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लापता विमान की खोज में एक हुए धरती आसमान

सुहास मुंशी | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • भारतीय वायु सेना के विमान को लापता हुए 24 घंटे से अधिक हो चुके हैं और अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है. वायु सेना के विमान एएन 32 में कुल 29  लोग सवार थे. इसमें 9 नागरिक भी सवार थे.
  • विमान की खोज में वायु सेना ने पूर्ण स्तर पर तलाशी एवं बचाव अभियान की शुरुआत कर दी है.
  • लापता विमान की खोज में नौसेना और तटीय बल के 12 बेड़े और पांच नौसेना के विमान को काम पर लगाया गया है.

भारतीय वायु सेना के विमान को लापता हुए 24 घंटे से अधिक हो चुके हैं और अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है. वायु सेना के विमान एएन 32 में कुल 29  लोग सवार थे. इसमें 9 नागरिक भी सवार थे. विमान की खोज में वायु सेना ने पूर्ण स्तर पर तलाशी एवं बचाव अभियान की शुरुआत कर दी है.

लापता विमान की खोज में नौसेना और तटीय बल के 12 बेड़े और पांच नौसेना के विमान को काम पर लगाया गया है. हालांकि इसके बावजूद सफलता अभी तक नहीं मिल सकी है.

हवा के झोंके और जबरदस्त प्रवाह की वजह से जहाज की संभावित जगह दक्षिण की तरफ जा चुकी है. इस वजह से वायु सेना को खोज स्थल का दायरा बढ़ाना पड़ा है. 

कैसे हुआ हादसा

सूत्रों के मुताबिक विमान में वायु सेना के 11 जबकि नौसेना के 9 जवान शामिल थे. इसमें आठ आम नागरिक भी थे. इसके अलावा दो सेना के जवान और कोस्ट गार्ड का एक सदस्य था. विमान अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर जा रहा था.

शुक्रवार की सुबह आठ बजकर 27 मिनट पर विमान ने चेन्नई के तांबरम एयरपोर्ट से उड़ान भरी और इसे सुबह के 11 बजकर 45 मिनट पर पोर्ट ब्लेयर पहुंचना था. जहाज से आखिरी संपर्क उड़ान भरने के 45 मिनट बाद यानी नौ बजकर 12 मिनट पर हुआ.

इसके बाद से विमान का कोई अता पता नहीं है. माना जा रहा है कि संपर्क खोने के बाद विमान तांबरम एयरपोर्ट से करीब 150 नॉटिकल माइल दूर चला गया. विमान उस वक्त 23,000 फुट की ऊंचाई पर था और इसके बाद वह तेजी से बांयी दिशा में आया और नीचे गिरता चला आया. इसके बाद क्या हुआ, वह किसी को पता नहीं है.

क्या हुआ ?

राडार से विमान के गायब होने के कई कारण हो सकते हैं. एक तो खराब मौसम में ऐसा अक्सर ऐसा होता है. मानसून आ चुका है और इसके साथ तेज हवाएं चलने लगती हैं. हो सकता है कि विमान तेज हवा में उड़ गया हो और फिर यह किसी अन्य दिशा में चला गया हो. हालांकि 23,000 फुट की ऊंचाई पर ऐसा होने की संभावना कम ही है.

दूसरा कारण तकनीकी खराबी हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में इसी विमान में तकनीकी खराबी आई थी लेकिन फिर भी इसे उड़ने की मंजूरी दी गई. 

एएन 32 को वायु सेना का विश्वसनीय विमान माना जाता है, जिसे सामनों की ढुलाई की जाती है. इसका इस्तेमाल सैन्य और असैन्य दोनोंं ही मकसद के लिए किया जाता है. इसे 1980 के दशक में एयरफोर्स में शामिल किया गया था. एयर फोर्स में अभी तक करीब 100 एएन 32 को शामिल किया जा चुका है.

हालांकि इस विमान के साथ कई बड़े हादसे जुड़े हुए हैं. 1992 में पंजाब में दो एएन 32 हवा में टकरा गए और इसमें नौ लोगों की मौत हो गई. 1999 और 2009 में भी ऐसे हादसे हुए.

उम्मीद बरकरार

वायु सेना और नौसेना को अभी भी विमान के मिलने की उम्मीद है. नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि चौबीसों घंटे तलाशी अभियान जारी रहेगा और इसकी लगातार निगरानी की जाएगी. हमें सफलता मिलने की उम्मीद है.

अधिकारी के मुताबिक एएन 32 में बीकंस लगे हुए हैं और यह क्रैश होने के बाद भी सिग्नल देता रहेगा. उन्होंने कहा, 'जमीन पर हमारे जहाज हैं और विमान बीकंस को देख रहे हैं. पानी के भीतर हमारी पनडुब्बियां तैनात हैं.'

पिछले साल भी हुआ था हादसा

पिछले साल 8 जून को इसी इलाके में नेवी का डोर्नियर विमान लापता हो गया था. इसमें से एक अधिकारी को मछुआरों ने बचा लिया लेकिन अन्य दो लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी.

तब लापता हुए विमान की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया था और इसमें आठ जहाज और विमानों को लगाया गया था.

करीब एक महीने बाद नौसेना ने अपनी तलाशी अभियान को बंद किया था. इस दौरान उसे तीनों चालक दल के समान और शरीरों के अवशेष भी बरामद हुए थे.

First published: 24 July 2016, 8:11 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

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