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जय गुरुदेव, समाजवादी पार्टी और शिवपाल यादव

अतुल चंद्रा | Updated on: 7 June 2016, 22:59 IST
(कैच न्यूज)

मथुरा में एक पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और स्टेशन आॅफिसर संतोष यादव सहित 29 लोगों की जान लेने वाले खूनी संघर्ष के तीन दिनों बाद देश के सबसे महत्वपूर्ण सूबों में से एक उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, ‘‘मथुरा के डीएम/एसएसपी का तबादला कर दिया गया है. नए अधिकारियों की तैनाती जल्द ही कर दी जाएगी.’’

बाद में जवाहरबाग क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए दुखद घटनाक्रम के सदमे से जूझ रहे मथुरा में नए जिलाधिकारी के रूप में निखिल चंद्र शुक्ला और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर बबलू कुमार की तैनाती की घोषणा की गई.

ऐसी प्रत्येक घटना के बाद नियमित रूप से होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई के अलावा सरकार ने पहले ही इस पूरे घटनाक्रम की जांच अलीगढ़ के मंडलायुक्त चंद्रकांत से करवाने का आदेश भी दे दिया था. किसी बड़ी घटना को दबाने या उस पर पर्दा डालने की नौबत आने पर सरकार द्वारा ऐसी आधिकारिक जांच करवाना पुराना चलन है.

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सरकार ने यह कहते हुए बीजेपी और बीएसपी की सीबीआई जांच की मांग को भी ठुकरा दिया कि ऐसा करने से इस घटना के पीड़ितों को इंसाफ मिलने में देर होगी.

अभी तक पार्टी के किसी भी नेता का मथुरा का रुख न करना इस बात को साबित करता है

इन चौंकाने वाली घटनाओं के लिये बीजेपी और पुलिस अधिकारियों के एक हिस्से की आलोचनाओं से घिरी समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बेहद स्पष्ट शब्दों में विपक्ष के सभी हमलों का सामना करने का फैसला कर लिया है. उन्होंने इस घटना में किसी भी प्रकार की भागीदारी या स्थिति से निबटने में सरकार की विफलता को मानने से भी इंकार कर दिया है.

शनिवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव पर जवाहरबाग में जमीन कर कब्जा करने वालों को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया और उन्हें मथुरा की हिंसा का जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की.

समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री अंबिका चैधरी ने शाह को उनके ‘‘राज्य में घुसने पर लगे प्रतिबंध’’ की याद दिलाते हुए प्रत्युत्तर दिया और इस आधार पर उनके शिवपाल पर हमला करने के नैतिक अधिकार को चुनौती दी.

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बीजेपी ने सोमवार को मथुरा की घटनाओं के विरोध में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया और लखनऊ में राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में समाजवादी पार्टी के नेताओं के संरक्षण में जमीनों पर कब्जा करने वाले खुलेआम जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं.

अब जब सरकार बीते दो वर्षों के दौरान 280 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में कथित मिलीभगत और गंभीर प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा कर रही है, अभी तक पार्टी के किसी भी नेता का मथुरा का रुख न करना इस बात को साबित करता है.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘‘अखिलेश यादव को वहां जरूर जाना चाहिये था. आशा करते हैं कि वे एक-दो दिन में ऐसा करेंगे.’’

अब जब शिवपाल सिंह यादव पर बाबा जय गुरुदेव की करोड़ों की संपत्ति के लिये एक पंकज कुमार को उत्तराधिकारी के रूप में आगे करने के आरोप लग रहे हैं, सरकार की ओर से उसके अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

मथुरा हिंसा के मुख्य सूत्रधार रामवृक्ष यादव को संरक्षण देने का भी आरोप लगा रहे हैं

इसके अलावा कई लोग यादव परिवार के ही एक अन्य वरिष्ठ सदस्य पर मथुरा हिंसा के मुख्य सूत्रधार रामवृक्ष यादव को संरक्षण देने का भी आरोप लगा रहे हैं.

शिवपाल यादव ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि वे कभी पंकज यादव ने मिले तक नहीं हैं और उन्होंने शाह से सार्वजनिक मांगी मांगने को भी कहा.

ऐसी भी खबरें हैं कि मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी राजेश कुमार ने प्रधान सचिव गृह देबाशीष पांडा को जवाहरबाग क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ करने से पहले उपयुक्त सुरक्षा-व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु अधिक बल की मांग करते हुए पत्राचार किया था. 

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बीते वर्ष फरवरी के महीने में लिखे गए पत्र में जिलाधिकारी ने पीएसी की 12 अतिरिक्त कंपनियों के अलावा रेपिड एक्शन फोर्स और महिला आरएएफ की 5-5 कंपनियों के अलावा 1800 सिपाहियों, महिला सिपाहियों, दमकल, एंबुलेंस, क्रेन और वीडियोग्राफरों की मांग की थी.

एसएमएस भेजने और कइ बार फोन करने के बावजूद पांडा अपना पक्ष रखने सामने नहीं आए. मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पांडा की तरफ से ऐसे किसी पत्र मिलने के बारे में जानकारी होने से इंकार करते हुए कहा, ‘‘इस मामले में जांच चल रही है और आखिर में इस मामले से संबंधित तमाम तथ्य सामने आ जाएंगे.’’

First published: 7 June 2016, 22:59 IST
 
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