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ईरानी बनाम जावड़ेकर: मंत्री बदला, पर मंत्रालय कितना बदला?

स्कंद विवेक धर | Updated on: 7 August 2016, 8:05 IST
QUICK PILL
  • ईरानी को क्यों हटाया गया? इसकी अलग-अलग विवेचनाएं हैं, लेकिन इस बात पर सभी एकमत हैं कि छह जुलाई को जब प्रकाश जावड़ेकर ने एचआरडी मंत्री का पद संभाला, तब छात्र, शिक्षक, वैज्ञानिक यहां तक कि मंत्रालय के बाबू भी ईरानी के रूखे, तानाशाह रवैये के चलते उनसे और उसके चलते सरकार से बुरी तरह नाराज थे.
  • जेएनयू में छात्रों की नारेबाजी और हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए रोहित वेमुला प्रकरण में भी ईरानी ने संवेदनशीलता दिखाने की जगह कठोर रुख अपनाया था. 
  • दो साल में ईरानी ने एचआरडी मंत्रालय को एक ऐसे दुर्ग में तब्दील कर दिया था, जहां से एकतरफा आदेश जारी होते थे. द्विपक्षीय संवाद की कोई जगह नहीं थी.

पिछले महीने की चार तारीख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया 18 के लगभग नए मंत्री मंत्रिमंडल का हिस्सा बने. लेकिन अगले दिन अखबारों में जो ख़बर सुर्खियों में रही वह थी स्मृति ईरानी की मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय से छुट्टी. यह मंत्रालय ईरानी से लेकर पुराने भाजपाई प्रकाश जावड़ेकर को सौंप दिया गया.

इतने बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के बावजूद सारी सुर्खी एचआरडी मंत्रालय और स्मृति ईरानी को ही क्यों मिली? राजस्थान पत्रिका ने भी उस दिन दिलचस्प हेडलाइन दी थी- "शिक्षा से स्मृति लोप, अब प्रकाश”. जाहिर है, यह एक बदलाव पूरे कैबिनेट फेरबदल पर भारी पड़ गया था.

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ईरानी को क्यों हटाया गया? इसकी अलग-अलग विवेचनाएं हैं, लेकिन इस बात पर सभी एकमत हैं कि छह जुलाई को जब प्रकाश जावड़ेकर ने एचआरडी मंत्री का पद संभाला, तब छात्र, शिक्षक, वैज्ञानिक यहां तक कि मंत्रालय के बाबू भी ईरानी के रूखे, तानाशाह रवैये के चलते उनसे और उसके चलते सरकार से बुरी तरह नाराज थे.

ईरानी के कटु व्यवहार की कई कहानियां दिल्ली के सत्ता गलियारों में चर्चित थीं. प्रसिद्घ इतिहासकार रामचंद्र गुहा बताते हैं कि किस तरह ईरानी ने एक आईआईटी निदेशक को सवाल पूछने पर भरी बैठक में जलील करते हुए कहा था, 'क्या आप खुद को टीवी एंकर समझते हैं, जो मुझसे इस तरह का सवाल कर रहे हैं.'

स्मृति का लगभग यही रवैया मीडिया के साथ भी था. उनके मंत्रालय में मीडिया की एंट्री लगभग प्रतिबंधित थी. जाहिर है विश्वसनीय खबरों के अभाव में उनसे जुड़ी तमाम अटकलबाजियां भी मीडिया में लगती रहती थीं, मसलन उनका प्रधानमंत्री का करीबी होने का दंभ. एक पत्रकार ने तो अपनी एक कहानी में उस समय यहां तक लिखा कि 2014 में स्मृति ईरानी ने उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का साक्षात्कार दिलवाने संबंधी आश्वासन दिया लेकिन बाद में ऐसा हो नहीं सका. जाहिर है इससे अटकलों को और बल मिला.

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जेएनयू में छात्रों की नारेबाजी और हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए रोहित वेमुला प्रकरण में भी ईरानी ने संवेदनशीलता दिखाने की जगह कठोर रुख अपनाया था. दो साल में ईरानी ने एचआरडी मंत्रालय को एक ऐसे दुर्ग में तब्दील कर दिया था, जहां से एकतरफा आदेश जारी होते थे. द्विपक्षीय संवाद की कोई जगह नहीं थी.

लंबे समय से एचआरडी मंत्रालय कवर कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक, 'प्रकाश जावड़ेकर ने जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया है, वह है खत्म हो चुकी संवाद की प्रक्रिया को दोबारा स्थापित करना. बतौर एचआरडी मंत्री जावड़ेकर के पहले बयान से ही यह साबित हो गया था कि उनका रवैया पूर्ववर्ती मंत्री से 180 डिग्री विपरीत रहेगा.'

हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए रोहित वेमुला प्रकरण में ईरानी ने संवेदनशीलता दिखाने की जगह कठोर रुख अपनाया था

जावड़ेकर ने इस बयान में कहा था कि मैं खुद छात्र आंदोलन की उपज हूं. हम हमेशा सभी से बातचीत करेंगे. चूंकि बातचीत होगी तो आंदोलन की जरूरत ही नहीं रहेगी. इसी तरह, एक कार्यक्रम में जावड़ेकर ने छात्रों को बगावती होने का भी संदेश दिया, जबकि ईरानी बगावत का दमन करने वाली भाषा का इस्तेमाल करती थीं.

मंत्रालय के एक अधिकारी, जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते, के मुताबिक, 'जावड़ेकर के आने से आला अधिकारियों को भी बड़ी राहत मिली है. दरअसल, अधिकारियाें पर दबाव बनाने के लिए ईरानी अपमान को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती थीं. मनमाफिक काम न होने पर वह भरी बैठक में सीनियर अफसरों को अपमानित करती रहती थीं.'

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ईरानी के दो साल के कार्यकाल में दो सचिव, अतिरिक्त सचिव, आधा दर्जन संयुक्त सचिव यहां तक कि उनके निजी सचिव ने भी मंत्रालय से तबादला ले लिया था. यानी एक टीम लीडर के तौर पर वे बुरी तरह से असफल सिद्ध हुईं.

अधिकारी के मुताबिक, 'जावड़ेकर के साथ अब तक उनकी 5 बैठकें हुई हैं, जिसमें वे बेहद शिष्टता से पेश आए.' प्रोफेसर रामचंद्र गुहा भी जावड़ेकर के समर्थन में कहते हैं, 'वह शिष्ट हैं और विद्वानों का सम्मान करते हैं.'

एक महीने में एचआरडी मंत्रालय कितना बदला?

इस सवाल के जवाब में शीर्ष मैनेजमेंट संस्थान एक्सएलआरआई के प्रोफेसर डॉ. गौरव वल्लभ कहते हैं, 'किसी भी देश में उच्च शिक्षा तभी स्तरीय बन सकती है, जब उसके उच्च शिक्षण संस्थानों के पास पूरी स्वायत्तता हो. उच्च शिक्षा संस्थान एक ऐसे खुले कंपार्टमेंट की तरह हाेने चाहिए, जहां हर तरह के विचार आ सकें और जा सकें. जब नए विचार आएंगे तो उसमें कुछ बुरे भी होंगे.'

बकौल प्रो. वल्लभ पिछले एक महीने का हिसाब देखें तो देश में बंद पड़ा यह कंपार्टमेंट कुछ हद तक खुला है. नए विचार आने शुरू हुए हैं और उन पर विचार विमर्श भी शुरू हुआ है.

रामचंद्र गुहा भी प्रकाश जावड़ेकर तारीफ करने के साथ ही उनको आरएसएस से बचने की सलाह दे चुके हैं

हालांकि, तमाम सकारात्मक बयानों और नरम रुख के बावजूद जावड़ेकर ईरानी से लोहा ले चुके छात्रों की नाराजगी दूर करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं.

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रोहित वेमुला प्रकरण में सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे ज्वाइंट एक्शन फॉर सोशल जस्टिस की कार्यकर्ता अर्पिता जया के मुताबिक, "हमें ईरानी और जावड़ेकर में कोई विशेष अंतर नजर नहीं आता. दोनों ही आरएसएस की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं और उसे पोषित करते हैं. उनकी नीतियां वंचित तबकों को नुकसान पहुंचाती हैं." रामचंद्र गुहा भी जावड़ेकर को आरएसएस से बचने की सलाह दे चुके हैं.

यह एचआरडी मंत्रालय और प्रकाश जावड़ेकर के कामकाज की समीक्षा नहीं है. एक महीने का समय किसी भी मंत्री के कामकाज का आकलन करने के लिए बहुत कम है. किसी को अपना कामकाज दिखाने, अपनी एक विरासत छोड़ने के लिए लंबे समय की जरूरत होती है. इस लिहाज से स्मृति ईरानी के दो सालों की विरासत में नकारात्मकता ज्यादा है. जावड़ेकर को खुद को अभी साबित करना बाकी है.

लक्षणों की बात जरूर हो सकती हैं. बीते एक महीने में एचआरडी मंत्रालय में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं.

इस छोटी अवधि में जावड़ेकर ने एचआरडी मंत्रालय का तेवर बदलने में सफलता हासिल की है. कहना न होगा कि बतौर मानव संसाधन मंत्री जावड़ेकर की सफलता इस आधार पर आंकी जाएगी कि वे क्या करते हैं, न कि क्या कहते हैं.

First published: 7 August 2016, 8:05 IST
 
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