Home » इंडिया » Mehbooba's Eid gift: amnesty for Kashmir's 'misguided' youth
 

ईद के पहले क्षमादान दे जनता का भरोसा जीतेंगी महबूबा मुफ्ती

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2016, 7:52 IST
QUICK PILL
  • ईद के पहले सदभावना दिखाते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने पत्थरबाजी और सरकार विरोधी प्रदर्शन के मामले में आरोपी कश्मीरी युवाओं को सामूहिक क्षमादान देने का फैसला लिया है.
  • मुफ्ती ने कहा कि सरकार इस बारे में अध्ययन कर रही हैं और उसकी योजना उन युवाओं को माफी देने की है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं.

ईद के पहले सदभावना दिखाते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने पत्थरबाजी और सरकार विरोधी प्रदर्शन के मामले में आरोपी कश्मीरी युवाओं को सामूहिक क्षमादान देने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा को बताया कि गृह मंत्रालय को उन युवाओं की सूची बनाने का आदेश दिया गया है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

मुफ्ती ने कहा कि सरकार इस बारे में अध्ययन कर रही हैं और उसकी योजना उन युवाओं को माफी देने की है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इन युवाओं को बहकाया गया और इनमें से कई को ईद के पहले माफ कर दिया जाएगा. बाकी अन्य मामलों पर भी मानवीय आधार पर विचार किया जाएगा.

मुफ्ती ने विधानसभा को बताया, 'पिछली सरकार की तरह हमारी आदत लोगों को जेल में डालने की नहीं है.' हालांकि कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए कई बार सख्त कदम उठाने पड़ते हैं.

मुख्यमंत्री की युवाओं को माफी की घोषणा ईद के तोहफे की तरह है. साथ ही उनका यह फैसला बीजेपी और पीडीपी के बीच बढ़ते भरोसे को भी बयां करता हैं. बीजेपी इन मामलों को कानून और व्यवस्था के हालात से जोड़कर देखती रही है.

राजनीति

इससे पहले महबूबा आतंकियों को भी क्षमादान देने की घोषणा कर चुकी हैं. उन आतंकियों को जिन्होंने हथियार डाल दिया है. उनकी योजना भटके हुए युवाओं को घर वापस बुलाने की थी.

महबूबा ने यह घोषणा यूनिफाइड हेडक्वार्टर्स की पहली बैठक में की जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और कई केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे. बैठक में राज्य के मुख्य सचिव भी मौजूद थे.

हिजबुल मुजाहिद्दीन के शीर्ष आतंकी तारिक पंडित के आत्मसमर्पण के बाद घाटी में इस आतंकी संगठन की तरफ से युवाओं की भर्ती की मुहिम को बड़ा झटका लगा है. पंडित को घाटी के कमांडर बुरहान मुजफ्फर वाणी का करीबी माना जाता है. 

पंडित वाणी की तरफ से सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले पोस्ट में अक्सर नजर आता था. हालांकि पत्थर फेंकने वाले युवाओं को माफी दिया जाना इसमें शामिल नहीं है. इसका मकसद लोगों के दिलों में विश्वास पैदा करना है.

हाल के कुछ महीनों में महबूबा के कई प्रस्ताव को झटका लगा है और उसे लेकर विवाद भी हुए हैं. इसमें कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनियों का निर्माण भी शामिल है. साथ ही कुछ नई प्रस्तावित यात्रा को लेकर भी विवाद पैदा हुआ.

जेल में बंद युवाओं की बड़ी तादाद राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ही एक दूसरे पर युवाओं को जेल में बंद करने का आरोप लगाते रहे हैं. लेकिन इसके लिए दोनों ही दल जिम्मेदार रहे हैं.

जनवरी 2015 से जनवरी 2016 के बीच घाटी में 799 लोगों को कई अलग अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया

जनवरी 2015 से जनवरी 2016 के बीच घाटी में 799 लोगों को कई अलग अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया जबकि जम्मू में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. श्रीनगर में जहां इस दौरान 337 लोगों को गिरफ्तार किया गया वहीं शोपियां में 122 लोगों की गिरफ्तारी हुई. 

पुलवामा में 89 जबकि अनंतनाग में 86 लोगों को हिरासत में लिया गया. अन्य जिले मसलन बारामूला, कुलगाम और शोपियां में अपेक्षाकृत कम लोगों को गिरफ्तार किया गया.

वहीं सरकार ने 2015 में पीएसए और अन्य कानूनों के तहत 133 लोगोें को गिरफ्तार किया है. इनमें से 80 को रिहा किया जा चुका है जबकि 53 अभी भी हिरासत में हैं. इनमें से केवल तीन लोग राज्य के बाहर के जेल में बंद हैं.

जम्मू-कश्मीर में कुल 14 जेल हैं, जिनमें 5,600 लोगों के रहने की क्षमता है. पिछले साल सरकार ने कैदियों पर 18.34 करोड़ रुपये का खर्च किया.

राज्य के शिक्षा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नईम अख्तर ने कैच को बताया, 'बहुत अधिक युवा जेल में नहीं हैं. लेकिन अदालतों में बड़ी संख्या में युवाओं के खिलाफ मामले हैं. हम उन मामलों को वापस ले रहे हैं जो बहुत गंभीर नहीं हैं.'

महबूबा ही हालांकि एकमात्र वैसी मुख्यमंत्री नहीं हैं जिन्होंने सार्वजनिक माफी दी है. 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्थरबाजी के मामले में आरोपी 1200 युवाओं को माफी दी थी. 

सरकार का कहना था वह 2011 के बाद से पत्थरबाजी के सभी मामलों को वापस ले रही है. हालांकि इसमें गंभीर आपराधिक मामले शामिल नहीं थे.

2010 में घाटी में भड़की अशांति में करीब 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया और इनमें से 258 लोगों के खिलाफ पीएसए लगाया गया.

हालांकि ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्हें महबूबा पर भरोसा नहीं है. कश्मीर बार एसोसिएशन के वकील बशीर सिद्दीकी ने कैच को बताया, 'हमारा अनुभव ठीक नहीं रहा है. कई युवाओं के खिलाफ  एक से अधिक एफआईआर हैं. उनका मामला अदालतों में लंबित है. पुलिस ने हालांकि इन मामलों में चालान पेश कर दिया है लेकिन वह सबूतों के साथ सामने नहीं आई है. इसलिए वैसे भी इनमें से कई मामले अदालतों में खारिज हो जाएंगे.' उन्होंने कहा कि मैसामा के दो युवाओं के खिलाफ 15 से अधिक एफआईआर हैं. वह पूछते हैं, 'क्या सरकार इन युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेगी? मुझे संदेह है.'

First published: 26 June 2016, 7:52 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी