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महाराष्ट्र का महापैकेज: क्या इससे किसानों की आत्महत्या रुकेगी?

अश्विन अघोर | Updated on: 19 December 2015, 7:32 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र सरकार ने कर्ज से आत्महत्या कर रहे किसानों के लिए 10,512 करोड़ के पैकेज की घोषणा की है. यह अब तक का सबसे बड़ा पैकेज है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों के बीच इसकी सफलता-असफलता को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है.
  • साल 2008 में केंद्र की यूपीए और राज्य की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने भी 7,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफी की घोषणा की थी. इसके बावजूद किसनों की आत्महत्या दर में कोई कमी नहीं आई.

महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए अब तक के सबसे बड़े पैकेज की घोषणा की है. पिछले चार सालों से महाराष्ट्र के किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने बुधवार को राज्य विधानसभा में 10,512 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की. पिछले सभी पैकेज से इस बार का मामला इसलिए अलग है कि  इससे किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद जगी है न कि वित्तीय संस्थानों को. लगातार पड़ने वाले सूखे की वजह से महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा के किसान कर्ज में बुरी तरह से डूबे हुए हैं. इन इलाकों के किसानों ने महाजनों और बैंकों से भारी कर्ज ले रखा है. कर्ज लौटाने के तगादे से तंग आकर हजारों की संख्या में किसान खुदकुशी कर चुके हैं. किसानों की आत्महत्या को लेकर महाराष्ट्र सरकार चौतरफा आलोचनाओं  से घिरी रही है.

पैकेज

  • पैकेज में कृषि और सिंचाई में निवेश को प्रोत्साहित किए जाने के संकेत मिले हैं. 
  • पैकेज में 15,747 सूखा प्रभावित गांवों के 53.19 लाख किसानों को शामिल किया गया है.
  • 10,512 करोड़ रुपये में से किसानों को सीधे 7,412 करोड़ रुपये की रकम दी जाएगी. यह रकम उन्हें सेविंग सर्टिफिकेट के तौर पर मुहैया कराई जाएगी.
  • बाकी की रकम अनुदान और छूट के तौर पर मुहैया कराई जाएगी.
  • 250 करोड़ रुपये की रकम तलाबों के निर्माण में लगाई जाएगी जबकि 100 करोड़ रुपये की रकम धान की खरीद के लिए रखी गई है.
  • राज्य सरकार फिलहाल कृषि पंपों को चलाने में इस्तेमाल होने वाली बिजली बिल पर 33.5 पर्सेंट की छूट दे रही है. इसका सीधा मतलब यह है कि 19.45 लाख किसानों को सीधे 353 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी.
  • किसानों के बच्चों के स्कूली की फीस माफ की जाएगी. इससे 9.5 लाख किसान के बच्चों को फायदा होगा. इस योजना से किसानों के परिवार 40 करोड़ रुपया बचा पाएंगे.
  • 100 करोड़ रुपये की रकम जलायुक्त शिवार अभियान के लिए आवंटित की गई है.
  • पानी के पंपों को बिजली आपूर्ति करने के लिए सरकार ने 1000 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर फंड आवंटित किया है.
  • सभी किसानों को गोपीनाथ मुंडे फार्मर्स एक्सिडेंट इंश्योरेंस स्कीम के दायरे में लाया जाएगा. इस योजना के तहत उन्हें दोगुना मुआवजा यानी 2 लाख रुपए दिए जाएंगे.
  • विपक्षी दलों के साथ बीजेपी के सहयोगी दल भी किसानों के कर्ज को माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं

कर्ज माफी

 

विपक्षी दल राज्य के किसानों के कर्ज को माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सरकार पर जबरदस्त हमला किया. सरकार को न केवल विपक्षी दलों से बल्कि अपनी सहयोगी पार्टी शिव सेना और स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. दोनों पार्टियां कर्ज माफी किए जाने की मांग कर रही हैं.

सरकार का मानना है कि कर्ज माफी से कोई समाधान नहीं निकलेगा बल्कि इससे समस्या और बढ़ेगी

सरकार का कहना है कि कर्ज माफी से बड़े किसानों और वित्तीय संस्थानों को ही फायदा होगा. इस बात को लेकर विधानसभा में जबरदस्त बहस हुई और फिर फडनवीस सरकार ने पैकेज की घोषणा की.

कांग्रेस और एनसीपी ने इस पैकेज की आलोचना की है. विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा, 'सरकार का दावा है कि उसने किसानों की स्थिति में सुधार के लिए पिछले एक साल में कई कदम उठाए हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि किसानों की आत्महत्या की संख्या ऐतिहासिक है. सरकार जनता से पूरी तरह से कट चुकी है. यह सभी बात जानते हुए कर्ज माफ नहीं किया जाना कुछ नहीं बस धोखा है.'

लेकिन फडनवीस ने इस तर्क को खारिज करने के लिए कुछ तर्क दिए. उन्होंने कहा कि 2008 में केंद्र की यूपीए और राज्य की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने 7,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफी की घोषणा की. किसानों के नाम पर यह सभी पैसा वित्तीय संस्थानों को दिया गया लेकिन यह कभी उन लोगों तक पहुंच ही नहीं पाया.

सरकार का कहना है कि यूपीए सरकार में  7000 करोड़ रुपये की कर्ज माफी के बावजूद किसानों की आत्महत्या नहीं रुकी

फडनवीस ने कहा, 'इस बार हमने जिस पैकेज की घोषणा की है वह सीधे किसानों तक पहुंचेगा.' उन्होंने कहा, 'इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि कर्ज माफ किए जाने से किसानों की आत्महत्या में कमी आती है. कांग्रेस-एनसीपी के शासनकाल में 2006-2008 के बीच कर्ज माफ किए जाने के बावजूद कुल 1,068 किसानों ने आत्महत्या की. पिछले चार सालों के सूखे के बावजूद राज्य में कुल 1060 किसानों ने आत्महत्या की जबकि 2006 में ही सिर्फ 1449 किसानों ने खुदकुशी की.'

फडनवीस ने कहा कि वित्तीय संस्थानों की चूक को ठीक कर लिया गया है ताकि सही लोगों तक राहत पहुंचाई जा सके. इसलिए इस बार लोकप्रिय पैकेज के बदले सरकार ने बिजली और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिए कई फैसले किए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने क्रेडिट स्कीम की जद में किसानों को लाने के लिए कई उपाय किए हैं. उन्होंने कहा, 'इससे उन्हें बैंकों से लोन लेने में मदद मिलेगी. उन्हें महाजनों से अधिक ब्याज पर कर्ज नहीं लेना होगा. अब उन्हें कर्ज चुकाने के तनाव से भी मुक्ति मिलेगी.'

First published: 19 December 2015, 7:32 IST
 
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