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मायावती ने स्मृति को उनके ही व्यूह में फंसाया, पूछा क्या अपना शीश कटाएंगी?

पाणिनि आनंद | Updated on: 27 February 2016, 12:34 IST

लोकसभा में अपने भाषण से स्मृति ईरानी को जबर्दस्त लोकप्रियता और राजनीतिक फायदा मिला. उनकी नाटकीय और जज्बाती हमले को उनकी पार्टी, उनके समर्थकों और उनकी तरह की सोच रखने वाले लोगों ने खूब पसंद किया. एक लिहाज से यह सदन के भीतर से आम जनता को किया गया संबोधन था, न कि ऐसा उत्तर जैसा सरकार के मंत्री से उम्मीद रखी जाती है.

मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 24 और 25 फरवरी को संसद के दोनों सदनों में जो बयान दिए, उनमें विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों के स्पष्ट और क्रमबद्ध जवाबों की कमी साफ झलक रही थी.

24 फरवरी को जब राज्यसभा में रोहित वेमुला का मामला उठाया गया, स्मृति ईरानी ने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती को कहा, “मायावती जी, मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं. मैं आपकी मांग सुबह से सुन रही हूं और यदि आप मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो मैं अपना शीश काटकर आपके चरणों में रख दूंगी.”

स्मृति का भाषण एक लिहाज से सदन के भीतर से आम जनता को किया गया संबोधन था

यह सब तब हुआ जब मायावती और उनके सांसद मंत्री ईरानी से इस सवाल का जवाब मांग रहे थे कि हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी में हुए रोहित वेमुला आत्महत्या प्रकरण में गठित जांच आयोग में सरकार दलित सदस्य को शामिल करना चाहती है या नहीं? इसका जवाब न मिलने के कारण सदन नहीं चला.

मायावती ने कहा, “हम चर्चा को नहीं रोक रहे हैं. हम चर्चा और मंत्री से जवाब मांग रहे हैं. सिर्फ हां या ना में जवाब दीजिए. आप इन्क्वायरी पैनल में दलित सदस्य को जोड़ेंगे या नहीं?”

घंटों लंबी बहस के बाद भी मानव संसाधन विकास मंत्री इस सवाल का कोई जवाब देने से बचती रहीं. बाद में, सदन के दोपहर बाद के सत्र में वे लोकसभा चली गईं और रोहित आत्महत्या प्रकरण एवं जेएनयू प्रकरण पर बहुत आक्रामक और जज्बाती भाषण दिया.

25 फरवरी को मानव संसाधन विकास मंत्री के लिए संसद के ऊपरी सदन को इस मुद्दे पर जवाब देने का समय था. यहां उनका भाषण एक बार फिर बहुत-सी चीजों के इर्द-गिर्द घूमता रहा और मूल सवाल का जवाब नहीं मिला. भाषण व्यक्तिगत हमलों, वामपंथी दलों पर आक्रमण और कई अन्य घटनाओं के संदर्भ से भरा था, जिनका सीधे तौर पर जेएनयू और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं था.

विपक्षी नेताओं द्वारा उनके भाषण की आलोचना की गई और आखिरकार सदन को अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया गया. इसी मुद्दे पर 26 फरवरी को भी बहस जारी रही. अपने भाषण में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि मंत्री द्वारा उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया गया है. इसी तरह के आरोप विपक्ष के अन्य नेताओं द्वारा भी लगाए गए.

स्मृति से इतर, मायावती का भाषण पूरी तरह तथ्यों और आंकड़ों से भरपूर था

स्मृति से इतर, मायावती का भाषण पूरी तरह तथ्यों और आंकड़ों से भरपूर था. उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए और रोहित वेमुला आत्महत्या मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए.

व्याकुल मंत्री सदन में मायावती को बीच-बीच में टोक रही थीं तब मायावती ने कहा, “24 फरवरी को मंत्री ने कहा था कि यदि बसपा सुप्रीमो उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुईं तो वे (स्मृति) अपना कटा हुआ शीश मेरे चरणों में रख देंगी.”

मायावती ने पूछा, “मैं आपको इस वचन के बारे में याद दिला रही हूं. क्या अब आप अपना वचन निभाएंगी?

बसपा नेत्री ने याद दिलाया कि रोहित के परिवार को कोई नौकरी या मुआवजा नहीं दिया गया है. यहां तक कि मंत्री के सीएमओ और अन्य चिकित्सा गतिविधियों के संबंध में दिए गए जवाब भी झूठे थे.

कह सकते हैं कि स्मृति ईरानी और मायावती के दंगल में मायावती बीस छूटीं

मायावती के तर्कों से घिरी हुई ईरानी ने यहां से नई रणनीति अपनायी. उन्होंने कहा, “मैं बसपा कार्यकर्ताओं से निवेदन करती हूं कि अगर हिम्मत है तो वे आएं और मेरा शीश काटकर ले जाएं दें.”

24 फरवरी को सारा ध्यान स्मृति ईरानी ने ही खींच लिया था. इसी कारण सदन में विपक्ष उनको कोई जवाब नहीं दे पाया. लेकिन मंत्री ने जिन तथ्याें और आंकड़ों का ढेर लगा दिया था, ऊपरी सदन में विपक्ष ने उन जवाबों को तार-तार कर दिया.

कह सकते हैं कि स्मृति ईरानी और मायावती के दंगल में मायावती बीस छूटीं.

First published: 27 February 2016, 12:34 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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