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'कांग्रेस का आइडिया था सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण, 8 साल पहले बनाई थी योजना'

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2019, 10:08 IST

मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों के पहले सबसे बड़ा दांव खेलते हुए सवर्णों के लिए आर्थिक आधार पर 10 फ़ीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है. लेकिन अब सरकार के इस फैसले पर अन्य विपक्ष की तरफ से कई प्रतिक्रियां आना शुरू हो गई हैं. कांग्रेस ने एक तरफ तो आर्थिक आधार पर आरक्षण का समर्थन किया है लेकिन साथ ही में चुनावों के ठीक पहले आये इस फैसले सा सरकार की नियत पर सवाल उठाए हैं.

साथ ही में कांग्रेस ने ये भी दावा किया है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए यूपीए सरकार ने 2010-11 में ही एक आयोग का गठन किया था. जिसकी रिपोर्ट के आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था. कांग्रेस का दावा है कि मोदी सरकार ने जाते-जाते उसी रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला किया है.


कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार के सवर्णों के आरक्षण के इस फैसले पर कांग्रेस का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, ''हमारी पार्टी हमेशा गरीबों को आरक्षण देने तथा उनके उत्थान की पक्षधर रही है. कांग्रेस का मानना है कि दलितों, आदिवासियों तथा पिछड़ों के संवैधानिक आरक्षण से कोई छेड़छाड़ ना हो.''

साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के सभी गरीबों को शिक्षा और रोजगार का मौका मिले ये कांग्रेस हमेशा से चाहती है. साथ ही इस आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं. लेकिन साथ ही में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जब यह निर्णय लिया है तो इसके साथ ही इससे जुड़े सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच अवश्य की हो होगी.

मोदी सरकार की नियत पर सवाल

आर्थिक आरक्षण का समर्थन करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि पिछले चार साल आठ महीने तक सत्ता में रहते हुए जो सरकार गरीबों से बेपरवाही रही वो ही मोदी सरकार आज संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन गरीबों की याद कर रही है. इसी के साथ रोजगार के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए सुरजेवाला ने कहा, ''मोदी सरकार में किसान, गरीब, छोटा दुकानदार, सामान्य कारोबारी और उद्यमी परेशान रहे हैं और सबका काम चौपट हो गया है. इस सरकार ने जो जीएसटी लागू किया उसने दो करोड़ से अधिक गरीबों का रोजगार छीना है और अर्थव्यवस्था को साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है.''

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गौरतलब है कि मोदी सरकार की कैबिनेट ने सवर्ण जातियों की 10 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट बैठक में सवर्ण जातियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया गया है. आज यानी मंगलवार को संसद का अंतिम दिन होने के कारण इस सत्र में दोनों सदनों में सरकार इसके लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी. लेकिन फिलहाल ये कहा जा सकता है कि इसके पारित होने की संभावना न के बराबर है. क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इसे पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी. लेकिन राज्यसभा में सत्ता पक्ष के पास आवश्यक बहुमत नहीं है.

 

First published: 8 January 2019, 8:51 IST
 
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