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क्या अगले उपराष्ट्रपति के लिए मोदी की पसंद हुकुम देव नारायण यादव हैं?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  • मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 2017 में समाप्त होगा और ऐसा लगता है कि एनडीए सरकार ने अगले उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार को चुन लिया है.
  • हुकुमदेव नारायण यादव बिहार के मधुबनी से सांसद हैं और वह पांचवीं बार लगातार लोकसभा पहुंचे हैं. यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं और उन्हें उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी ओबीसी मतदाताओं को एक संदेश देने की कोशिश करेगी.

मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 2017 में समाप्त होगा और ऐसा लगता है कि एनडीए सरकार ने अगले उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार को चुन लिया है. सूत्रों ने कैच को बताया कि बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री हुकुम देव नारायण यादव को देश का अगला उपराष्ट्रपति बनाने पर विचार चल रहा है.

यादव बिहार के मधुबनी से सांसद हैं और वह पांचवीं बार लगातार लोकसभा पहुंचे हैं. यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं और उन्हें उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी ओबीसी मतदाताओं को एक संदेश देने की कोशिश करेगी. 

दूसरा यादव बीजेपी और आरएसएस की राजनीति में समाजवादी हैं जिनके राजनीतिक करियर की शुरुआत 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से हुई. उन्हें राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसे समाजवादी नेताओं के समर्थकों में माना जाता रहा है.

समाजवादी, ओबीसी और मोदी का प्रशंसक

समाजवादी पृष्ठभूमि के नेता को उपराष्ट्रपति बनाए जाने का मकसद एनडीए सरकार की गरीब हितैषी छवि को मजबूत करने की रणनीति है. तीसरा कारण यादव का वह जबरदस्त भाषण है जो उन्होंने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में दिया था.

अपने इस भाषण में यादव ने मणि शंकर अय्यर के चाय वाला बयान पर निशाना साधा था.

ग्राम प्रधान से शुरू हुई यादव की राजनीतिक यात्रा शानदार रही है. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से होते हुए वह सोशलिस्ट पार्टी में पहुंचे और फिर  भारतीय लोक दल. इसके बाद वह तत्कालीन जनता पार्टी में रहे जो बाद में जनता दल बनी. वह पहली बार 1990 में मंत्री बने और उन्हें टेक्सटाइल्स और फूूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी दी गई. हालांकि चंद्रशेखर की सरकार कुछ ही दिनों तक बनी रही.

यादव 1993 में बीजेपी में शामिल हुए. हालांकि कहा जाता है कि वह 1950 से लगातार शाखा जाते रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने कई अहम मंत्रायल संभाले. मौजूदा लोकसभा में वह चेयरपर्सन पैनल के हेेड हैं.

क्या जाति जनगणना पर अपने रुख के कारण जाने जाएंगे यादव?

यादव मोदी के जबरदस्त प्रशंसक रहे हैं. पांच बार सांसद रहे यादव बीजेपी में एकमात्र वैसे बीजेपी नेता हैं जिन्होंने एनडीए सरकार के जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को जारी नहीं किए जाने के फैसले का विरोध किया.

यादव ने 2015 में कैच से कहा था वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन आंकड़ों को जारी करने के लिए कहेंगे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि ओबीसी को उसकी बढ़ती ताकत का एहसास हो.

अंसारी की विरासत

अंसारी बतौर उपराष्ट्रपति दूसरे कार्यकाल में है. हालांकि भारत का संविधान उन्हें फिर से उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनने से नहीं रोकता है लेकिन मोदी सरकार की तरफ से उन्हें फिर से इस पद का उम्मीदवार बनाए जाने की संभाावना कम ही है. 

दोनों ही कार्यकाल में वह कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए सरकार के उम्मीदवार रहे. बीजेपी नेतृृत्व वाले एनडीए ने उनके खिलाफ जसवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया था जो 252 वोटों से चुनाव हार गए थे.

इन सालों में अंसारी को वैसे व्यक्ति के तौर पर देखा गया जो बहुसंख्यकवादी शक्तियों के उभार के बावजूद संवैधानिक मूल्यों की हिफाजत में जुटा हुआ था. राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर उन्होंने सख्त अनुशासन का पालन कराया. हालांकि उनके करियर पर एक धब्बा भी है जब उन्होंने लोकपाल बिल पर बहस के दौरान दिसंबर 2011 में सदन को अचानक ही अनिश्चितकाल केे लिए स्थगित कर दिया था.

अंसारी ने राज्यसभा के टीवी चैनल राज्यसभा टीवी की शुरुआत कराई. राज्यसभा टीवी ने कई बार दूरदर्शन पर चल रहे सरकारी प्रचार का भंडाफोड़ किया.

वास्तव में पिछले दो सालों के दौरान चैनल ने लोकसभा चैनल और अन्य चैनलों के मुकाबले अपनी अलग पहचान बनाई है. अंसारी के बाहर होने और बीजेपी के सदस्य के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राज्यसभा टीवी में भी कई बदलाव होने की संभावना बढ़ गई है.

अन्य दावेदार

उप राष्ट्रपति के अन्य दावेदारों में बंगाल के गवर्नर और बीजेपी के वरिष्ठ नेता केसरी नाथ त्रिपाठी का भी नाम सामने आ रहा है. त्रिपाठी उत्तर प्रदेश विधानसभा में स्पीकर रह चुके हैं. सियासी हलकों में यह बात भी चल रही है कि एनडीए ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को एनडीए का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का वादा किया है.

अगर पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव राष्ट्रपति बनने में सफल रहते हैं तो फिर उप राष्ट्रपति के पद पर दूसरे यादव को बिठाना संभव ही नहीं होगा. हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव यह तय करेगा कि मुलायम सिंह इस ऑफर को स्वीकारते हैं या नहीं.

इस बीच राष्ट्रपति भवन के दावेदार को लेकर अन्य नामों पर भी चर्चा चल रही है. इनमें लाल कृष्ण आडवाणी, सुमित्रा महाजन और मणिपुर की मौजूदा गवर्नर नजमा हेपतुल्ला का नाम शामिल है.

First published: 8 September 2016, 7:43 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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