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जम्मू-कश्मीर: महबूबा मुफ्ती की ताजपोशी तय

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2016, 13:12 IST

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सूबे के सियासी इतिहास में पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी. इसकी औपचारिक पहल गुरुवार को पीडीपी के विधायकों की बैठक में महबूबा को विधायक दल का नेता चुने जाने से हुई. इस मामले में महबूबा आज राज्यपाल एनएन बोहरा से मुलाकात करेंगी.

इस तरह महबूबा पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के जरिए राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. महबूबा वर्तमान में दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग संसदीय क्षेत्र से लोकसभा की सदस्य हैं.

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इससे पूर्व उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद राज्य के मुख्यमंत्री थे, जिनका जनवरी में नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था. उसके बाद पीडीपी-बीजेपी में आपसी सामंजस्य नहीं हो पाने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था.

जम्मू-कश्मीर की अगली मुख्यमंत्री बनने वाली महबूबा मुफ्ती ने साल 1996 में कांग्रेस का साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया. 56 साल की महबूबा लॉ ग्रेजुएट हैं. उन्होंने राजनीति में उस समय कदम रखा, जब जम्मू-कश्मीर छद्म आतंकवाद की चपेट में था. दो बेटियों की मां महबूबा कांग्रेस के टिकट पर साल 1996 में पहली बार बीजबेहरा से विधानसभा चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंची.

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कश्मीर घाटी में अमन और शांति के लिए महबूबा ने अपने मरहूम पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर काम किया. इसके बाद पिता-पुत्री की इस जोड़ी ने साल 1999 में कांग्रेस से अलग होकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का गठन किया.

मुफ्ती मोहम्मद सईद की नवगठित पार्टी को कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के असंतुष्ट नेताओं का भी भारी समर्थन मिला. सईद ने कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक जीवन के लगभग छह दशक गुजारे.

पीडीपी ने पार्टी के झंडे के लिए हरा रंग चुना और साल 1987 के मुस्लिम युनाइटेड फ्रंट के चिन्ह कलम-दवात को पार्टी के चुनाव चिन्ह के तौर पर स्वीकार किया.

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साल 2004 में महबूबा ने अपना पहला लोकसभा चुनाव दक्षिण कश्मीर से जीता. इससे पहले साल 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें श्रीनगर से उमर अब्दुल्ला ने हराया था.

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लगभग दो महीने के राजनीतिक गतिरोध के बीच पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के बीच राज्य का प्रशासन किस तरह चलता है.

First published: 25 March 2016, 13:12 IST
 
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