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महबूबा को ताज और पीडीपी के बुजुर्गों की असहजता

गौहर गिलानी | Updated on: 10 January 2016, 1:18 IST
QUICK PILL
  • संविधान के जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों की सलाह के बावजूद महबूबा मुफ्ती 10 जनवरी को होने वाले चहारून की धार्मिक प्रक्रिया से पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को तैयार नहीं हैं.
  • महबूबा की कैबिनेट की बनावट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महबूबा पुराने मंत्रियों को हटाकर सरकार में नए लोगों को मं­त्री बनाएंगी.

मुफ्ती सईद की मृत्यु के तत्काल बाद उनकी विरासत संभाले जाने में खास रुचि नहीं दिखाकर महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में अनिश्चितताओं को हवा दी है. महबूबा मुफ्ती अपने पिता की मृत्यु के तत्काल बाद मुख्यमंत्री की शपथ लेने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है.

पार्टी के एक सूत्र ने कैच को बताया कि पीडीपी प्रमुख मुफ्ती राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर मुफ्ती मोहम्मद सईद के चहारून के बाद ही शपथ लेंगी. यह एक धार्मिक प्रक्रिया होती है जिसे मृतक के मरने की तारीख के चार दिन बाद तक पूरा किया जाता है. महबूबा के करीबी एक नेता ने बताया, 'फिलहाल महबूबा गहरे अवसाद में हैं.'

10 जनवरी को होने वाले चहारून से पहले महबूबा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए बिलकुल भी इच्छुक नहीं हैं

सात जनवरी को नई दिल्ली में सईद की मृत्यु हुई थी. सूत्रों ने बताया कि पिता की मौत के बाद महबूबा बेहद दुखी और गमजदा हैं. वह 10 जनवरी को होने वाले चहारून से पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए जाने को लेकर बिलकुल भी इच्छुक नहीं हैं. 

सूत्रों के मुताबिक पीडीपी के वरिष्ठ नेताओं ने महबूबा को यह बता दिया है कि यह पार्टी की संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वह मुख्यमंत्री का चुनाव करे. कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि 'राज्य को बिना नेतृत्व के यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता' और महबूबा को सात जनवरी को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेनी चाहिए थी. लेकिन महबूबा इसके लिए अभी भी तैयार नहीं हैं.

पार्टी के एक नेता ने कहा कि पीडीपी गठबंधन सहयोगी बीजेपी की तरफ से उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने का 'समर्थन पत्र' भेजे जाने का भी इंतजार कर रही है. सूत्रों ने कहा, 'राम माधव के श्रीनगर जाकर महबूबा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बीजेपी की सहमति दिए जाने की उम्मीद है.'

पीडीपी को अभी तक सहयोगी बीजेपी की तरफ से महबूबा को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन पत्र नहीं मिला है

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के प्रभारी महासचिव राम माधव पार्टी सहयोगी अविनाश खन्ना के साथ श्रीनगर पहुंच चुके हैं. उन्होंने महबूबा के घर पर उनसे मुलाकात कर 'संवेदना जताते हुए अपना समर्थन दिया.'

औपचारिक समर्थन का इंतजार

इस बीच महबूबा की कैबिनेट की बनावट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महबूबा पुराने मंत्रियों को हटाकर सरकार में नए लोगों को मं­त्री बनाएंगी. हालांकि पार्टी सूत्रों की माने तो 'यह सब अटकलें पूरी तरह से बकवास हैं.' मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, 'यह सब कुछ महबूबा साहिबा के हाथों में है. तीसरी दुनिया में राजनीति ऐसे ही चलती है.' उन्होंने कहा, 'लेकिन कैबिनेट में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा. यह सारी अटकलें लोगों की कल्पना है जिसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है.' 

पार्टी की तरफ से इस तरह की अटकलों को खारिज किए जाने के बाद भी सुगबुगाहटें जारी हैं. कुछ ऐसी बातें जिस पर चर्चा का बाजार गर्म है:

मुजफ्फर हुसैन बेग की होगी वापसी

पीडीपी के वरिष्ठ नेता नई सरकार में नीतियों के निर्माण पर जबर्दस्त प्रभाव डालेंगे. अपुष्ट खबरों के मुताबिक सांसद बेग पहले से ही 'वित्त मंत्रालय को संभाले जाने की दिलचस्पी दिखा चुके हैं.' 2002 में जब पीडीपी सत्ता में थी तब बेग वित्त मंत्री हुआ करते थे.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कैच को बताया कि हसीब दराबू 2016-17 के बजट के साथ बिल्कुल तैयार हैं और ऐसे में इस बात की कम ही संभावना है उनकी जगह किसी और को वित्तमंत्री बनाया जाए. उन्होंने कहा, 'दराबू साहब को हटाना आसान नहीं होगा. मैं आपको यह बता सकता हूं कि वह वित्त मंत्री बने रहेंगे. उनका कोई बेहतरीन विकल्प मौजूद नहीं है.'

हालांकि इसके बावजूद बजट सत्र के बाद कैबिनेट में फेर-बदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

नईम अख्तर को मिल सकती है बड़ी भूमिका

सूत्रों के मुताबिक मौजूदा शिक्षा मंत्री को पर्यटन मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है. सूत्रों ने कहा, 'नईम साहब शिक्षा मंत्री बने रहेंगे. उन्होंने पिछले 10 महीनों में विभाग में अप्रत्याशित सुधार किए हैं.'

तारिक हामिद कारा को लेकर नहीं बदलेगा रुख

पार्टी के प्रभावशाली नेता और सांसद को इस बार भी कोई मंत्री पद मिलने की संभावना नहीं है. कारा बीजेपी के साथ गठबंधन बनाए जाने को लेकर पीडीपी की खुलेआम आलोचना कर चुके हैं. कारा ने कहा था कि वह पार्टी के 'विचारधाराओं के संघर्ष' को नहीं मानते हैं जो उसने बीजेपी के साथ हाथ मिलाते वक्त दिया था. उन्होंने 'चेतना के संघर्ष' में भरोसा जताते हुए पार्टी की जबर्दस्त आलोचना की थी.

नई सरकार के गठन की अटकलों के बीच पीडीपी नेता लगातार राज्यपाल के संपर्क में बने हुए हैं

पीडीपी के एक नेता ने कहा, 'कारा और बेग साहब पार्टी के सांसद हैं. यह पार्टी के हित में नहीं होगा कि हम उन्हें संसद से हटाकर राज्य मंत्रिमंडल में शामिल करें. फिर संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?' इस बीच पीडीपी के वरिष्ठ नेता राज्यपाल एनएन वोहरा के लगातार संपर्क में बने हुए हैं.

राजभवन के प्रवक्ता ने कहा कि 'राज्यपाल ने महबूबा मुफ्ती और बीजेपी प्रेसिडेंट सतपाल शर्मा को चिट्ठी भेजकर नई सरकार के गठन के बारे में तत्काल सूचित करने का आदेश दिया है.'

First published: 10 January 2016, 1:18 IST
 
गौहर गिलानी @catchnews

श्रीनगर स्थित पत्रकार, टिप्पणीकार और राजनीतिक विश्लेषक. पूर्व में डॉयचे वैले, जर्मनी से जुड़े रहे हैं.

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