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आगामी चुनावों की रोशनी में बदलेगी सरकार और संगठन की सूरत

समीर चौगांवकर | Updated on: 28 May 2016, 7:05 IST

हालिया पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा को मिली बढ़त के बाद अब मोदी और शाह ने सरकार और संगठन में बड़े बदलाव की तरफ कदम बढ़ाने का संकेत दिया है. पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को हुई अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस बात का इशारा दिया. कुछ दिन पहले देर रात अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैठक भी की.

प्रधानमंत्री और शाह के बीच इससे पहले अलग से भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और संगठन में बदलाव के लिए विचार विमर्श हो चुका है. सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों पर गाज गिरनी तय है. ये वे मंत्री हैं जिनका रिपोर्ट कार्ड बेहतर नहीं रहा है. मोदी सरकार का यह फेरबदल और शाह की टीम का गठन अगले साल 2017 में उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और पंजाब में होने जा रहे चुनाव को ध्यान में रखकर किया जाएगा.

असम के चुनाव प्रभारी रहे पार्टी महासचिव राम माधव को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है

नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में इस समय मोदी को मिलाकर 27 कैबिनेट मंत्री,13 स्वतंत्र प्रभार के मंत्री और 25 राज्य मंत्री हैं. इस तरह कुल मंत्रियों की संख्या 65 मंत्री है. असम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कैबिनेट मंत्री सर्वानंद सोनवाल की जगह किसी नए मंत्री का आना तय है.

असम के चुनाव प्रभारी रहे और मोदी की विदेश यात्राओं का प्रबंधन देखने वाले महासचिव राम माधव को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है. संभावना है कि उन्हें वीके सिंह की जगह नया विदेश राज्य मंत्री बनाया जाय. चुनाव को ध्यान में रखकर पश्चिम बंगाल से बाबुल सुप्रियो और तमिलनाडु से मंत्री बनाए गए पी राधाकृष्णन को कैबिनेट से हटाया जा सकता है.

आगामी विधानसभा चुनावों का असर

2017 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है उनमें से सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश से सबसे ज्यादा मंत्री है. उत्तरप्रदेश के कुछ मंत्रियों को हटाकर उत्तरप्रदेश के अन्य नेताओं को जगह दी जा सकती है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जहां अगले साल चुनाव है, से लोकसभा का एक भी सदस्य मंत्री नहीं है. हालांकि हिमाचल से आने वाले जगत प्रकाश नड्डा केन्द्र में स्वास्थ मंत्री है लेकिन वह राज्यसभा से है. हिमाचल प्रदेश से भाजपा के चार और उत्तराखंड से भाजपा के पांच सांसद है. भाजपा जगत प्रसाद नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर हिमाचल प्रदेश भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है. गोवा से रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और श्रीपाद यशो नाईक केंन्द्र में मंत्री है. मनोहर पार्रिकर भी राज्यसभा में है. पंजाब से विजय सांपला केन्द्र में मंत्री है. संघ की इच्छा पर मनोहर पर्रीकर को गोवा फिर से भेजे जाने की चर्चा है वही विजय सांपला को पंजाब का अध्यक्ष बनाने के बाद मंत्रीमंडल से जाना लगभग तय है. गुजरात से भी तीन राज्य मंत्री केंन्द्र में है. प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के गुजरात से होने के कारण केन्द्र में गुजरात को और प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना कम ही है. चर्चाएं हैं कि बिहार विधानसभा के समय बिहार से बनाए गए मंत्रियों में से कुछ पर गाज गिर सकती है. बिहार के राम कृपाल यादव, गिरिराज सिंह, उत्तरप्रदेश से साध्वी निरंजन ज्योति, राम शंकर कटेरिया की मंत्रिमंडल से विदाई हो सकती है.

एनडीए के सहयोगी दल

एनडीए के सहयोगी शिवसेना और तेलगुदेशम से खराब हो चुके रिश्तों के बाद इन दोनो दलों के मंत्री भी सरकार से बाहर हो सकते है. शिवसेना से अनंत गीते और टीडीपी से चौधरी केन्द्र में मंत्री है. एनडीए के एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंन्द्र कुशवाहा की भी मंत्रिपरिषद से विदाई की बात कही जा रही है.

विभागों की अदला-बदली

अल्पसंख्यक मामले की मंत्री नजमा हेपतुल्ला, महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी का विभाग बदला जा सकता है. निर्मला सीतारमन और पीयुष गोयल को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है. जम्मू में भाजपा की सहयोगी पीडीपी को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है.

संगठन में फेरबदल

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए उत्तराखंड के 9 विधायकों में से कुछ को भाजपा संगठन में जगह दी जा सकती है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भी किसी तरीके से फायदा पहुंचाने की कोशिश रहेगी.

सरकार के अलावा संगठन भी प्रधानमंत्री की चिंताओं में सबसे ऊपर है. संगठन की मजबूती के लिए रकार से हटाए गए  कुछ केन्द्रीय मंत्रियों को वापस संगठन में भेजने पर विचार चल रहा है.

शाह की टीम में महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे राम माधव मंत्री बनाए जा सकते है. सरोज पांडे को महासचिव पद से हटाया जा सकता है. मध्यप्रदेश के प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे शाह की टीम में महासचिव बन सकते है. कर्नाटक के अध्यक्ष बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की जगह किसी अन्य का उपाध्यक्ष बनना तय है.

मोदी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री की जिम्मेंदारी निभा रहें राज्यवर्धन राठौर को मोदी सरकार में कैबिनेट का दर्जा मिल सकता है. राठौर को असम के मुख्यमंत्री बनने जा रहे सर्वानंद सोनवाल की जगह युवा और खेल मंत्रालय का प्रभार दिए जाने की सुगबुगाहट है. हालांकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्यवर्धन राठौर के बेहतर काम के चलते केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अरूण जेटली उनका मंत्रालय बदलने को तैयार नहीं हैं.

राजस्थान से केंद्र सरकार में तीन मंत्री निहालचंद, सांवरलाल जाट और राज्यवर्धन राठौर हैं. निहालचंद को पदमुक्त किया जा सकता है. राठौर के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में बने रहने पर राजस्थान से एक और मंत्री बन सकता है.

First published: 28 May 2016, 7:05 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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