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इस संसदीय समिति की बैठकों में होती है रावण रचित 'शिव तांडव स्तुति'

अनिल चमड़िया | Updated on: 13 July 2016, 13:04 IST
(एजेंसी)

इन दिनों राज्यसभा की एक समिति की बैठकें अक्सर एक धार्मिक नोट पर आकर समाप्त होती हैं. बैठक की कार्यवाही पूर्ण करने से पहले कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य डॉ. टी सुब्बारामी रेड्डी समिति के सदस्यों के समक्ष 'शिव तांडव स्तुति' (जिसे रावण द्वारा लिखित माना जाता है) का पाठ करते हैं.

वे अपने सस्वर पाठ के अंत में उन सबको आशीर्वाद भी देते हैं. दौरे के दौरान समिति की बैठकों का आयोजन उनके परिवार के स्वामित्व वाले एक होटल में किया गया. यहां तक कि डॉ. रेड्डी एक उद्योगपति सांसद को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में समिति की बैठक में भाग लेने की अनुमति दे देते हैं.

संसद की अनेक समितियां हैं. इन समितियों के दैनिक मामलों की छानबीन शायद ही कभी की जाती होगी। ऐसी ही एक समिति है- अधीनस्थ विधान संबंधी राज्यसभा समिति.

इस समिति में 15 सदस्य हैं. राज्यसभा की वेबसाइट के मुताबिक, अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के नाम से पुकारी जाने वाली समिति का गठन राज्यसभा में कार्य संचालन के नियम 204-206 के तहत किया गया है.

इसका काम यह छानबीन करना और सुनिश्चित करना है कि नियमों, विनियमों, उपनियमों, योजनाओं या अन्य सांविधिक उपकरणों के निर्माण के लिए संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रतिनिधिमंडल के भीतर सही तरीके से उपयोग हो रहा है या नहीं.

अधीनस्थ विधान संबंधी राज्यसभा समिति का गठन पहली बार 1964 में किया गया था.

रेड्डी समिति की हर बैठक में ऐसा ही करते हैं

आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य डॉ. टी सुब्बारामी रेड्डी इस समिति के वर्तमान अध्यक्ष हैं. इस समिति के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि इसके अध्यक्ष डॉ. रेड्डी हर बैठक में रामचरित मानस के सबसे "कुख्यात" चरित्र रावण द्वारा लिखित 'शिव तांडव स्तुति' का पाठ करते हैं.

सस्वर पाठ के बाद वे एक ब्राह्मण पुजारी की तरह आशीर्वाद देने के लिए अपने हाथ उठाते हैं. वे भगवान शिव के शिष्य हैं और 'शिव ताण्डव स्तोत्रम' के श्लोकों-मंत्रों का संस्कृत में उच्चारण करते हैं. कई सदस्य इस मुद्दे पर विस्तार से बात करने से बचते रहे, लेकिन उनमें से किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया.

समिति के कुछ सदस्य गैर हिंदू भी हैं

अन्य संसदीय समितियों की तरह, इस समिति के सदस्य भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हैं. इन सदस्यों के अलावा कुछ गैर-हिंदू सदस्य भी हैं.

संवैधानिक रूप से हम एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हैं और इस तरह आधिकारिक बैठक में किसी भी प्रकार का धार्मिक जप सख्त निषेध है.

यह एक अजीब विरोधाभास है कि समिति के सदस्य डॉ. रेड्डी के सस्वर पाठ पर कोई आपत्ति नहीं करता, बल्कि वे इसे नजरअंदाज करते हैं और मुस्कुराते हैं.

बिहार से जद (यू) के टिकट पर दूसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा आए अली अनवर इस समिति के एकमात्र मुस्लिम सदस्य हैं.

समिति की बैठकों के लिए अपने नियम बनाते हैं

इस समिति की बैठकों के लिए डॉ. रेड्डी का नियमों का स्वयं का संग्रह है. समिति की मुंबई यात्रा के दौरान उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों की एक बैठक में भाग लेने के लिए वीडियोकॉन के राजकुमार धूत को आमंत्रित कर लिया.

समिति वहां भारतीय रिजर्व बैंक के एक परिपत्र के बारे में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए गई थी. डॉ. रेड्डी और राजकुमार धूत का बैंकिंग क्षेत्र के साथ एक पुराना वाणिज्यिक रिश्ता है.

धूत की तरह, डॉ. रेड्डी भी एक बिजनेस टाइकून हैं। उनके नाम के समक्ष 175 करोड़ रुपये की देनदारी है.

हालांकि राजकुमार धूत भी राज्यसभा के एक सदस्य हैं, लेकिन फिर भी इस समिति के सदस्य उनको विशेष रूप से इस समिति की बैठक में बुलाने के पीछे कोई तार्किक और प्रत्यक्ष कारण नहीं समझा पाते.

समिति के एक पूर्व सदस्य ने की आलोचना

इस समिति के एक पूर्व सदस्य एमपी अचुत्याथन इसे सही कदम नहीं मानते हैं. समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ बातचीत के दौरान यह काफी स्पष्ट था कि इस समिति की कार्यवाही आम जनता के लिए पारदर्शी नहीं है.

समिति से संबंधित जानकारी के प्रसार की बजाय अधिकारी की दिलचस्पी उसे छुपाने में अधिक थी. उन्होंने यह विवरण देने से इनकार कर दिया कि इस समिति ने रिजर्व बैंक के किस परिपत्र के संदर्भ में बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों से मुलाकात की थी.

उन्होंने इस जानकारी को गोपनीय करार दिया. जब हैदराबाद में इस समिति की बैठक के आयोजन स्थल के बारे में पूछा गया, तब भी उनका रवैया इसी तरह का था.

हालांकि, अन्य सूत्रों ने पुष्टि की है कि हैदराबाद में इस समिति की बैठक डॉ. रेड्डी के परिवार के स्वामित्व वाले एक आलीशान होटल में आयोजित की गई थी.  यह स्पष्ट रूप कई सदस्य इस मुद्दे पर विस्तार से बात करने से बचते रहे, लेकिन उनमें से किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया. निश्चित रूप से यह सरकारी हितों पर व्यक्तिगत हितों के हावी होने का मामला है.

समिति के कई पूर्व और वर्तमान सदस्यों से इस लेख के लेखक ने संपर्क किया. उनमें से एक ने कहा कि समिति के अध्यक्ष के पास यह विशेषाधिकार होता है कि वह अपनी बैठक में अन्य राज्यसभा सदस्य को आमंत्रित कर सकता है, लेकिन उनके मंसूबे स्पष्ट और परिभाषित होने चाहिए.

कई सदस्य इस मुद्दे पर विस्तार से बात करने से बचते रहे, लेकिन उनमें से किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया.

राज्यसभा की वेबसाइट पर जानकारी नहीं

इस पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा की वेबसाइट पर इस समिति की बैठकों के बारे में कोई नवीनतम जानकारी उपलब्ध नहीं है.

वेबसाइट पर 2015 के बाद से इस समिति की बैठकों और दौरों के बारे में जानकारी का अभाव है. जब इस बारे में पूछा गया तो समिति के एक अधिकारी ने अनभिज्ञता जाहिर कर दी.

उन्होंने इस संवाददाता को कह दिया कि जानकारी एकत्रित करने की इच्छा है तो सूचना के अधिकार का उपयोग करें और विस्तृत जानकारी जुटा लें. यह एक कठोर सच्चाई है कि संसदीय समितियों में से कई को अपनी बैठकों और दौरों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करना नापसंद है.

First published: 13 July 2016, 13:04 IST
 
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