो वहां रामवृक्ष यादव भी आया हुआ था. उस दौरान शिवपाल ने घोषणा की थी कि अगर बाबा जयगुरुदेव के आश्रम या मंदिर पर संकट आया, तो सरकार मदद के लिए आगे आएगी.

शिवपाल यादव ने इस दौरान ये भी कहा था कि कि ईश्वर के बाद संतों का ही स्थान है और बाबा जयगुरुदेव ऐसे संत थे कि उनके लिए सभी गुरु भाइयों को मिलकर काम करना चाहिए.

पंकज बाबा की कहानी

अगर सियासी चर्चाओं की मानें तो बाबा के उत्‍तराधिकारी के तौर पर उनके ड्राइवर पंकज को काबिज कराने में भी शिवपाल यादव की अहम भूमिका रही है. वही पंकज जो आज पंकज बाबा के नाम से जय गुरुदेव का उत्‍तराधिकारी बनकर बैठा है.

दरअसल रामवृक्ष यादव भी पंकज बाबा का बेहद नजदीकी था. मूल रूप से इटावा जनपद के बकेवर थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव खितौरा निवासी बाबा जयगुरुदेव के पिता का नाम राम सिंह था. बाबा पर उनके गृह जनपद ही नहीं, लखनऊ में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए और उनमें सजा हुई.

बाबा जयगुरुदेव का कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गहरा दबदबा था. माना जा रहा है कि तकरीबन तीन वर्षों से जवाहर बाग पर कब्ज़ा जमाये रामवृक्ष यादव और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी की वजह रामवृक्ष के राजनैतिक संबंध थे.

मृत्यु प्रमाण पत्र का राज

जवाहर बाग पर कब्‍जा करने वाले रामवृक्ष यादव और उसके कथित सत्‍याग्रहियों की मांगों में एक यह मांग भी  शामिल थी कि जिला प्रशासन उन्‍हें बाबा जयगुरुदेव का मृत्‍यु प्रमाण पत्र उपलब्‍ध कराए. रामवृक्ष ने इस मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में रथयात्रा भी निकाली थी.

रामवृक्ष का कहना था कि बाबा जयगुरुदेव की मौत हुई ही नहीं है और जिस व्‍यक्‍ति को उनके नाम पर मृत दर्शाया गया था, वह कोई और था. जयगुरुदेव को उनके कथित अनुयायियों ने उनकी सारी संपत्ति हड़पने के लिए कहीं गायब कर दिया है.

रामवृक्ष यादव का मथुरा में ही जवाहर बाग की जमीन पर कब्जेदारी, जयगुरुदेव का मथुरा में भूमि विवाद, बाबा जय गुरुदेव का मृत्यु  प्रमाण पत्र मांगने के लिए आन्दोलन और शिवपाल की दिलचस्पी यह बताती है कि दो साल से प्रशासन की नींद हराम करने वाले रामवृक्ष के सिर पर किसी न किसी बड़े नेता का हाथ था.

First published: 4 June 2016, 15:55 IST
 
अगली कहानी