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लापता नजीब: 'चलो जेएनयू' फ्लॉप शो, क्राइम ब्रांच भी क्या करेगी?

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 16 November 2016, 12:06 IST
QUICK PILL
  • 15 अक्टूबर से लापता जेएनयू छात्र नजीब अहमद से जुड़ा एक भी सुराग दिल्ली पुलिस नहीं ढूंढ पाई है. 
  • नजीब को ढूंढने के लिए आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों का हौसला भी अब धीरे-धीरे बुझता जा रहा है. 
  • नजीब के गायब होने के 30 दिन पर जेएनयूएसयू ने \'जेएनयू चलो\' के नाम से बड़े मार्च की तैयारी की थी लेकिन इस आंदोलन में छात्र उम्मीद के मुताबिक नहीं जुट पाए. 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से नजीब अहमद को लापता हुए 30 दिन गुज़र चुके हैं लेकिन अभी तक उनसे जुड़ा कोई सुराग नहीं मिला है. जेएनयू के स्कूल ऑफ साइंसेज़ में इसी साल दाख़िला लेने वाले नजीब अहमद 14 अक्टूबर से लापता हैं. उन्हें ढूंढने की लड़ाई दो मोर्चों पर लड़ी जा रही है जिसका हाल देखकर नाउम्मीदी बढ़ती जाती है. इस बीच नजीब की मां फ़ातिमा नफ़ीस ने सभी से अपील की है कि कोई उनका साथ नहीं छोड़ें. वहीं उनकी ताक़त हैं. 

नजीब को ढूंढने के लिए साउथ दिल्ली के एडिशनल डीसीपी मनीष चंद्रा की अगुवाई में एक एसआईटी गठित की गई थी. मगर 25 दिन की दौड़-भाग के बाद टीम उनसे जुड़ा एक भी सुराग नहीं ढूंढ पाई है. अब इस केस की फाइल दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. लेकिन क्राइम ब्रांच के बारे में यह धारणा बेहद मज़बूत है कि जो भी हाईप्रोफाइल केस उसके हाथ में गया, वह सुलझ ही नहीं पाया. लिहाज़ा, अगर क्राइम ब्रांच नजीब से जुड़ा कोई सुराग पा जाती है तो वह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा. 

नजीब को ढूंढने की दूसरी लड़ाई जेएनयूएसयू की अगुवाई में चली रही है. 30 दिन पूरा होने पर इस छात्र संघ ने दिल्ली और आसपास के राज्यों के विश्वविद्यालयों में सक्रिय संगठनों से अपील की थी कि वे जेएनयू पहुंचकर इस आंदोलन को मज़बूत बनाएं. मगर कई दिनों की तैयारी के बावजूद जेएनयू कैंपस में भीड़ नहीं जुट पाई. एक मोटे आंकलन के मुताबिक 15 नवंबर की दोपहर कैंपस में महज़ 3 सौ छात्र ही शामिल हो पाए जिन्होंने गंगा ढाबे से प्रशासनिक भवन तक मार्च निकाला. 

बमुश्किल 300 छात्र जुटे

इससे एक दिन पहले जेएनयू के उप कुलपति जगदीश कुमार और रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने 'चलो जेएनयू' को लेकर एक नोटिस जारी किया था. इसमें जेएनयूएसयू से कहा गया था कि कैंपस में अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों को घुसने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए. सुरक्षा समेत तमाम दिक्कतें आ सकती हैं मगर बाहरी विश्वविद्यालयों के छात्र वैसे भी बेहद कम तादाद में आए. 'चलो जेएनयू' में शामिल होने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र तीन बसों में आने वाले थे लेकिन नोटबंदी की वजह से वे बस का किराया नहीं जुटा पाए. इस मार्च और दिल्ली और केरल के विधायकों ने भी संबोधित किया. 

अभी तक क्या हुआ

मीडिया की सुर्खी बन चुके इस मामले में पुलिस की कार्रवाही पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं. जेएनयू के छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस मामले की जांच में शुरुआत से ही ढिलाई बरती गई.

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में आठ नवम्बर को कहा था कि एमएससी बायोटेक्नोलॉजी का यह लापता छात्र मानसिक और भावनात्मक तौर पर काफी परेशान था. पुलिस को उसके कमरे से डिप्रेशन के इलाज संबंधी पर्चियां मिली हैं.

मनोचिकित्सा के लिए प्रसिद्ध विम्हांस अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि नजीब इलाज के लिए सितम्बर में उनके पास आए थे. हालांकि नजीब के अपहरण का मामला दर्ज है लेकिन उसकी मेडिकल हिस्ट्री देखते हुए पुलिस को शक है कि वह खुद ही कहीं चला गया है.

मेडिकल एक्सपर्ट की मदद से पुलिस नजीब के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल करने में जुटी है ताकि यह पता लगा सके कि वह कहां-कहां जा सकता है.

डीसीपी (दक्षिण) चंद्रा ने कैच को बताया कि मामले की जांच मेडिकल एंगल से करने का फायदा हुआ है. इस संबंध जितने भी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग थे, उनसे बात की जा चुकी है. हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि यह नजीब को ढूंढने में किस प्रकार सहायक रहा है. क्योंकि नजीब का कोई सुराग अब तक नहीं मिल सका है.

जेएनयू के छात्र और नजीब के घरवाले उसे ढूंढ़ने में नाकाम रही पुलिस के बहाने बनाने और उसे 'मानसिक विक्षिप्त' बताने के लिए पुलिस की आलोचना कर रहे हैं. नजीब के 'मानसिक विक्षिप्त' होने का दृष्टिकोण बताते हुए मीडिया ने भी ऐसी रिपोर्टें जारी कर दी कि हो सकता है नजीब कहीं और एक नई पहचान के साथ रह रहा हो.

दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग ने तो यहां तक कह दिया कि उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला नजीब बिहार के दरभंगा में देखा गया था. इस पर तुरंत ही एक पुलिस टीम को वहां भेजा गया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा.

एबीवीपी के आरोप

एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने एक और आशंका जताई है कि वाम गुटों की साजिश के तहत हो सकता है नजीब को यूनिवर्सिटी कैम्पस में ही कहीं छिपा कर रखा गया हो. हालांकि साउथ डीसीपी चंद्रा ने इस तरह की किसी संभावना को नकार दिया है क्योंकि जेएनयू कैम्पस की दो बार तलाशी ली जा चुकी है और वह कहीं नहीं मिला.

वहीं जेएनयू के छात्र संगठनों का कहना पुलिस ने नजीब के लापता होने से एक रात पहले उसे पीटने वाले एबीवीपी छात्रों से अच्छी तरह से पूछताछ नहीं की. साथ ही छात्र नेता दोषी एबीवीपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. चश्मदीदों के मुताबिक एबीवीपी के 20 से ज्यादा लोगों ने उस दिन नजीब के साथ बदसलूकी की. दोषियों में से नौ को तो गवाहों ने पहचान लिया है, इसके अलावा हॉस्टल वार्डन और हॉस्टल में अवैध तरीके से ठहरे बाहरी लोगों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है.

14 अक्टूबर को क्या हुआ था

अभी तक 22 गवाहों ने बयान लिए गए हैं लेकिन जेएनयू छात्रों को शिकायत है कि संदिग्धों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. गवाहों के बयानों के मुताबिक 14 अक्टूबर की रात एबीवीपी के विक्रांत कुमार, सुनील और अंकित हॉस्टल चुनावों के सिलसिले में माही मंडावी होस्टल की पहली मंजिल पर नजीब के कमरे में गए थे.

उस वक्त कमरे में नजीब अकेले थे और उनके साथी कासिम बाहर थे. इसलिए यह कोई नहीं बता सकता कि कमरे के अंदर क्या हुआ?

विक्रांत कुमार ने बताया कि नजीब ने उसके हाथ में पहने गए कलावा (रक्षा धागा) का मजाक उड़ाते हुए पूछा कि यह क्या है और उसने पहले थप्पड़ मारा. थोड़ी देर बाद ही लोगों ने देखा नजीब के कमरे के बाहर एबीवीपी के 20 से ज्यादा कार्यकर्ता नजीब को पीट रहे हैं. इनमें वे तीन लोग भी शामिल थे, जो उसके कमरे में गए थे.

जेएनयू छात्र संघ नेता मोहित कुमार पांडे और उसके कुछ साथी नजीब को बचाने के लिए दौड़े और लहूलुहान हालत में उसे बाथरूम में ले जा कर बाथरूम बंद कर लिया लेकिन एबीवीपी कार्यकर्ता बाथरूम का दरवाजा तोड़ वहां भी घुस गए और उसके साथ मारपीट की. उसके बाद वे हॉस्टल वार्डन के कक्ष तक पहुंचने से पहले भी उसे मारते-पीटते गालियां देते रहे.

एबीवीपी वालों के मुताबिक नजीब ने वार्डन के सामने 'अपनी गलती मान ली' और उसे दूसरे हॉस्टल भेज दिया गया. अगले दिन विजिटर रूम में एक डेस्क पर कथित तौर पर लिखा देखा गया 'मुसलमान आतंकवादी हैं.'

15 अक्टूबर से लापता

15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे नजीब को वहां आखिरी बार देखा गया. नजीब ने अपनी मां को हॉस्टल बुलाया था लेकिन जब वह हॉस्टल पहुंची तो वहां नजीब नहीं मिला. इस बीच, एबीवीपी छात्र और जेएनयू छात्र संगठन के संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा ने कहा कि एबीवीपी ने भी नजीब के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है कि उसने विक्रांत को मारा था.

पिछले एक महीने से इस मामले में काफी हंगामा चल रहा है. विरोध कर रहे छात्रों ने जेएनयू के उपकुलपति जगदीश कुमार और अन्य अधिकारियों को 20 घंटे तक कैम्पस के एडम ब्लॉक में नजरबंद कर दिया था. ऐसे ही छह नवम्बर को इंडिया गेट पर निकाले जाने वाले जुलूस के दौरान दिल्ली पुलिस ने कुछ घंटों के लिए नजीब की मां व बहन को पकड़ कर रखा था.

तीन नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री व आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के शशि थरूर और सीपीआई (एम) के नेता प्रकाश करात ने छात्रों को संबोधित कर घटना पर रोष जताया था. 

केजरीवाल ने इस संबंध में दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है. नजीब की मां फातिमा नफीस ने भी अपने बेटे की गुमशुदगी के सिलसिले में राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उन्होंने उनके बेटे को जल्द ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया. फातिमा ने मामले में सीबीआई जांच की मांग की है.

First published: 16 November 2016, 12:06 IST
 
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