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मोदी, मुलायम और मीडिया पर खुले मायावती की तोप के मुहाने

आवेश तिवारी | Updated on: 29 August 2016, 7:41 IST
(फाइल फोटो)

यह बसपा सुप्रीमो मायावती का बदला हुआ रूप है. पिछले हफ्ते आगरा में हुंकार भरने के बाद इस रविवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के निर्वाचन क्षेत्र आजगमढ़ में रैली की. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में मुख्यमंत्री पद की लोकप्रिय उम्मीदवार के तौर पर उभरी मायावती के लिए ज्योतिबा फुले, बाबा साहब भीम राव आंबेडकर और संत रविदास अब सिर्फ दलित अस्मिता के प्रतीक नहीं बल्कि सर्वजन हिताय की संकल्पना देने वाले नायक हैं.

उनका मानना है कि गरीब सवर्णों और अल्पसंख्यकों को तत्काल आरक्षण मिलना चाहिए. यह मायावती की राजनीति में आया बड़ा बदलाव है. गरीब सवर्ण और अल्पसंख्यक आरक्षण के साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने विरोधियों को चक्कर में डाल दिया है विशेषकर समाजवादी पार्टी और भाजपा को.

सपा ने पिछले चुनाव से पहले ही अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने की वकालत की थी लेकिन आज तक ऐसा हो नही सका है. दूरी तरफ गरीब सवर्ण हैं जिन्हें आरक्षण देने की हिमायत करके मायावती ने भाजपा के पाले से उन्हें अपनी तरफ खींचने की कोशिश भी की है.

मायावती को पब्लिक मीटिंग कर घेर रही हैं स्वाति

आरक्षण को लेकर मायावती का मौजूदा रुख निजी क्षेत्र के विरुद्ध खिलाफ जाता है क्योंकि वह आरक्षण लागू नहीं करना चाहता. कांग्रेस पर नरम लहजे में हमले की शुरुआत करते हुए भाजपा और सपा तक पहुंचते-पहुंचते मायावती तेवर निरंतर तल्ख होते गए. हमेशा की तरह मायावती ने मीडिया के एक वर्ग को भी खुलेआम दलित विरोधी ठहराया.

आजमगढ़ में माया का रण

आजमगढ़ में रविवार को हुई बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली कई दृष्टि से महत्वपूर्ण थी. सपा में नंबर दो की हैसियत रखने वाले शिवपाल सिंह यादव कुछ ही घंटों पहले आजमगढ़ से कुछ दूर बनारस की यात्रा करके वापस लौटे थे. वही राज्य भर के भाजपा नेताओं की टीम पूर्वांचल में कैम्प कर रही है.

मायावती जब मंच पर पहुंची, उस वक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस पिछड़े हुए शहर का तापमान 34 डिग्री के आस पास चढ़ा हुआ था, माहौल में उमस का स्तर 66 फीसदी और हवा की गति 3 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. चूकि उमस बहुत ज्यादा थी इसलिए मायावती को सुनने वाली भीड़ में लोग हाथ से बने बांस के पंखे भी लाये थे.

जितनी आबादी रैली के मैदान में थी उससे तीन गुना आबादी मैदान के बाहर खड़ी रही, मैदान में भी लोग खड़े ही रह गए क्योंकि बैठने की भी जगह बची नहीं थी.

सवर्ण आरक्षण पर मुलायम बोल

भाषण की शुरुआत करते हुए मायावती सबसे पहले भीड़ की ताकत की खुदबयानी करती हैं. अगले ही लाइन में वो मुलायम सिंह पर निशाना साध लेती है. उन्होंने कहा, 'मुलायम सिंह के लिए यह मैदान बड़ा है, बसपा के लिए छोटा है.'

उनका हमला कांग्रेस पर होता है, सवर्णों को आरक्षण देने के कांग्रेस नेताओं के हालिया बयानों को आड़े हाथों लेते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा, 'अरे आरक्षण देना होता तो इतने साल सरकार थी तभी दे दिया होता.' उनके निशाने पर शीला दीक्षित भी रहीं जिन्हें मायावती ने बुजुर्ग महिला कह कर संबोधित किया. 

मायावती भीड़ से कहती हैं यह वो नेता हैं जिन्होंने एक बार दिल्ली में गंदगी के लिए यूपी-बिहार वालों को जिम्मेदार ठहराया था, अब वो खुद यहां से चुनाव लड़ने जा रही है.

बढ़ रहा है मायावती की निगाहों का दायरा

अपने चिर प्रतिद्वंदी सपा के खिलाफ मायावती के तीखे हमलो की कड़ी आगे भाजपा के खिलाफ भी जारी रहती है. उन्हें संभवतः विश्वास है कि उनकी असली लड़ाई भाजपा से होने जा रही है या फिर उन्हें लगता है कि कमजोर सपा से कमजोर भाजपा ज्यादा खतरनाक है.

हाल के दिनों में बसपा छोड़कर भाजपा में गए कुछ नेताओं के बारे में मायावती ने कहा, 'भाजपा हमारे रिजेक्टेड माल के पीछे पड़ी है.'

उन्होंने कहा, 'अच्छे दिनों के सपने बुरे दिनों के सपने में तब्दील होने लगे है. बताओ आप लोग क्या सरकार ने एक भी पक्का मकान बनवाकर आपको दिया है?' पूरे भाषण में मायावती खुल कर राज्य और केंद्र की सरकार से सवाल करती रहीं और जवाब भी खुद ही देती रहीं.

उन्होंने कहा, 'मुझे जहां तक लगता है नहीं दिया है.' उन्होंने केंद्र सरकार की रोजगार नीति और भूमि अधिग्रहण कानून लागू करने की कोशिशों पर भी हमला बोला. आश्चर्यजनक ढंग से अब वो अपने विचारों का दायरा भी बढ़ा रही हैं. मसलन उन्होंने जनता से सतर्क रहने को कहा क्योंकि उन्हें इस बात का अंदेशा है कि यह सरकार चुनाव से पूर्व युद्ध भी करा सकती है.

मीडिया को भी बताया दलित विरोधी

मायावती की नजर में सपा और भाजपा के साथ-साथ मीडिया का एक हिस्सा भी दलित विरोधी मानसिकता से ग्रस्त है. वो कहती है कि मीडिया का एक वर्ग जानबूझ कर दलित हितों से जुड़े मामलों में गलतबयानी करता है. आधा-अधूरा सच दिखाता है. उन्होंंने मीडिया से सवाल किया, 'हमारे बारे में कहा जाता है कि हम टिकट बेच रहे हैं फिर कहा जाता है लोग बसपा छोड़कर जा रहे हैं, यह दोनों बातें कैसे हो सकती हैं?'

मायावती, दयाशंकर प्रकरण से आहत हैं और उन्हें पता है कि ऐसे मामलों पर तात्कालिक प्रतिक्रिया से नुकसान हो सकता है सो मायावती जनता को खामोश रहने और अपनी बारी आने का इन्तजार करने को भी कहती हैं.

First published: 29 August 2016, 7:41 IST
 
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