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मथुरा हिंसा के 'सत्याग्रहियों' का सरगना रामवृक्ष यादव कौन है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 June 2016, 19:15 IST
(पत्रिका)

मथुरा के जवाहर बाग इलाके में अवैध कब्जा हटाने के दौरान हुई हिंसा में पुलिस के दो आला अफसर शहीद हो गए. इस मामले में मास्टमाइंड के तौर पर रामवृक्ष यादव का नाम सामने आ रहा है. रामवृक्ष की हिस्ट्रीशीट काफी लंबी है.

कृष्ण की नगरी मथुरा की होली देखते ही बनती है, लेकिन गुरुवार को यहां कथित सत्याग्रहियों के सरगना रामवृक्ष यादव की अगुवाई में खून की होली खेली गई. डीजीपी जावीद अहमद का कहना है कि अगर वो जिंदा है तो पकड़ा जाएगा. 

गाजीपुर के मरदह का निवासी

रामवृक्ष यादव गाजीपुर के मरदह थाने का मूल निवासी है. रामवृक्ष 15 मार्च 2014 को करीब दो सौ लोगों के साथ मथुरा आया था. उसने प्रशासन से इलाके में रहने के लिए दो दिन की इजाजत मांगी थी. लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी वो वहां से हटा नहीं.

शुरुआत में वो जवाहर बाग इलाके में एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर रहता था. धीरे-धीरे यहां और झोपड़ियां बन गईं. इसके बाद वो 270 एकड़ की जमीन पर अवैध कब्जा करके अपनी सत्ता चलाने लगा. धीरे-धीरे वो इतना ताकतवर हो गया कि प्रशासन भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रहा था.

दो साल में 10 मुकदमे

मथुरा में 2014 से लेकर 2016 तक रामवृक्ष यादव पर 10 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. जिसमें पुलिस अधिकारयों पर हमले के अलावा सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा भी शामिल है. विजयपाल तोमर नामक एक याचिकाकर्ता जब कब्जे के खिलाफ कोर्ट गए, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे खाली करने का आदेश दिया था.

जिसके बाद मई में रामवृक्ष यादव इस आदेश के खिलाफ कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए 50 हजार का जुर्माना भी लगाया था. लगातार तीन दिन से पुलिस इस जगह को खाली करने की घोषणा कर रही थी.

इस दौरान उसने शूटरों और अपराधियों को अपने कैंप में रखना शुरू कर दिया. जहां पर ग्रेनेड, हथगोला, रायफल, कट्टे और कारतूस समेत हथियारों का जखीरा छिपाकर रखा गया था.

जय गुरुदेव का पुराना शिष्य

रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है. उसने जयगुरुदेव के विरासत के लिए भी दावेदारी की कोशिश की थी. जानकारी के मुताबिक जयगुरुदेव के निधन के बाद विरासत के लिए तीन गुटों में टकराव हुआ.

पंकज यादव और उमाकांत तिवारी के बीच टकराव के बाद पंकज यादव उत्तराधिकारी बना. वहां समर्थन न मिलने पर रामवृक्ष यादव ने अलग गुट बनाकर मथुरा के जवाहरबाग में 270 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया. 

पांच हजार लोगों का सरगना

मथुरा के जवाहर बाग में हिंसक झड़प के बाद मास्टरमाइंड माने जा रहे रामवृक्ष यादव अभी फरार बताया जा रहा है. डीजीपी जावीद अहमद ने कहा है कि उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा.

बताया जा रहा है कि भारत विधिक वैचारिक सत्याग्रही संस्था का काम गुंडागर्दी, अवैध कब्जा और आस-पास रहने वालों को सताना है. करीब तीन साल पहले रामवृक्ष यादव मथुरा आया और धरने के नाम पर अवैध कब्जा करने लगा.

कहा जाता है कि 5 हजार लोग उसके लिए काम करते थे. रामवृक्ष यादव के कहने पर ही इस पूरी झड़प को हिंसक रूप से अंजाम दिया गया. मौके से हथियारों का जखीरा जब्त हुआ है. वहीं उपद्रवियों को ये हथियार कहां से मिले इसकी पुलिस जांच कर रही है.

हैरान करने वाली बात ये कि इस संस्था ने दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के नाम पर मथुरा में अड्डा जमाया और दो साल तक जवाहर बाग में जमे रहे. मथुरा के इन सत्याग्रहियों ने एक दिन में जो सत्यानाश किया, वो पुलिस के लिए हजम करना भारी पड़ रहा है.

एमपी के सागर से आए 'सत्याग्रही'

अवैध कब्जा करने वाले ये सत्याग्रही करीब दो साल पहले मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली आए थे. अप्रैल 2014 में ये मथुरा पहुंचे थे और सरकारी जमीन पर कब्जा जमा लिया था. जिस जवाहर बाग में ये ठहरे थे, वह उद्यान विभाग का है.

इस कब्जे की वजह से विभाग को लाखों का चूना लग चुका है. यहीं नहीं एक महीने पहले ही यहां के लोगों ने तहसील सदर के अमीन चंद्रमोहन मीना और अजय प्रताप मीणा को बंधक बना लिया था. इसके साथ ही मई में पुलिस के कुछ कर्मचारियों को भी बंधक बना लिया था. तहसील परिसर में भी घुसकर कथित सत्याग्रहियों ने हंगामा किया था.

First published: 3 June 2016, 19:15 IST
 
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