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मेवात गैंगरेप: एक आरोपी आरएसएस का स्वयं सेवक, दूसरे ने फेसबुक पर लिखा- ‘मुसलमान तो गए’

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 7 September 2016, 19:32 IST

मेवात के डींगरहेड़ी में हुए गैंगरेप और हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों के फेसबुक हैंडल से उनके आरएसएस से जुड़ाव के सुबूत मिले हैं. दोनों मुलज़िमों के फेसबुक हैंडल से इस आशंका को बल मिलता है कि 24-25 अगस्त की दरमियानी रात हुई हिंसक घटना सामान्य लूटपाट नहीं बल्कि धार्मिक घृणा से जुड़ा अपराध भी हो सकता है. दिल्ली में मंगलवार को फिरोजशाह मार्ग पर जेडीयू सांसद अली अनवर और सोशल एक्टिविस्ट शबनम हाशमी ने उनके फेसबुक हैंडल का प्रिंटआउट जारी कर इश संबंध में बड़ा खुलासा किया है.

गिरफ़्तार मुलज़िम अमरजीत की एक पुरानी फेसबुक पोस्ट के प्रिंट आउट पत्रकारों को बांटे गए जिसमें उसने लिखा है- ‘मुस्लिम तो गए.’ इस वाक्य के साथ उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो भी लगाई है. वहीं दूसरे आरोपी राहुल वर्मा ने अपने फेसबुक हैंडल पर लिखा है कि वह आरएसएस के स्वयंसेवक हैं. डबल गैंगरेप, डबल मर्डर और लूटपाट के मामले में शुरू से कयास लगाया जा ररहा था कि यह धार्मिक घृणा का मामला हो सकता है. लेकिन पहले पुलिस और बाद में जांच के लिए बनी एसआईटी इसे दबाने की कोशिश कर रही हैं.

अली अनवर और शबनम हाशमी ने प्रेस कांफ्रेंस में यह दावा भी किया कि छह-सात महीने पहले घटनास्थल से दो किलोमीटर दूर स्थित एक कारखाने में आरएसएस ने एक ट्रेनिंग और भर्ती कैंप लगाया था. मुलजिम राहुल वर्मा ने अप्रैल महीने में अपना फेसबुक हैंडल अपडेट करते हुए खुद को आरएसएस का स्वयं सेवक बताया है. उसने अपनी फेसबुक पर बाकायदा अपडेट किया है कि वह आरएसएस के लिए काम करने लगा है.

शबनम के मुताबिक यह पहला ऐसा मामला है जहां कथित लूटपाट के मामले में मुलज़िमों ने स्त्रियों के साथ इतनी हिंसा और नृशंसता की है. उनके फेसबुक पोस्ट से यह बात साफ होती है कि वे मुसलिमों से घृणा करते है. अटकलें हैं कि शायद इसी वजह से उन्होंने यह वारदात की लेकिन जांच एजेंसी एसआईटी इन सुबूतों तक नहीं पहुंच पाई है.

दिल्ली में पीड़ितों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान गैंगरेप की दोनों पीड़िताएं भी मौजूद थीं. जब उनसे वारदात के ब्यौरे के बारे में पूछा गया तो वह रोने लगीं. उनके भाई ज़ाकिर हुसैन ने बताया कि पीड़िता किसी तरह मौक़े से भागने में कामयाब रही थीं. मगर मुलज़िमों ने उनके दो साल के बच्चे की गर्दन पर कट्टा रखकर उन्हें वापस बुलाया, फिर तीन लोगों ने गैंगरेप किया. इसी तरह नाबालिग के साथ भी तीन लोगों ने बारी-बारी से रेप किया. पीड़िता अपने दो साल के बच्चे को भी साथ लाई थीं.

दूसरी तरफ एसआईटी इस केस में बुरी तरह बेबस नज़र आ रही है. अभी पुलिस पूछताछ में चारों मुलज़िमों से वारदात का असली मकसद नहीं जान पाई है. एसआईटी लूट का माल और वारदात में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी भी नहीं करवा पाई है. ऐसा दावा एसआईटी ने अपनी रिमांड रिपोर्ट में किया है.

मुलज़िमों की दोबारा पुलिस रिमांड के लिए एसआईटी की टीम बुधवार को ज़िला अदालत पहुंची. अपनी अर्ज़ी में एसआईटी ने अदालत से कहा, ‘मुलज़िम बहुत ही चालाक और चतुर हैं. बात को गले तक लाते और वापस सटक जाते हैं.’ मगर इस दलील के आधार पर अदालत ने पुलिस रिमांड की मांग ठुकराते हुए मुलज़िमों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

अदालत में दाख़िल रिमांड रिपोर्ट में एसआईटी ने सिर्फ इतना बताया है कि मौके से क्या लूटा गया और किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ. यानी कि वह अभी भी इसे सिर्फ सामान्य लूट मानकर की जांच कर रही है.

एसआईटी अपनी रिमांड रिपोर्ट में लिखती है, ‘बार-बार पूछताछ करने पर आरोपी स्वीकृत कथनों के अनुसार बरामदगी नहीं करा रहे हैं और ना ही लूटा हुआ सामान छिपाने के बारे में बतला रहे हैं. कभी सामान बरामदगी के बारे में हामी भर देते हैं तो कभी मना कर देते हैं. पूछताछ करने पर सिर झुकाकर बैठ जाते हैं. किसी भी बात का जवाब नहीं देते. आरोपी चालाक और चतुर किस्म के हैं. बात को गले तक लाते और वापस सटक जाते हैं.'

यहां यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह रिपोर्ट एसआईटी ने दाख़िल की है जिसकी निगरानी एडीजीपी लेवल के अफसर कर रहे हैं. यह एसआईटी इसलिए गठित की गई थी क्योंकि तावड़ू पुलिस की शुरुआती जांच पर ही सवाल उठने लगे थे लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस अफसरों ने मुलज़िमों के सामने घुटने टेक दिए हैं या फिर इस केस में कोई राजनीतिक दबाव काम कर रहा है.

रिपोर्ट में सिर्फ इस बात का ज़िक्र है कि आरोपी संदीप ने लूटा गया सोना जयपुर में छिपा रखा है. मुलज़िम अमरजीत ने चांदी का कड़ा कोसी, यूपी में छिपा रखा है. मुलज़िम कर्मजीत ने अपने हिस्से का सोना पानीपत में दोस्त के घर छिपा रखा है. मुलज़िम राहुल ने देसी कट्टा दिल्ली के नजफगढ़ में अपनी बहन के घर में छिपा रखा है लेकिन इनमें से किसी भी चीज की बरामदगी अभी तक नहीं हो पाई है.

एसआईटी की रिपोर्ट देखकर ऐसा लगता है कि वह जांच के नाम पर लीपापोती कर रही है. इस तरह के अपराधों में अपराध में प्रयुक्त हथियार और लूटे गए सामान की बरामदगी सबसे अहम होती है. जाहिर है उसके बिना आज नहीं तो कल सारे आरोपी बरी हो जाएंगे.

हालांकि मेवात डिस्ट्रिक्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष आबिद हुसैन का कहना है कि सीएम खट्टर ने एसआईटी चीफ आशीष चौधरी समेत दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग मान ली है. इसके अलावा तीनों पीड़ित परिजनों को तीन सरकारी नौकरियां और उचित मुआवज़े पर भी रज़ामंदी जाहिर की है.

इस केस के सिलसिले में बुधवार की दोपहर 11 सदस्यों का एक समूह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिला. मेवात जिले के पूर्व मंत्री आफ़ताब अहमद के मुताबिक सीएम ने इस कांड की सीबीआई जांच समेत एक सितंबर को मेवात की महापंचायत में उठाई गई सभी मांगों को मान लिया है. इस समूह में नूह से विधायक चौधरी ज़ाकिर हुसैन, फिरोज़पुर झिरका से विधायक चौधरी नसीम अहमद और इनेलो नेता किशोर यादव शामिल थे.

क्या हुआ था?

मालूम हो कि 24-25 अगस्त की दरमियानी रात एक बजे मेवात ज़िले के डींगरहेड़ी गांव में एक ही परिवार पर पड़ोसी गांव मुहम्मदपुर के कुछ युवकों ने हमला कर दिया था. यहां दो दंपत्तियों और उनके बच्चों को मार-मारकर अधमरा कर दिया गया था. फिर एक नाबालिग समेत दो महिलाओं का सभी घायलों के सामने ही गैंगरेप किया गया था.

बाद में अस्पताल ले जाते समय इब्राहिम और उनकी पत्नी रशीदन की मौत हो गई थी. तावड़ू पुलिस इसे सामान्य लूटपाट मानकर जांच कर रही थी लेकिन पुलिस की भूमिका संदिग्ध होने पर एक एसआईटी गठित करके जांच उसे सौंप दी गई थी. मगर एसआईटी ने भी निष्पक्ष जांच की बजाय इसमें लीपापोती शुरू कर दी और कोई खुलासा नहीं हो पाया. इसके विरोध में एक सितंबर को हुई महापंचायत में जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी.

बुधवार दोपहर सीएम मनोहर लाल खट्टर से 11 सदस्यीय डेलिगेशन की मुलाकात के बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने का दबाव बढ़ गया है. पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी और मुआवज़ा भी मिल सकता है.

First published: 7 September 2016, 19:32 IST
 
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