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ज्यादातर गिरफ्तार विधायक वही हैं जिनके बारे में प्रशांत भूषण ने चुनाव पूर्व आगाह किया था

सुहास मुंशी | Updated on: 5 August 2016, 7:43 IST
QUICK PILL
अमानतुल्लाह खान: सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य का निर्वाह करने से रोकने और मारपीट के आरोप (आईपीसी की धारा 353) से संबंधित एक आरोप. सांप्रदायिक पोस्टर का आरोप, दो करोड़ से अधिक की संपत्ति.नरेश यादव: बीस करोड़ से अधिक की संपत्ति. महरौली दक्षिण से विधायक.प्रकाश जरवाल: सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वाह से रोकने के लिए जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने का आरोप. आईपीसी की धारा 332 के तहत मामला दर्ज.

सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ़ सालों में आम आदमी पार्टी के हर छठवें विधायक को गिरफ्तार किया जा चुका है. अगर यही दर कायम रही, तो आप के पांच साल का कार्यकाल का पूरा होने तक केजरीवाल सरकार के आधे से अधिक लोग हवालात के भीतर नजर आयेंगे.

अगर इस सोच-विचार को एक तरफ रख दिया जाय, तो ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है जिन्हें इस बात से कोई आश्चर्य नहीं होता. ऐसे लोगों को परपीड़ा का सुख भी मिलता है, जब भी पुलिस आप के किसी विधायक को गिरफ्तार करती है. प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और आनंद कुमार कभी आप के साथ थे और उन्होंने दावा किया था कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के उतावलेपन में कुछ गलत लोगों को टिकट दिए गए थे.

भूषण, जो आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे, ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए आप के उम्मीदवारों में से 12 ऐसे लोगों की एक सूची जारी की थी, जिनके खिलाफ उनके मुताबिक गलत आचरण के पर्याप्त सबूत थे.

भूषण ने 2015 के विधानसभा चुनावों के पहले 12 आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की सूची जारी की थी

इनमें एक नाम था अमानतुल्लाह खान का, जो ओखला से आप के विधायक हैं. खान को 23 जुलाई को गिरफ्तार किया गया. उन पर एक महिला ने यह आरोप लगाया कि जिस गाड़ी में खान बैठे थे उसने उन्हें कुचलने की कोशिश की. धारा 164 के तहत 22 जुलाई को मजिस्ट्रेट के सामने उस महिला के बयान देने के बाद खान को गिरफ्तार किया गया.

उसी महिला ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक की ओर से मारने की कोशिश के तीन दिन पहले जब उसने विधायक के आवास पर बिजली की आपूर्ति का मसला उठाया था, तब एक युवक ने उन्हें गालियां दी थीं और मारने के लिए धमकाया था. खान पर इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास करने), जो गैरजमानती अभियोग है, के तहत मामला दर्ज किया गया और गिरफ्तार कर लिया गया.

वह आप के दसवें विधायक थे जिन्हें गिरफ्तार किया गया है. आप के कर्ताधर्ता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमानतुल्लाह की गिरफ्तारी पर यह ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की, “मोदीजी ने आप के एक और विधायक को गिरफ्तार कर लिया.”

खान वही व्यक्ति है जिसके खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने कभी कार्रवाई की मांग की थी. पार्टी के तत्कालीन लोकपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) लक्ष्मीनारायण रामदास के सामने भूषण ने जो शिकायत की थी, उसके मुताबिक अमानतुल्लाह को एक विवादित सांप्रदायिक पोस्टर जारी करने का दोषी पाया गया था. और उसके बाद खुद केजरीवाल ने ही खान के खिलाफ ट्वीट कर कार्रवाई की मांग की थी.

दरअसल भूषण और उनके साथियों की उस सूची में आप के उम्मीदवारों में से कई और लोगों के नाम थे, जो लोग अब आप के मौजूदा विधायक हैं. मसलन उसमें आरके पुरम की विधायक प्रमिला टोकस का नाम भी था, उन पर और उनके पति और बीएसपी सदस्य धीरज टोकस पर एक अनुसूचित जाति की महिला के साथ मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज है.

भूषण की सूची में आप के उम्मीदवारों में से कई और लोगों के नाम थे, जो लोग अब आप के विधायक हैं

या फिर छतरपुर के विधायक करतार सिंह तंवर का ही मामला देखिये, जो पहले भाजपा की ओर से म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन चेयरमैन थे. भूषण ने जो शिकायत की थी, उसके मुताबिक तंवर जूनियर इंजीनियर से हजार करोड़ रुपये के आदमी बन गये और कथित तौर पर बाहरी दिल्ली के गांवों में बिल्डर माफिया के सदस्य हैं.

दरअसल आप जो गलतियां करते हैं, उनका खामियाजा आपको कभी न कभी भुगतना ही पड़ता है. शायद 'आप' के सामने भी ऐसा ही वक्त आ गया है?

स्वराज अभियान के सह संस्थापक योगेन्द्र यादव, जो अभी प्रशांत भूषण और आनंद कुमार के साथ मिल कर अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने में व्यस्त हैं, कहते हैं, कुछ आप विधायकों के खिलाफ छोटे-मोटे मामले हैं, लेकिन कुछ के खिलाफ आरोप वाकई गंभीर हैं.

वह कहते हैं, “जिस तरह से पुलिस और सीबीआई आप के पीछे पड़ गये हैं, वह अभूतपूर्व है. आप के नेताओं के पीछे पड़ने के लिए उन्होंने काफी अधिक संसाधन लगा रखे हैं. मैंने कभी ऐसा नहीं देखा. लेकिन अगर कोई पार्टी अपने पूरे बल के साथ केंद्र को चुनौती देती हो, तो उसे इससे कम की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए.”

वह आगे कहते हैं, “लेकिन अगर आप जितेंद्र सिंह तोमर या शरद चौहान या अमानतुल्लाह जैसे लोगों का बचाव करने की कोशिश कर रही है, तो फिर उत्पीड़ित किये जाने की बात कह कर वह बच नहीं सकते. हां, हमने इन लोगों की उम्मीदवारी पर एतराज किया था. पार्टी के भीतर शर्मिंदगी की भावना होनी चाहिए. जाहिर है कुछ लोगों के खिलाफ मामले बनाये गये हैं, लेकिन शरद चौहान और सोमनाथ भारती के खिलाफ फर्जी मामले नहीं हैं.”

आनंद कुमार के मुताबिक पार्टी का अधिकांश नुकसान उसका खुद का किया-धरा है. कुमार कहते हैं, “यह दुखद है कि प्रशांत भूषण की चेतावनी सही साबित हुई है. मोदी के ऊपर सारे आरोप डाल देना अब ठीक नहीं है. केजरीवाल चुनाव हारने की आशंका से इतने डर गये थे कि उन्होंने सारी चेतावनियों को अनदेखा कर दिया. यह उस अहंकार का नतीजा है जो केजरीवाल में आ गया है. ईमानदारी से कहा जाये तो उन्हें दुश्मनों की जरूरत नहीं है, वह असफलता के लिए अभिशप्त हैं.”

First published: 5 August 2016, 7:43 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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