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मोदी सरकार करने जा रही है 150 ट्रेनों का निजीकरण, निजी हाथों में जाएंगे 50 रेलवे स्टेशन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 October 2019, 9:14 IST

आने वाले कुछ सालों में भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी करने का आपका सपना चकनाचूर हो सकता है. दरअसल, सरकार तेजस के बाद देशभर के 50 रेलवे स्टेशन और 150 ट्रेनों के संचालन नीजी कंपनियों के हाथ में सौपने जा रही है. इसका मतलब इन 50 रेलवे स्टेशन और 150 ट्रेनों में नीजी कंपनियों के कर्मचारी ही काम करेंगे और वह अपनी मर्जी से कर्मचारियों का वेतन और तमाम तरह की सुविधाएं भी लागू करेंगे.

जो शायद सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन और भत्तों से कम भी हो सकते हैं. बता दें कि वर्तमान में भारतीय रेलवे सरकारी विभाग में सबसे अधिक नौकरियों का सृजन करने वाला क्षेत्र है. लेकिन मोदी सरकार की नीतियां अब इस क्षेत्र को निजी हाथों में देकर आपके सरकारी नौकरी करने के सपने को चकनाचूर करने का काम कर रही हैं.

दरअसल, केंद्र सरकार ने देश के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के निजीकरण की कोशिशें तेज कर दी हैं. देश की पहली निजी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन तेजस को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाई और इसी के साथ तेजस देश की पहली नीजी क्षेत्र द्वारा चलाई गई ट्रेन बन गई. अब केंद्र सरकार ने 50 रेलवे स्टेशनों और 150 ट्रेनों का निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव को एक पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि, "जैसा कि आप पहले से जानते हैं कि रेल मंत्रालय ने पैसेंजर ट्रेनों के संचालन को निजी ट्रेन ऑपरेटरों को देने का फैसला लिया है और पहले चरण में 150 ट्रेनों को इसके तहत लेने का विचार कर रहा है."

वहीं 50 रेलवे स्टेशनों के निजीकरण के बारे में कांत ने कहा कि उन्होंने इसे लेकर रेल मंत्री से विस्तार में बातचीत कर चुके हैं और इस मामले को प्राथमिकता देने की जरूरत महसूस की गई.

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First published: 10 October 2019, 9:11 IST
 
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