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मॉब लिंचिंग: कमेटी की पहली मीटिंग में कानून बनाने पर हुई चर्चा, SC ने केंद्र सरकार को दिए थे आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2018, 18:44 IST

देश में बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने केंद्र की मोदी सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है. इसे लेकर शुक्रवार (27 जुलाई) को केंद्र सरकार की ओर से गठित विशेष कमेटी ने पहली बैठक की. गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में इस बैठक में देश में बढ़ रही लिंचिंग की घटनाओं को लेकर एक नया कानून बनाने पर विचार किया गया. आज शनिवार को इस कमेटी की एक और बैठक है.

दरअसल पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लिंचिंग पर कानून बनाने का निर्देश दिया था. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सरकार ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया था. चार सदस्यों वाली इस समिति की अगुवाई केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा कर रहे हैं. वह लिंचिंग से संबंधित कानूनों के बारे में समिति को सुझाव देंगे.

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इसी को लेकर शुक्रवार को समिति की बैठक हुई. सूत्रों के मुताबिक, अपनी पहली बैठक में समिति के सदस्यों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश समझाया गया. इसके अलावा मॉब लिंचिंग की रोकथाम के लिए सुझाव लिए गए. कुछ ने विचार-विमर्श आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में परिवर्तन करने का सुझाव दिया. 

बता दें कि सीआरपीसी की धारा 223 (ए) के तहत "एक ही लेनदेन में किए गए उसी अपराध के आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के लिए कानूनी प्रावधान है." लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लिंचिंग के केसों में मुकदमा चलाने के लिए यह प्रावधान बहुत कम है. कमेटी ने यह भी सिफारिश की कि मॉब लिंचिंंग के आरोप में गिरफ्तार लोगों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

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सूत्रों के मुताबिक, शनिवार की बैठक में पैनल ने बच्चा चोरी और गौ-तस्करी के अफवाहों के उदाहरण लेने की संभावना है. क्योंकि दोनों कारणों से ही मॉब लिंचिंग की घटनाओं में बढ़ोत्तरी आई है. एक सूत्र ने बताया कि दूसरी बैठक में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करने की संभावना है. जैसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को देखकर कानून में संशोधन लाने पर बात की जाएगी. 

First published: 28 July 2018, 12:19 IST
 
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