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एक्सक्लूसिव: पहली बार सामने आई रामवृक्ष यादव की पत्नी और बेटी

अभिषेक श्रीवास्तव | Updated on: 13 July 2016, 19:38 IST
(कैच न्यूज)
QUICK PILL
मथुरा के जवाहरबाग कांड को महीने भर से ज्‍यादा वक्‍त बीतने के बाद स्‍वाधीन भारत विधिक सत्‍याग्रह (आज़ाद हिंद सरकार) के स्‍वयंभू मुखिया रामवृक्ष यादव उर्फ नेताजी की पत्‍नी कलावती और बेटी गुड़िया सामने आई हैं. दोनों के बयानों का एक्‍सक्‍लूसिव वीडियो कैच न्यूज़ को प्राप्‍त हुआ है.

रामवृक्ष यादव की पत्‍नी कलावती ने इलाहाबाद के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नाम दस पन्‍ने का एक विस्‍तृत ज्ञापन भी भेजा है जिसकी प्रति सिर्फ़ कैच न्यूज़ के पास है. इसकी एक प्रति उन्‍होंने दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी प्रेषित की है.

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ध्यान रहे कि गत दो जून को मथुरा का सरकारी उद्यान जवाहरबाग खाली कराने के लिए उत्‍तर प्रदेश की पुलिस और अर्धसैन्‍य बलों ने चार घंटे तक एक सुनियोजित अभियान चलाया था जिसमें प्रशासन के मुताबिक कुल 29 लोग मारे गए थे और 300 से ज्‍यादा कथित 'सत्‍याग्रहियों' को गिरफ्तार किया गया था. इस घटना में मथुरा के पुलिस अधीक्षक समेत एक थाना प्रभारी की भी मौत हुई थी.

घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि रामवृक्ष यादव की मौत हो गई है. उसकी बेटी गुड़िया जब अपने पिता की लाश मांगने प्रशासन के पास गई तो उसे यह सूचना दी गई कि उसका अंतिम संस्‍कार किया जा चुका है. यह बात गुड़िया ने अपने बयान में कही है (देखें वीडियो).

यादव का डीएनए परीक्षण करवाने की मांग

प्रशासन के इस दावे पर 16 जून को ही संदेह पैदा हो गया था जब मथुरा की एक निचली अदालत ने पुलिस से यादव की मौत का वैज्ञानिक साक्ष्‍य मांग लिया और यादव का डीएनए परीक्षण करवाने की मांग की.

उसके बाद से ही गुडि़या अपने वकील तरणी कुमार गौतम के माध्‍यम से खून का नमूना देने के लिए प्रयासरत है, लेकिन उसे अपनी जान का खतरा सता रहा है. परिवार को अपनी जान का डर इतना है कि घटना को 40 दिन बीतने के बाद भी मां-बेटी की मुलाकात रामवृक्ष के बड़े बेटे राजनारायण से अब तक नहीं हो सकी है और दोनों भागे-भागे फिर रहे हैं.

कलावती और गुड़िया अपने वकील के माध्‍यम से इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय में भेजे ज्ञापन पर दस्‍तख़त करने के लिए नौ जुलाई को गाजियाबाद आए थे जहां उनके संक्षिप्‍त वीडियो बयान दर्ज किए गए.

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कलावती ने बताया कि गाजियाबाद में रामवृक्ष का छोटा बेटा लक्‍खू डॉक्‍टरी की तैयारी करता था और उसका जवाहरबाग से कोई लेना-देना नहीं था. गुडि़या ने मथुरा जाकर अपना डीएनए का नमूना जंचवाने के लिए सुरक्षा बंदोबस्‍त की मांग की है.

कलावती ने अपने बयान में साफ़ कहा है कि दो जून को पार्क में हो रही गोलीबारी के दौरान उनके पति ने प्रशासन से गुज़ारिश की थी कि इसे बंद किया जाए और वे सरेंडर करने को तैयार हैं. उनकी बात को अनसुना कर दिया गया और गोलीबारी जारी रही जिससे भारी जानमाल का नुकसान हुआ (देखें वीडियो).

सीबीआई से निष्‍पक्ष जांच कराई जाए

इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश को 12 जुलाई को कलावती द्वारा भेजा गया ज्ञापन का पैरा 35 कहता है, ''प्रार्थियों की आर्थिक स्थिति खराब है जिस कारण से अधिवक्‍ता के माध्‍यम से याचिका दायर नहीं कर सकती है जिस कारण से प्रार्थी प्रार्थना पत्र प्रस्‍तुत कर रही है इसे ही जनहित याचिका मानते हुए सीबीआई से निष्‍पक्ष जांच कराए जाने का आदेश पारित किया जाए...''

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दस पन्‍ने के इस प्रार्थना पत्र में कलावती ने जो विस्‍फोटक बातें लिखी हैं वे पहली बार मीडिया में सामने आ रही हैं, लिहाजा उनकी अहमियत के मद्देनजर उन्‍हें बिंदुवार यहां हम दे रहे हैं:

रामवृक्ष का छोटा बेटा लक्‍खू गाजियाबाद में डॉक्‍टरी की तैयारी करता था और उसका जवाहरबाग से कोई संबंध नहीं था

1. मेरे पति व सत्‍याग्रह में भाग ले रहे 95 प्रतिशत सत्‍याग्रही साधारण गरीब परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं. मेरे पति व किसी भी सत्‍याग्रही के असामाजिक संगठनों/नक्‍सली संगठन से कभी भी संबंध नहीं रहा है. (पैरा 1)

2. उन्‍होंने जवाहरबाग मथुरा में सत्‍याग्रह करने की अनुमति जिला प्रशासन से लिखित में प्राप्‍त की थी. (पैरा 3)

3. सत्‍याग्रह करते समय एक मेमोरेंडम राष्‍ट्रपति, मुख्‍य न्‍यायाधीश सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई गवर्नर, डीएम मथुरा से लेकर उत्‍तर प्रदेश शासन सहित 29 लोकसेवकों को पंजीकृत डाक से भेजा गया था. (पैरा 4)

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4. प्रशासन ने जब जवाहरबाग की बिजली काट दी तो मेरे पति ने अपने पैसों से डीज़ल मंगाकर अपने पम्‍पसेटों से जवाहरबाग में उपलब्‍ध बोरिंग के सबमर्सिबल चलाकर पेड़-पौधे में लगातार पानी अपने सत्‍याग्रहियों से दिलवाया था. न ही कभी कोई भी पेड़ काटा गया. बदायूं से खरीदकर सोलर प्‍लांट पानी की सप्‍लाई हेतु लगवाया गया. (पैरा 13)

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजी गई याचिका

5. विजयपाल सिंह बनाम देवाशीष पंडा, जिलाधिकारी, एसएसपी की रिट याचिका संख्‍या 28807 सन 2015 में रामवृक्ष यादव व स्‍वाधीन भारत विधिक सत्‍याग्रह को पक्षकार नहीं बनाया गया था. उक्‍त रिट जवाहरबाग के संबंध में दायर की गई थी, जिस कारण रिट याचिका का आदेश इनके ऊपर लागू नहीं होता है. (पैरा 15)

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6. डीएम व एसएसपी मथुरा ने अंधाधुंध फायरिंग करवा के 500-600 सत्‍याग्रहियों को मौत के घाट उतरवा दिया. जब गोलियों से सत्‍याग्रही मरने व घायल होने लगे, तो मेरे पति ने माइक से अपील की थी कि आपने मेरे बहुत से सत्‍याग्रहियों को मार दिया है, बहुत से घायल हैं, गोली चलाना बंद करिए, मैं व मेरे सभी सत्‍याग्रही जवाहरबाग को खाली कर के जाना चाहते हैं. इसके बावजूद पुलिस ने गोलीबारी बंद नहीं की. पूरे घटनाक्रम की कैमरा से वीडियोग्राफी व रिकॉर्डिंग मेरे पति ने करवाई थी. (पैरा 16)

7. स्‍वाधीन भारत की कैंटीन में 4 लाख का सामान एवं 12 लाख रुपया नकद था. इसके अलावा संपन्‍न परिवारों के पास लैपटॉप, सोने-चांदी के आभूषण और नकद भी था. कुल मिलाकर 100 लैपटॉप थे. उपरोक्‍त सभी सामान कहां गायब हो गया.

8. मेरे पति रामवृक्ष यादव को पुलिस द्वारा एक समय फरार बताकर पकड़ने हेतु ईनाम घोषित किया गया, एक समय 11 लोगों के साथ आग में घिरकर जलकर मौत होना बताया गया, मेरे पति की शक्‍ल के व्‍यक्ति से 6 घंटा पूछताछ की गई. मेरे पति के जिंदा व मुर्दा होने की स्थिति को पुलिस ने संदेह बना दिया है. (पैरा 23)

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9. तीन दिनों तक चारों तरफ से जवाहरबाग को पुलिस फोर्स लगाकर सील कर दिया गया. इन तीन दिनों में आग के बाद शेष राख के ढेर से सत्‍याग्रहियों की हड्डियों को छनवाकर अज्ञात स्‍थान पर फेंक दिया गया. जेसीबी से खून के सबूतों को नष्‍ट कर के ज़मीन को समतल कर के पानी से सिंचाई कर दी गई. मथुरा की सांसद हेमामालिनी को भी जवाहरबाग में घुसने की अनुमति नहीं दी गई. (पैरा 29)

10. न्‍यायिक जांच आयोग के अध्‍यक्ष सरकार के खास हैं, इसके अलावा उनके सचिव मथुरा में जिला जज रह चुके हैं और उनकी पत्‍नी अपर आयुक्‍त के पद पर आगरा में तैनात. आयोग के अध्‍यक्ष आज तक घायलों व पीड़ितों से अस्‍पताल व जेल में नहीं मिले हैं. वे पहले से तय रिपोर्ट सरकार को देंगे.

First published: 13 July 2016, 19:38 IST
 
अभिषेक श्रीवास्तव @abhishekgroo

स्‍वतंत्र पत्रकार हैं. लंबे समय से देशभर में चल रही ज़मीन की लड़ाइयों पर करीबी निगाह रखे हुए हैं. दस साल तक कई मीडिया प्रतिष्‍ठानों में नौकरी करने के बाद बीते चार साल से संकटग्रस्‍तइलाकों से स्‍वतंत्र फील्‍डरिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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