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महबूबा मुफ्ती: कश्मीरी पंडितों को वापस लेकर आऊंगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 May 2016, 14:11 IST
(पीटीआई)

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस लेकर आएगी. 

इसके साथ उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीरी पंडित अपने पैतृक स्थानों पर जाने में सुरक्षित महसूस न करें, उनके लिए ‘अस्थायी’ आवास की व्यवस्था प्रदेश सरकार द्वारा की जाएगी. कश्मीरी पंडितों के लिए उनकी सरकार के द्वारा अलग कॉलोनियां बसाए जाने के विपक्ष और अलगाववादियों के दावों को नकारते हुए महबूबा ने विधानसभा में कहा कि साल 2005 में गठित प्रधानमंत्री के कार्य समूह ने उनके लिए 'अस्थायी' आवास के निर्माण का सुझाव दिया था और वह पंडितों के अलावा मुसलमान तथा सिख प्रवासियों के लिए भी होगा. 

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि ऐसी स्थिति में प्रवासियों से अपने पैतृक स्थानों पर लौटने के लिए कैसे कहा जा सकता है जब हमारे ही राजनीतिक कार्यकर्ता, फिर चाहे वो पीडीपी, कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस या किसी भी अन्य पार्टी के हों, सभी सुरक्षा के मद्देनजर श्रीनगर के होटलों में रह रहे हैं.

मुख्यमंत्री महबूबा ने कहा कि, ‘हम उनसे अपने घरों को वापस लौट जाने को क्यों नहीं कहते हैं? क्योंकि वह आज भी अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं. किसी ने सवाल खड़ा नहीं किया कि हमने उनके लिए कॉलोनियां क्यों बनाई हैं.’ 

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कश्मीरी पंडितों सहित सबके लिए मूलभूत सुविधाओं से युक्त 'अस्थायी' आवास बनाने को प्रतिबद्ध है. 

उन्होंने कहा कि, ‘यह सुविधा केवल प्रवासियों के लिए है. क्या हमारे यहां मुसलमान प्रवासी नहीं हैं? क्या जम्मू में प्रवासी नहीं हैं? क्या उनमें सिख और अन्य लोग नहीं हैं? यह हम कह रहे हैं कि वहां 50 प्रतिशत कश्मीरी पंडित और बाकी अन्य लोग होंगे तो, आप इसे इस्राइल जैसी स्थिति बता रहे हैं.’

महबूबा ने कहा, प्रवासी अपने पैतृक स्थानों पर तभी लौट सकते हैं, जब वह अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करेंगे. उन्होंने कहा, ‘उसके बाद ही वह गांदेरबल, पुलवामा, बारामुला या घाटी की अन्य जगहों के लिए जा सकेंगे.’ 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आशा नहीं की जा सकती है कि जो आज से 25 साल पहले घाटी छोड़ चुके हैं, वो लोग लौट कर सीधे अपने घरों को चले जाएं. उन्होंने कहा कि, ‘उनमें से कुछ लोग अपने घरों का रास्ता और पता तक भूल गए हैं. कुछ लोगों को अपने मकान तक याद नहीं हैं. यह कैसी मानवता है? हम सभी मानते हैं कि सभी प्रवासी हमारी कश्मीरियत का हिस्सा हैं और उन्हें पूरे सम्मान के साथ लौटना चाहिए.’

First published: 29 May 2016, 14:11 IST
 
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