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एमसीजीएम चुनाव: भाजपा ने शिव सेना के दावों की हवा निकाल दी

अश्विन अघोर | Updated on: 24 February 2017, 9:46 IST

 


देश के सबसे संपन्न नगर निकाय के चुनाव हो चुके हैं. और नतीजा सामने है- बृहन्मुंबई महानगरपालिका (एमसीजीएम) का त्रिशंकु सदन. किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. महाराष्ट्र के राजनीतिक खेल का भविष्य उसके नतीजे पर निर्भर था. इतना कि राज्य सरकार की नियति भविष्य में लटकी हुई थी, जैसाकि शिव सेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा था. उन्होंने कहा था कि वह नोटिस पीरियड में थी, जो बाद में ‘वेंटीलेटर’ पर रख दी गई.


लगता है, एमसीजीएम चुनाव के नतीजों ने राज्य सरकार को अशांति के दौर से बाहर निकाल दिया है. नतीजे ‘स्लो बट स्टेडी विंस द रेस’ का श्रेष्ठ उदाहरण है. एमसीजीएम की 227 सीटों में शिव सेना ने 84, भाजपा ने 81, कांग्रेस ने 31, नेशनल कांग्रेस पार्टी ने 9, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 7, स्वतंत्र और अन्यों ने 14 सीटें जीतीं. अगर भाजपा की मुंबई शहर की इकाई के अध्यक्ष और विधायक आशीष शेलार के दावे पर यकीन करें, तो चार और स्वतंत्र सीटें भाजपा के समर्थन में आ गई हैं. इससे भाजपा की सीटें 85 हो जाती हैं, जो शिव सेना से 1 ज्यादा है.

 

बड़े दावे


शिव सेना नेतृत्व के बड़े दावे धरे रह गए. शिव सेना ने मुंबई को हमेशा अपना बताया है. एमसीजीएम के पूरे कैंपेन में, 16 जनवरी को जबसे उद्धव ठाकरे ने भाजपा से अलग होने की घोषणा की थी, उन्होंने मुंबई और मराठी मानुषों के लिए शिव सैनिकों के त्याग और बलिदान की याद दिलाई. उन्होंने मुंबई में 2005 की बाढ़, 2008 के आतंकी हमले और अन्य प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं के दौरान शिव सैनिकों के कामों की लंबी फेहरिस्त गिनाई.


मुंबई वालों से भाजपा को हराने की अपील की, दावा करते हुए कि शिव सेना को ढाई दशकों के गठबंधन में नुकसान हुआ है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि शिव सेना भविष्य में किसी भी राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी. अपने शब्दों पर कायम रहने के लिए उद्धव ठाकरे ने अलग हुए अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के गठबंधन का प्रस्ताव ठुकरा दिया था. वे पार्टी काडर और मतदाता को बताना चाहते थे कि शिव सेना में एमसीजीएम के चुनाव अपने दम पर जीतने की क्षमता है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार नोटिस पीरियड में थी और जब भी वे चाहेंगे, उसे किसी भी समय गिरा सकते हैं. इसके मद्देनजर शिव सेना मंत्रियों ने घोषणा की कि वे अपनी जेबों में इस्तीफे रखते हैं और जब भी उनके नेता आदेश करेंगे, वे किसी भी क्षण सरकार छोड़ देंगे.

 

गठबंधन ही एकमात्र विकल्प

 

मतदाता और मराठी मानुषों से भावात्मक अपील, पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल और मुंबई में गुजराती समुदाय के कई आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावी नेताओं को अपने साथ लेने की दीवानगी के हद तक की कोशिशों के बावजूद लगता है कि उद्धव ठाकरे बहुमत जीतने में विफल रहे. अब यदि शिव सेना एमसीजीएम पर शासन करना चाहती है, तो उसे किसी राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़ेगा.


‘यह उद्धव के लिए बहुत ज्यादा अपमानजनक होगा, जो बड़े दावे करने से पहले दो बार नहीं सोचते,’ यह कहना है, अनुभवी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक गणेश तोर्सेकर का. वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे कहते हैं, ‘शिव सेना और भाजपा की जीती हुई सीटों को देखकर लगता है कि वे चुनाव के बाद गठबंधन कर सकते हैं, जो दोनों पार्टियों के लिए स्वाभाविक विकल्प है.’

 

114 का मैजिक अंक नहीं छू पाई


शिव सेना को गिरगांव और दक्षिण मुंबई के अन्य हिस्सों में बहुमत मिला, जबकि भाजपा का उपनगरों, खासकर गुजराती वर्चस्व वाले पश्चिमी उपनगरों में वर्चस्व रहा. हालांकि शिव सेना की सीटों की संख्या में 9 की वृद्धि हुई है, पर सत्ता में आने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. भाजपा की सीटें पिछले सदन से 50 बढ़ीं. भाजपा शिव सेना से आगे रहने में विफल रही, पर राज्य के अन्य हिस्सों में विजेता के रूप में उभरी है. वह राज्य में नंबर वन पार्टी के रूप में उभरी है. शिव सेना और भाजपा के बड़े दावे धरे रह गए. एमसीजीएम में दोनों में से कोई भी पार्टी सत्ता में आने की स्थिति में नहीं है.


हालांकि शिव सेना एमसीजीएम में 114 के मैजिक अंक तक नहीं पहुंच पाई, पर नगर निकाय के चुनावी नतीजों ने तय कर दिया है कि फिलहाल राज्य सरकार सुरक्षित है. भाजपा को मुंबई और थाने छोड़कर राज्य में शानदार जीत मिली है, इसलिए शिव सेना सरकार से बाहर नहीं निकलेगी, जैसाकि कयास था.

हालांकि भाजपा मैजिक अंक तक नहीं पहुंच पाई, जैसाकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने दावा किया था, उसे मुंबई में काफी अच्छी सीटें हासिल हुई हैं. भाजपा विधायक और प्रवक्ता राम कदम ने कहा, ‘हम नतीजों को क्वांटम उछाल मानते हैं. हमने 130 फीसदी बढ़त की है, जबकि शिव सेना की काफी कम ग्रोथ हुई है. मैं सोचता हूं कि मुंबई में यह भाजपा की महत्वपूर्ण जीत है. 31 से 81 तक पहुंचना भारी जीत से कम नहीं है.’

 

एमएनएस से विवाद के कारण नुकसान


तोर्सेकर ने कहा, ‘भाजपा को लाभ मिला क्योंकि कांग्रेस के मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया. शिव सेना अपनी क्षमताओं के अनुरूप भी नहीं पा सकी. शिव सेना नेताओं के नासमझ दावे उत्तेजना फैलानी वाली पार्टी के लिए घातक सिद्ध हुए. वह अपने दम पर 114 सीटें जीत सकती थी, फिर भी नहीं जीत पाई. एमएनएस के साथ अपने विवाद के कारण शिव सेना को भारी नुकसान हुआ. यह स्थिति दरअसल भाजपा के लिए फायदे की हो गई.


उद्धव की जो सबसे बड़ी गलती थी, वह थी उन्होने अपने दुशमन बना लिए थे, जो एक अनुभवी राजनेता होने का संकेत नहीं है.’ शिव सेना के इस दावे पर कि राज्य सरकार नोटिस पीरियड पर थी, तोर्सेकर ने कहा, ‘शिव सेना इस मुकाम पर सरकार नहीं छोड़ सकती. यदि ऐसा करती है, तो यह बड़ी भारी भूल होगी. एमसीजीएम के नतीजों से भविष्य में राजनीति की दिशा बदल जाएगी. अब से शिव सेना और भाजपा में सीधी टक्कर रहेगी.

कांग्रेस और एनसीपी बेकार हो गई हैं. जबर्दस्त मतभेद से कांग्रेस ने मुंबई और महाराष्ट्र में अपने लिए कब्र खोद ली है और एनसीपी चूंकि वन मैन पार्टी है, शरद पवार से इतर नहीं देख सकती. और वे अपनी उम्र और सेहत के कारण पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं कर सकते.’


महाराष्ट्र में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा, ‘हमें गठबंधन में 60 सीटें भी नहीं दी गई थीं. हमारा बेहद मजाक बनाया गया था. अब हमारा प्रदर्शन ही शिव सेना के सभी बड़े दावों का सटीक जवाब है. हम पिछले 25 सालों से 60 से ज्यादा सीटों पर खड़े नहीं हुए. इस बार 227 उम्मीदवार थे और हमने 81 सीटें जीतीं. हमने अपनी क्षमता सिद्ध कर दी है.’

 

First published: 24 February 2017, 9:41 IST
 
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