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मेवात: पुलिस की लापरवाही पीड़ितों पर बलात्कार से ज्यादा भारी पड़ रही है

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 4 September 2016, 8:42 IST

दिल्ली से 80 किलोमीटर दूर मेवात ज़िले का गांव डींगरहेड़ी है. यह गांव इसी साल शुरू हुए केएमपी एक्सप्रेस वे (कुंडली-मानेसर-पलवल) के ठीक किनारे है. 24-25 अगस्त की दरमियानी रात यहीं एक घर में डबल मर्डर, एक नाबालिग समेत दो महिलाओं के साथ गैंगरेप और लूट की वारदात हुई.

तावडू पुलिस ने 28 अगस्त को 4 मुलज़िमों को गिरफ़्तार किया जो डींगरहेड़ी के ठीक सामने बसे गांव मुहम्मदपुर के निवासी हैं. इस कार्रवाई के बाद हरियाणा पुलिस ने इस केस को सुलझाने का दावा किया था लेकिन मेवात की 36 बिरादरियों ने एक सितंबर को महापंचायत बुलाकर सरकार और जांच एजेंसी पर मुलज़िमों को बचाने का आरोप लगाया है.

यह समझना जरूरी है कि इतने बड़े अपराध के बाद पुलिस की कार्रवाई पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

धाराएं हल्की लगाई गईं?

मेवात पुलिस पर पहला आरोप इस केस में हल्की धाराएं लगाने का है. 25 अगस्त को दर्ज एफआईआर में धारा 459, 460, 376 डी, पॉक्सो-6 और आर्म्स एक्ट शामिल थीं. दो मौतें होने के बावजूद तावडू पुलिस ने हत्या की धारा 302 और हत्या की कोशिश की धारा 307 क्यों नहीं लगाई?

इस वारदात में चार लोगों से ज़्यादा के शामिल होने की आशंका है लेकिन डकैती की धारा 396 भी नहीं जोड़ी गई. मेवात डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आबिद हुसैन कहते हैं कि इसका खुलासा 29 अगस्त को रिमांड पेपर देखने के बाद हुआ. फिर पुलिस मुख्यालय का घेराव होने पर ये धाराएं एफआईआर में शामिल की गईं. मेवात विकास सभा के अध्यक्ष अंसार अहमद कहते हैं कि हल्की धाराएं इसलिए लगाई गई हैं ताकि मुलज़िमों को कम से कम सज़ा मिले.

पीड़ितों के गवाह विश्वसनीय या मशीनें?

जांच एजेंसी ने इस केस में डीएनए और लाइ डिटेक्टर टेस्ट के लिए अदालत में अर्ज़ी लगाई थी. वकील आबिद हुसैन पूछते हैं कि पीड़ितों के समक्ष मुलज़िमों की शिनाख़्त परेड करवाने की बजाय डीएनए और लाइ डिटेक्टर टेस्ट की मांग के क्या मायने हैं? उन्होंने कहा कि इस केस की जांच को उलझाने की कोशिश की जा रही है जबकि मुलज़िमों की पहचान के लिए पीड़ित ख़ुद उपलब्ध हैं. उनकी गवाही ज़्यादा प्रमाणिक है या मशीनों से मिलने वाले नतीजे?बलात्कार के मौजूदा कानून में पीड़िता की गवाही सबसे महत्वपूर्ण है. इके बावजूद पुलिस डीएनए टेस्ट और लाई डिटेक्टर टेस्ट के पचड़ में क्यों फंसी है? इसका कोई जवाब नहीं है.

मुश्किल सवालों के जवाब से अफसर क्यों बच रहे हैं?

तावडू थाने के एसएचओ जयप्रकाश और डिप्टी एसपी सुमेर सिंह से इन सवालों की वजह पूछने पर जवाब मिला- नो कॉमेंट. मेवात पुलिस के डिप्टी एसपी आशीष चौधरी स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम के प्रमुख हैं. ये सारे सवाल पूछने पर उन्होंने ख़ुद को मीटिंग में बताकर फोन रख दिया. इस केस की निगरानी कर रही साउथ रेंज की आईजी ममता सिंह ने भी फोन नहीं पिक किया.

सुबूत जुटाने की बजाय महिला आयोग की टीम ने दरबार लगाया?

महिला अधिकार कार्यकर्ता जगमति सांगवान कहती हैं कि मदद की बजाय पुलिस ने इस केस में पीड़ितों के मानवाधिकारों का हनन किया है. एक गैंगरेप पीड़ित नाबालिग है और उसकी काउंसिलिंग या एनजीओ की मदद की बजाय पुलिस द्वारा बयान लेकर उसे डिप्रेशन में ढकेला गया. जगमति कहती हैं कि महिला आयोग की टीम भी पीड़ितों से मिलने की बजाय दरबार सजाकर बैठ गई जबकि उसे मुलाक़ात के अलावा मौके पर जाकर सुबूत इकट्ठा करना चाहिए था. पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जगमति ने कहा कि जांच एजेंसी मुलज़िमों का बचाव करके पीड़ितों के साथ गद्दारी कर रही है.

वारदात का मकसद अभी तक साफ़ नहीं?

मुलज़िमों ने लूट, हत्या और गैंगरेप को एक साथ अंजाम दिया है और मेवात पुलिस इसे लूटपाट मानकर तफ्तीश आगे बढ़ा रही है. मगर मुलज़िम पेशेवर लुटेरे नहीं हैं. पुलिस रिकॉर्ड में इनकी हिस्ट्रीशीट भी नहीं है.पीड़ितों और मुलज़िम के गांवों के बीच महज़ एक सड़क का फासला है. दोनों पक्ष एक दूसरे को पहले से जानते थे. डींगरहेड़ी गांव में पीड़ित पक्ष की एक चाय की गुमटी हुआ करती थी जहां ये आकर बैठते थे. दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की कहासुनी का भी कोई मामला सामने नहीं आया है. बावजूद इस क्रूरता के क्या मायने हैं?

वारदात से पहले छेड़खानी हुई थी?

उमर पाटला कहते हैं कि परिवार के मुखिया जोरुद्दीन अपनी नातिन को लेकर केएमपी एक्सप्रेस दिखाने गए थे. आरोपी वहीं बैठकर शराब पी रहे थे. उन्होंने जोरुद्दीन की नातिन पर वहां फब्तियां कसी जिस पर ये लोग वापस चले आए. पाटला कहते हैं कि आरोपी अक्सर वहां शराब पीते हुए पाए जाते हैं. मुमकिन है कि लड़की को देखकर उनके भीतर वासना जग गई हो और उन्होंने वहीं बैठकर वारदात की साजिश रच डाली हो.

यह सिर्फ लूट नहीं है

जिस जगह वारदात अंजाम दी गई, वह पीड़ित का घर नहीं है. खेत की रखवाली के लिए दो कमरे वाले मकान में जोरुद्दीन का परिवार सोने जाता था. पीड़ितों ने कैच न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनके बदन पर जो ज्वैलरी थी, मुलज़िम वही ले गए. इसके अलावा जोरूद्दीन का बेटा कोल्ड ड्रिंक की सप्लाई का काम करता था तो हर दिन होने वाले कलेक्शन का रुपया भी उन्होंने समेट लिया. मेवात के सरकारी अस्पताल में भर्ती पीड़िता वारदात के बारे में सिलसिलेवार तरीक़े से बताती हैं...

खेत में सोने का इंतज़ाम तीन जगह था. जोरुद्दीन का बेटा और बहू छप्पर के नीचे सो रहे थे जबकि उनकी बेटी और दामाद अपने बच्चों के साथ खुले में थे. दोनों लड़कियां पक्के मकान में कमरे के अंदर थीं.हमलावरों ने सबसे पहले जोरुद्दीन के बेटे और बहु पर हमला किया. दोनों को अधमरा करने के बाद उन्हें खींचकर बेटी और दामाद के पास लेकर आए. फिर लोहे की रॉड से उन्हें पीटने के बाद सभी को पक्के कमरे में ले गए. वहां सभी के हाथ पांव बांधने के बाद दोनों लड़कियों को कमरे से निकाला. फिर उन्हीं के सामने बारी-बारी रेप किया. पीड़िता कहती हैं कि ज़ख्मी होने के बाद उनकी पिटाई देखकर मैं बेहोश हो गई थी. फिर उन्होंने हमारे चेहरे पर पानी डालकर देखा कि हम ज़िंदा हैं या मर गए. उन्होंने मेरी नब्ज़ भी टटोली जबकि मैंने अपनी सांस रोक रखी थी. मैंने उन्हें आराम से जाते हुए देखा, उनकी संख्या चार थी.

पुलिस के ढीलेपन ने महापंचायत के लिए मजबूर किया

एक सितंबर को तावड़ू में बुलाई गई महापंचायत में आसपास के ज़िलों के नेता और बुज़ुर्ग इकट्ठा हुए थे. यहां कहा गया कि राज्य सरकार ने अभी तक इस वारदात पर संवेदना ज़ाहिर नहीं की है और ना ही उनके पुनर्वास के लिए कोई घोषणा की है. पीड़ितों को हरियाणा वक्फ बोर्ड ने तीन लाख रुपए की मदद की पेशकश की थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.

महापंचायत में स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा कि इसकी जांच सीबीआई को ट्रांसफर की जानी चाहिए. जांच होने तक स्थानीय पुलिस को ट्रांसफर करना चाहिए. सरकार की तरफ़ से पीड़ितों के रोजगार और आमदनी के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए.

इस महापंचायत में हरियाणा सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कई मांगे भी रखी गई हैं. कहा गया है कि इस वारदात में पीड़ित तीन परिवार हैं. तीनों को 50-50 लाख रुपए के अलावा तीन सरकारी नौकरियां दी जाएं. इस मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि तीन महीने के भीतर गैंगरेप के मामले में फैसला आ सके.पैरवी की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन को सौंपी गई है. महापंचायत में यह भी आरोप लगे कि मेवात से सांसद और केंद्र में मंत्री राव इंद्रजीत दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

First published: 4 September 2016, 8:42 IST
 
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