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मोदी मंत्रिमंडल विस्तार: 19 नए मंत्री शामिल, दलितों पर विशेष नजर

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 July 2016, 6:57 IST
(पीआईबी ट्विटर)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद का आज दूसरा विस्तार हो गया है. राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में 20 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई. इससे पहले नवंबर 2014 में मोदी मंत्रिपरिषद का पहला विस्तार हुआ था. नए विस्तार में जो ट्रेंड देखने को मिला है उसमें भाजपा दलितों पर अपना ध्यान अधिक से अधिक लगाना चाहती है. कुल छह मंत्री दलित और अनुसूचित जाति से मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं.

इसके अलावा उत्तर प्रदेश का दबदबा मंत्रिमंडल में थोड़ा और बढ़ा है.

सबसे पहले प्रकाश जावड़ेकर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई. उनका कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोशन हुआ है. अभी उनके पास वन और पर्यावरण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार था. जावड़ेकर के अलावा बाकी 19 सांसदों को राज्यमंत्री की शपथ दिलाई गई.

प्रकाश जावड़ेकर के बाद मध्य प्रदेश के मंडला से बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने राज्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ली. उनका नाम कैश फॉर वोट मामले में भी चर्चा में रहा था.

प्रकाश जावड़ेकर का प्रमोशन

कुलस्ते के बाद पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से बीजेपी सांसद एसएस अहलूवालिया को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. अहलूवालिया राज्यसभा के भी सदस्य रहे हैं. वो वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं.

रमेश चंडप्पा जिगाजिनागी ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. वे कर्नाटक के बीजापुर से बीजेपी सांसद हैं. 1998 में वे पहली बार सांसद बने. इसके अलावा वे कर्नाटक सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं.

इसके बाद राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने राज्यमंत्री की शपथ ली. दिल्ली की राजनीति में गहरी पकड़ रखने वाले गोयल अभी राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं. वे 2001 से 2003 के दौरान वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं.

अठावले भी मंत्रिपरिषद में शामिल

विजय गोयल के बाद रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के रामदास अठावले ने राज्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ली. 2014 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए.

महाराष्ट्र की सियासत में दलित कद्दावर नेता के रूप में उनकी गिनती है. उन्होंने शपथ लेने के बाद जय भीम और जय भारत का संबोधन भी किया.

अठावले के बाद असम के नौगांव से बीजेपी सांसद राजन गोहेन ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली. समाजिक कार्यकर्ता और कृषि विशेषज्ञ के रूप में उनकी ख्याति है. वह चौथी बार लोकसभा सांसद बने हैं.

मध्य प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली. नर्मदा नदी संरक्षण अभियान में भी वे सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं.

गुजरात से बीजेपी के राज्यसभा सांसद पुरुषोत्तम रुपाला ने दवे के बाद मंत्री पद की शपथ ली. वे बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. गुजरात के प्रभावशाली पाटीदार समाज से वे आते हैं.

राजस्थान-यूपी से तीन-तीन मंत्री

वरिष्ठ पत्रकार और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एमजे अकबर को कैबिनेट विस्तार में राज्यमंत्री की शपथ दिलाई गई. वे 2016 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने गए. इससे पहले वह झारखंड से राज्यसभा सांसद थे. एमजे अकबर कई अखबार और पत्रिकाओं के संपादक भी रह चुके हैं.

राजस्थान के दलित नेता और बीकानेर से सांसद अर्जुनराम मेघवाल को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिली है. बेहद सादगी पसंद की छवि रखने वाले मेघवाल आईएएस की नौकरी से रिटायर होने के बाद बीजेपी में शामिल हुए. पहली बार वे 2009 में लोकसभा सदस्य चुने गए. बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के भी वे सदस्य हैं.

मेघवाल के बाद जसवंत सिंह भांभोर ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली. वे गुजरात के दाहोद से बीजेपी सांसद हैं. भांभोर इससे पहले गुजरात सरकार में भी मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. 

यूपी के चंदौली से सांसद महेंद्र नाथ पांडेय को राज्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. 1977 में वे पहली बार यूपी कैबिनेट में मंत्री बने. बीएचयू से पीएचडी करने वाले पांडेय 2002 में भी यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं.

ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले पांडेय को मंत्री बनाकर यूपी में जातीय गणित साधने की कोशिश की गई है. राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से बीजेपी सांसद अजय टम्टा को मोदी सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया है. उत्तराखंड में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

इसके अलावा यूपी के शाहजहांपुर से बीजेपी सांसद कृष्णा राज को राज्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. 2014 में वे पहली बार सांसद बनीं. इससे पहले कृष्णा राज दो बार विधायक भी रह चुकी हैं.

गुजरात से राज्यसभा सांसद मनसुख मंडाविया को राष्ट्रपति ने राज्यमंत्री की शपथ दिलाई. कृषि के क्षेत्र में लंबे अरसे से सक्रिय ने गुजरात एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन की अगुवाई की है. वे 2002 से 2007 के दौरान राज्य विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. 

अपना दल की नेता और यूपी के मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को मोदी सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया. वे पहली बार सांसद बनी हैं. इससे पहले 2012 में वे वाराणसी के रोहनियां से विधायक चुनी गई थीं. कुर्मी समुदाय (ओबीसी) से आने वाली अनुप्रिया पटेल को यूपी चुनाव के मद्देनजर मंत्री पद मिलना पहले ही तय माना जा रहा था.

राजस्थान से दो जाट मंत्री

अनुप्रिया पटेल के बाद राजस्थान के नागौर से सांसद सीआर चौधरी ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली. जाट समाज से आने वाले सीआर चौधरी पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में जीतकर आए हैं. चौधरी, राज्य प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रहने के साथ ही मेवाड़ यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रह चुके हैं. 

राजस्थान के ही पाली लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद पीपी चौधरी ने भी राज्यमंत्री पद की शपथ ली. पीपी चौधरी भी पहली बार सांसद बने हैं. माना जा रहा है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली से करीबी की बदौलत उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है. पीपी चौधरी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील भी हैं.

कैंसर सर्जन भामरे बने मंत्री

सबसे आखिर में महाराष्ट्र के धुले से बीजेपी सांसद सुभाष राम राव भामरे ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली. भामरे की गिनती देश के जाने-माने कैंसर सर्जरी स्पेशलिस्ट के तौर पर होती है. इस तरह कुल 20 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मंत्री पद की शपथ ली. इनमें से 19 नए चेहरे हैं.

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद दो साल के अब तक के कार्यकाल में मंत्रिपरिषद का यह दूसरा विस्तार है. बताया जा रहा है कि आखिरी दौर में आरएसएस के साथ चर्चा के बाद सोमवार को अरुण जेटली से बातचीत करके अमित शाह ने फाइनल लिस्ट पीएम मोदी को सौंपी.

First published: 6 July 2016, 6:57 IST
 
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